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नीति नियम: AI और नियामकों में बढ़ेगा टकराव!

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नियम बनाने वालों ने अब इस तथ्य के साथ जीना सीख लिया है कि वे तकनीकी नवाचार करने वालों से हमेशा पीछे रहेंगे और उन तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

Last Updated- January 04, 2024 | 9:37 PM IST
Artificial intelligence

नियम-कायदे बनाने की कला का एक सार्वभौमिक सत्य यह है कि नियम बनाने वाले अनिवार्य तौर पर तकनीकी विकास के मुकाबले पीछे ही रह जाते हैं। उदाहरण के लिए अमेरिकी सड़कों पर कारें आम होने के दो दशक बाद ही पहला ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य किया गया था। नियम बनाने वालों ने अब इस तथ्य के साथ जीना सीख लिया है कि वे तकनीकी नवाचार करने वालों से हमेशा पीछे रहेंगे और उन तक पहुंचने के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

वर्ष 2024 में हमारी सबसे बड़ी चुनौती नवाचार की रफ्तार और नियामकीय कार्रवाई के बीच चौड़ी होती खाई से निपटना है खासकर उन महत्त्वपूर्ण क्षेत्रों में जहां इस बढ़ती खाई का सबसे ज्यादा असर पड़ता है। यह खाई कई वर्षों से बढ़ती जा रही है और अब इतनी बड़ी हो चुकी है कि कुछ शातिर उद्यमी नियामकीय खामियों का

फायदा उठाकर पूरा बिजनेस मॉडल तैयार कर सकते हैं। सबसे पहले वे ऐसे मुनाफे वाले क्षेत्रों की पहचान करते हैं जिनके नियमन के बारे में कोई सोच नहीं पाया है और फिर अपनी कंपनी को उस क्षेत्र में इतना मजबूत कर देते हैं कि नियामकों के लिए उनके अस्तित्व को नकारने में काफी हिचक होने लगती है।

इन दिनों किफायती और सुलभ जेनरेटिव आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से विस्तार के चलते नियामकों के सामने एक अभूतपूर्व चुनौती की स्थिति बन गई है क्योंकि एक विशाल डेटा भंडार से प्रशिक्षित एल्गोरिदम मांग के आधार पर टेक्स्ट, स्पीच और तस्वीरें तैयार की जा सकती हैं।

आमतौर पर, हम कम से कम यह समझते हैं कि कैसे तकनीक काम करती है और कैसे इनका नियमन किया जा सकता है लेकिन ज्यादातर जेनरेटिव एआई मॉडल के बारे में कोई नहीं जानता कि वे एक तरह से जवाब क्यों देते हैं और उनके जवाब देने का कोई दूसरा तरीका क्यों नहीं होता है।

अब एआई का सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक प्रभाव ऐसा है कि ट्रांजिस्टर के आविष्कार के बाद हुए यह किसी भी तकनीकी विकास को आसानी से पीछे छोड़ सकता है। संभव है कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया में महसूस किया जाने लगे और ऐसा अगर कुछ महीने में नहीं हुआ तब भी कुछ वर्षों में जरूर दिखने लगेगा।

इसका असर पहले से ही राजनीतिक अभियानों में दिख रहा है और एआई से बनाई गई फर्जी खबरों से निपटने के लिए तरीके में बदलाव कर रहे हैं। हालात कुछ ऐसे भी बनते हुए दिख रहे हैं कि अब असल तस्वीरों पर भरोसा कम होने लगा है। हाल में एक इजरायली फोटोग्राफर ने देखा कि उसकी शूट की गई एक तस्वीर वायरल हुई और उसे एआई से बनी तस्वीर बताया जाने लगा।

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इससे जुड़ी एक बड़ी समस्या यह है कि सिलिकॉन वैली का नियामकों के साथ सहयोग का रवैया बहुत गंभीर नहीं है। वहां के लोग, उन लोगों की खुले तौर पर उपेक्षा करते हैं जिन्हें तकनीकी या जटिल विषयों की बुनियादी बातें समझने में मदद लेने की आवश्यकता पड़ती है। आमतौर पर उनका यह भी मानना है कि तकनीकी विकास का नियमन करना व्यर्थ है। हालांकि उनका ध्यान इस बात पर गया नहीं है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना तकनीकी नियमन में इतना सफल कैसे हो रहा है।

दूसरी ओर, कई नीति निर्माता नवाचार वाले दूसरे क्षेत्रों के मुकाबले एआई के विकास में अव्वल होने की बात को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए भी महत्त्वपूर्ण मानते हैं और वे ऐसे किसी भी कदम का विरोध करते हैं जो इस क्षेत्र में उनकी राष्ट्रीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धी क्षमता कम करे। यह दृष्टिकोण दो नियामकीय उपायों की ओर अग्रसर होता दिखेगा जो बेहतर परिणाम नहीं दे सकते हैं।

