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NPS Sanchay: अब रेहड़ी-पटरी वालों और मजदूरों को भी मिलेगी पेंशन, जानें क्या है पूरी प्रक्रिया

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PFRDA ने NPS संचय स्कीम लॉन्च की है जो असंगठित क्षेत्र के मजदूरों व छोटे कामगारों के लिए एक बेहद आसान पेंशन स्कीम है। इसमें बिना किसी बड़े झंझट निवेश किया जा सकता है

Last Updated- May 12, 2026 | 3:45 PM IST
NPS
फोटो क्रेडिट: Shutterstock

NPS Sanchay Scheme: भारत में जब हम पेंशन की बात करते हैं, तो अक्सर लोगों के दिमाग में सरकारी नौकरी या बड़ी कंपनियों वाले बाबू लोग आते हैं। लेकिन उन करोड़ों लोगों का क्या जो रोज कमाते हैं और रोज खाते हैं? जैसे हमारे आस-पास के रेहड़ी-पटरी वाले, खेतों में काम करने वाले किसान, घरों में काम करने वाली दीदियां, ऑटो ड्राइवर या फिर छोटे से गल्ले पर बैठने वाले दुकानदार। इन लोगों के पास रिटायरमेंट के बाद का कोई सहारा नहीं होता। इसी बड़ी समस्या को देखते हुए पेंशन रेगुलेटर PFRDA ने एक नई स्कीम पेश की है, जिसका नाम है ‘NPS संचय’।

आपको बता दें कि भारत में लगभग 90% लोग असंगठित क्षेत्र में काम करते हैं, जिन्हें अक्सर निवेश का हिसाब-किताब सही से समझ नहीं आता। इसी समस्या को खत्म करने के लिए इस आसान स्कीम को लाया गया है। यह स्कीम खास तौर पर उन लोगों के लिए बनी है जो बहुत ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं या जिन्हें शेयर बाजार और निवेश की मुश्किल बातें समझ नहीं आतीं। इसे इतना सरल बनाया गया है कि गांव का एक आम आदमी भी बिना किसी की मदद के अपना बुढ़ापा सुरक्षित कर सके।

क्या है NPS संचय?

NPS संचय असल में पुराने नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) का ही एक नया और बेहद आसान अवतार है। सरकार ने देखा कि आम आदमी पेंशन स्कीम से जुड़ना तो चाहता है, लेकिन वह इसके फॉर्म और निवेश के विकल्पों को देखकर घबरा जाता है। उसे समझ नहीं आता कि पैसा कहां लगाना है, कौन सा फंड मैनेजर चुनना है या रिस्क कितना लेना है।

इसी उलझन को खत्म करने के लिए NPS संचय में ‘डिफॉल्ट डिजाइन’ का इस्तेमाल किया गया है। इसका मतलब यह है कि आपको खुद कुछ भी चुनने की जरूरत नहीं है। स्कीम इस तरह से सेट की गई है कि वह अपने आप आपके पैसे को सही तरीके से मैनेज करेगी। PFRDA का कहना है कि यह उन लोगों के लिए सबसे अच्छा है जिनके पास शहर के बड़े आर्थिक सलाहकारों तक पहुंच नहीं है। यानी अब आपको किसी एक्सपर्ट की मिन्नतें करने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

कौन-कौन जुड़ सकता है इस स्कीम से?

NPS संचय की सबसे अच्छी बात यह है कि इसमें उम्र का दायरा बहुत बड़ा रखा गया है। 18 साल के युवा से लेकर 85 साल तक का कोई भी भारतीय नागरिक इसमें अपना खाता खुलवा सकता है। अक्सर दूसरी स्कीमों में उम्र की सीमा कम होती है, लेकिन यहां बुजुर्गों का भी ख्याल रखा गया है।

खाता खोलने का तरीका भी बहुत सीधा है। आप इसे अपने मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन भी कर सकते हैं, या फिर अपने पास के बैंक या डाकघर (जिसे PoP कहा जाता है) जाकर फॉर्म भर सकते हैं। बस आपको अपना KYC करवाना होगा, जिसके लिए आधार कार्ड और पैन कार्ड जैसे जरूरी कागजों की जरूरत पड़ती है। जैसे ही आपके कागज जमा हो जाएंगे, आपका पेंशन खाता शुरू हो जाएगा।

आपका पैसा कहां लगेगा और कितना सुरक्षित है?

