शेयर बाजार में तेजी के दौर का फायदा बाजार में सभी को मिल रहा है। न केवल निफ्टी और सेंसेक्स ने रिकॉर्ड स्तर को छुआ है बल्कि प्राथमिक बाजार भी गुलजार है। वर्ष 2021 में 58 कंपनियां ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी यानी आईपीओ लाने की तैयारी से जुड़ा दस्तावेज) दाखिल कर चुकी हैं जबकि 2019 और 2020 में मिलाकर भी इतने आईपीओ (प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश) नहीं आए थे। यदि यही रुझान रहा तो 2021 में आईपीओ आसानी से 100 का आंकड़ा पार कर सकते हैं। विभिन्न क्षेत्रों में बेहतर मूल्यांकन के कारण कई तरह के कारोबार आईपीओ लाने की प्रक्रिया में हैं। कई आईपीओ तो प्रीमियम पर सूचीबद्ध हुए और आवंटियों को जल्दी धन कमाने का अवसर भी मिला। इन डीआरएचपी में एफएमसीजी, बीमा, रसायन, बिजली क्षेत्र और परिसंपत्ति प्रबंधन जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा सूचीबद्धता के मानक शिथिल करने से घाटे में चल रही स्टार्टअप के लिए भी सूचीबद्धता आसान हुई है। जोमैटो की सफलता के बाद वन97 (पेटीएम), पीबी फिनटेक (पैसा बाजार), और एफएसएन ई-कॉमर्स (नायिका) सभी सार्वजनिक पेशकश की तैयारी में हैं।
बाजार में तेजी के कई कारक हैं। वैश्विक गतिविधियां भी इसकी एक वजह हैं जिनके कारण औद्योगिक धातुओं और ईंधन के बाजार में तेजी है। भारतीय रिजर्व बैंक समेत प्रत्येक बड़े केंद्रीय बैंक द्वारा समायोजन का रुख भी इसका एक कारण है। नीतिगत दरों के कम होने के कारण मुद्रास्फीति में उछाल के बावजूद सस्ती नकदी उपलब्ध है। नकदी इसलिए भी उपलब्ध है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपनी क्षमता से नीचे काम कर रही है। ऐसे में कारोबारों को कार्यशील पूंजी की जरूरत सीमित है और वे पूंजीगत व्यय बढ़ाना नहीं चाहते। कर्ज जैसे वैकल्पिक क्षेत्रों से प्रतिफल बहुत कम है या कहें तो वास्तविक संदर्भों में वह नकारात्मक है। इन बातों ने मिलकर जोखिम भरी परिसंपत्तियों में रुचि बढ़ाई है। निफ्टी का कारोबार बीती चार तिमाहियों से 26.5 गुना मूल्य-आय (पीई) मूल्यांकन के अनुरूप है। आशावादियों का मानना है कि 2020-21 के कमजोर आधार प्रभाव और बीती तीन तिमाहियों में मुनाफे में उच्च वृद्धि को देखते हुए यह 2021-22 के लिए 21-22 गुना अग्रिम पीई के अनुरूप है। निफ्टी मिडकैप 31 गुना के निचले पीई पर कारोबार कर रहा है और स्मॉलकैप 29 गुना पर।
बाजार के हर क्षेत्र में मानक सूचकांक अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई के आसपास है और 2021 में प्रत्येक ने कम से कम 16 फीसदी का प्रतिफल दिया। मिडकैप और स्मॉलकैप का प्रदर्शन बड़ी कंपनियों के शेयरों से भी तेज रहा। बीएसई ने छोटे शेयरों के लिए मूल्य का दायरा कड़ा किया है, इसलिए हालिया अतीत में प्रदर्शन में विविधता नजर आई है। विगत छह सत्रों में निफ्टी मिडकैप सूचकांक में उच्चतम स्तर से 5.4 फीसदी की कमी आई है जबकि स्मॉल कैप में 9 फीसदी की। हालांकि बीएसई ने जो स्पष्टीकरण दिया है उससे निवेशक इस बारे में आश्वस्त हो सकते हैं और जो शेयर प्रभावित हुए हैं वे भी बाजार पूंजीकरण के एक बहुत छोटे हिस्से का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऐसे माहौल में कारोबारों के लिए नकदी जुटाना तार्किक प्रतीत होता है। निवेशकों के लिए भी उच्च प्रतिफल के लिए जोखिम उठाना तार्किक है। लेकिन अच्छे कारोबारों के लिए उच्च मूल्यांकन के साथ कई बार उन कंपनियों का मूल्यांकन भी बढ़ जाता है जिनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं होती। निवेशकों और कारोबारियों के लिए बेहतर होगा कि वे अपने अतिउत्साह पर नियंत्रण करें और पुरानी कहावत को याद करें, ‘जब लहर उतरती है तभी आपको पता चलता है कि कौन बिना वस्त्रों के तैर रहा था।’ यदि यह रुझान बदलता है तो बाजार में भीषण मंदी का माहौल भी बन सकता है।