संभव है कि एआई के व्यापक नियमन की शुरुआत वैसे लोग करने लगें जो एआई से बहुत जुड़े नहीं है या इसके विकास में जिनकी सीमित हिस्सेदारी है। ऐसे हालात बन सकते हैं कि इससे संबंधित न्यायिक आदेश भी दिए जाने लगे जिनके चलते बिल्कुल अलग तकनीकों के लिए बनाए गए नियमों में एआई को जबरदस्ती फिट करने का प्रयास होने लगेगा।

पिछले कुछ हफ्ते में ये दोनों रुझान अधिक दिखाई देने लगे हैं। ब्रसेल्स में एआई को विनियमित करने के व्यापक मुद्दे पर 37 घंटे की गहन चर्चा हुई जिसके बाद यूरोपीय संघ के अनुकूल इससे जुड़े कानून को लेकर सहमति बनी। इस समझौते का विवरण स्वाभाविक रूप से महत्त्वपूर्ण है लेकिन यह कहा जा सकता है कि कुल मिलाकर एआई को लेकर रवैया, उम्मीद से कहीं ज्यादा प्रतिबंधों के पक्ष में था।

इस कानून के सबसे कठोर आलोचकों में से एक फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन थे, जिन्होंने बेहद गंभीरता से यह बात रखी कि एआई के विकास में यूरोपीय संघ पीछे है और इस प्रकार यूरोपीय आयोग का पूर्वग्रह इस तकनीक के उपभोक्ताओं की रक्षा करने और उसके उत्पादन को बढ़ावा न देने पर है। ऐसे में यूरोपीय संघ इस तकनीक में पिछड़ता है तो यह एक स्थायी नुकसान में बदल सकता है।

दुनिया के बाकी हिस्सों के लिए निराशाजनक स्थिति यह है कि यूरोपीय संघ के डेटा गोपनीयता कानून के साथ ब्रसेल्स में एआई को विनियमित करने का दृष्टिकोण वास्तव में एक वैश्विक नियमन भी बन सकता है, जो पूरे विश्व में एआई के उपयोगकर्ता के अनुभव और पहुंच को सीमित कर सकता है और ऐसा केवल यूरोप तक ही नहीं होगा।

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इस बीच, न्यूयॉर्क टाइम्स ने ओपनएआई (चैटजीपीटी के निर्माता) और माइक्रोसॉफ्ट (ओपनएआई में एक प्रमुख निवेशक) पर अपने बड़े भाषा मॉडल एआई के विकास में अखबार के कॉपीराइट का उल्लंघन करने के लिए मुकदमा दायर किया है। अखबार का तर्क है कि न्यूयॉर्क टाइम्स के लाभकारी अखबार पर प्रशिक्षित एआई मॉडल उसके लेखों की नकल करने के साथ ही इसे दोहराते हुए बदल भी सकते हैं जिससे उसके व्यापार मॉडल को बड़ा नुकसान होगा। अमेरिका में प्रिंट के दौर के लिए बनाए गए कॉपीराइट कानून के तहत यह ‘उचित उपयोग’ के लिए स्वीकार्य नहीं माना जा सकता है।

ऐसे में संभव है कि ओपनएआई, उच्च-गुणवत्ता वाले लाभकारी स्रोतों के इस्तेमाल का दायरा कम करे। कंपनी ने पहले से ही जर्मनी में ऐक्सल स्प्रिंगर सहित अन्य प्रकाशकों के साथ समझौते करने की तरफ कदम बढ़ाना शुरू कर दिया है। हालांकि न्यूयॉर्क टाइम्स के साथ इस तरह का समझौता नहीं हो पाया जिसका ओपनएआई को पछतावा हो सकता है।

व्यापक तस्वीर कुछ ऐसी बनती यह दिख रही है कि एआई के इस्तेमाल और प्रशिक्षण की सीमाएं तय करने का काम अब न्यायाधीशों के हवाले छोड़ दिया जाएगा, जबकि ये नियम एक व्यापक और सक्रिय नियामकीय प्रक्रिया के माध्यम से बनने चाहिए थे। यह साल निश्चित रूप से इस असाधारण और प्रभावशाली क्षेत्र को हमारे जीवन का एक हिस्सा बनाएगा लेकिन अमेरिका जैसे देशों में जहां वास्तव में एआई को लेकर नवाचार हो रहे हैं, वहां शायद ही कोई विशेषज्ञ नियामकों के दृष्टिकोण को अपनाया जाएगा। निश्चित रूप से यह नियामकीय दृष्टिकोण के लिहाज से बेहद बुरा है।

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First Published - January 4, 2024 | 9:37 PM IST

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