पैसे की सुरक्षा को लेकर हर इंसान के मन में डर रहता है। NPS संचय के मामले में घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि यह पूरी तरह सरकारी देखरेख (PFRDA) में चलता है। इसका निवेश उन्हीं नियमों के तहत होगा जो सरकारी कर्मचारियों या अटल पेंशन योजना (APY) के लिए होते हैं।

Also Read: NPS सब्सक्राइबर्स सावधान! 1 जुलाई से बदल रहे हैं मेंटेनेंस के नियम, समझें आपकी जेब पर क्या होगा असर

अगर कोई सब्सक्राइबर चाहता है कि वह अपना फंड मैनेजर (वह कंपनी जो पैसा संभालती है) बदले या निवेश के तरीके में थोड़ा बदलाव करे, तो वह ऐसा कर सकता है। लेकिन इसके लिए उसे वही नियम मानने होंगे जो आम NPS स्कीम के लिए पहले से बने हुए हैं। यानी आपको आजादी भी मिलेगी और आपकी जमा पूंजी सुरक्षित हाथों में भी रहेगी। भारत के जितने भी नामी पेंशन फंड्स हैं, वे सभी इस NPS संचय प्रोग्राम को चलाने के लिए अधिकृत हैं।

कितना खर्चा आएगा और पैसा कब निकाल पाएंगे?

बहुत से लोगों को लगता है कि नई स्कीम है तो शायद फीस ज्यादा होगी। लेकिन NPS संचय में ऐसा कुछ नहीं है। इसमें लगने वाला चार्ज बिल्कुल वैसा ही है जैसा अन्य पॉपुलर पेंशन स्कीमों (जैसे NPS वात्सल्य या NPS लाइट) में होता है। सरकार ने इसे किफायती रखने की कोशिश की है ताकि एक दिहाड़ी मजदूर की जेब पर बोझ न पड़े।

पैसा निकालने और स्कीम से बाहर निकलने के नियम भी वही पुराने रखे गए हैं जो आम NPS में होते हैं। एक और खास बात यह है कि अगर भविष्य में सरकार पेंशन निकालने या फीस के नियमों में कोई भी बदलाव करती है, तो वे बदलाव अपने आप NPS संचय पर भी लागू हो जाएंगे। आपको बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटने या नए कागजों पर साइन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। यह स्कीम समय के साथ अपने आप अपडेट होती रहेगी।

मजदूरों और छोटे कामगारों के लिए क्यों है यह वरदान?

हमारे देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा ‘अनऑर्गेनाइज्ड सेक्टर’ यानी असंगठित क्षेत्र में आता है। इसमें वे लोग हैं जिन्हें कंपनी की तरफ से कोई PF या पेंशन नहीं मिलती। जब तक हाथ-पैर चल रहे हैं, तब तक कमाई है, लेकिन बुढ़ापे में क्या होगा? इसी सवाल का जवाब है ‘NPS संचय’

  1. सिंपल और सीधा: इस स्कीम में आपको निवेश की मुश्किल बातें समझने की टेंशन नहीं लेनी पड़ती। एक बार पैसा जमा करना शुरू कर दीजिए, बाकी काम स्कीम खुद संभाल लेती है।
  2. सलाहकार की जरूरत नहीं: छोटे शहरों और गांवों में हर किसी को पैसों की सही सलाह देने वाला एक्सपर्ट नहीं मिलता। NPS संचय को इस तरह बनाया गया है कि यह बिना ज्यादा झंझट के आपके पैसे को अपने हिसाब से सही तरीके से निवेश करती रहती है।
  3. कम रकम से शुरुआत: इस स्कीम में इतनी छोटी रकम से भी निवेश शुरू किया जा सकता है कि आम आदमी पर ज्यादा बोझ न पड़े। बाद में भी अपनी सुविधा के हिसाब से थोड़ा-थोड़ा पैसा जमा किया जा सकता है।

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First Published - May 12, 2026 | 3:45 PM IST

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