केंद्र सरकार के लाखों कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए एक राहत भरी खबर आई है। 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) ने मेमोरेंडम या ‘मांग पत्र’ जमा करने की आखिरी तारीख को बढ़ा दिया है। पहले इसके लिए 30 अप्रैल 2026 तक का समय दिया गया था, जिसे अब बढ़ाकर 31 मई 2026 कर दिया गया है।
यह फैसला उन कर्मचारियों और संगठनों के लिए काफी अहम है, जो अपनी मांगों को आयोग के सामने मजबूती से रखना चाहते हैं। वेतन आयोग के पोर्टल पर जारी नोटिस के मुताबिक, मंत्रालयों, विभागों और केंद्र शासित प्रदेश के अधिकृत नोडल अधिकारी अब 31 मई (रविवार) तक अपने सुझाव और मेमोरेंडम ऑनलाइन जमा कर सकते हैं।
तारीख बढ़ाने की सबसे बड़ी वजह तकनीकी दिक्कतें रहीं। कई कर्मचारी संगठनों ने शिकायत की थी कि ऑनलाइन पोर्टल पर जानकारी अपलोड करने में उन्हें परेशानी हो रही है। इसके अलावा, नेशनल काउंसिल-जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM), जो कर्मचारियों के हितों की बात करता है, ने भी समय सीमा बढ़ाने की मांग की थी।
आयोग ने साफ कर दिया है कि सभी सुझाव सिर्फ आधिकारिक लिंक के जरिए तय किए गए स्ट्रक्चर्ड फॉर्मेट में ही लिए जाएंगे। अगर कोई कर्मचारी या संगठन कागज पर लिखकर, PDF बनाकर या ईमेल के जरिए अपनी मांगें भेजता है, तो उन पर विचार नहीं होगा। इस प्रक्रिया में केंद्र सरकार के औद्योगिक और गैर-औद्योगिक कर्मचारी, रक्षा कर्मी, अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारी, सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के स्टाफ के स्टाफ, पेंशनभोगी और अलग-अलग यूनियन हिस्सा ले सकते हैं।
न्यूज वेबसाइट फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, इस समय कर्मचारियों के बीच सबसे ज्यादा चर्चा ‘फिटमेंट फैक्टर’ को लेकर हो रही है। NC-JCM ने आयोग के सामने मांग रखी है कि इस बार फिटमेंट फैक्टर बढ़ाकर 3.83 किया जाए। यह वही फॉर्मूला है जिससे कर्मचारियों की बेसिक सैलरी तय होती है।
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अगर इसे आसान भाषा में समझें तो 7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था, जिसकी वजह से न्यूनतम बेसिक सैलरी 18,000 रुपये तय हुई थी। अब अगर 8वां वेतन आयोग 3.83 के इस प्रस्ताव को मान लेता है, तो न्यूनतम बेसिक सैलरी करीब 69,000 रुपये तक पहुंच सकती है। इसके अलावा कर्मचारियों ने कुछ और बड़ी मांगें भी सामने रखी हैं:
वेतन और भत्तों के अलावा इस बार पेंशन का मुद्दा सबसे ज्यादा चर्चा में है। कर्मचारी संगठनों ने आयोग से साफ तौर पर मांग की है कि नेशनल पेंशन सिस्टम और यूनिफाइड पेंशन स्कीम को खत्म किया जाए और पुरानी पेंशन योजना यानी ओल्ड पेंशन स्कीम को फिर से लागू किया जाए।
पुरानी पेंशन योजना में कर्मचारियों को अपनी जेब से कोई पैसा नहीं देना पड़ता था और पूरी जिम्मेदारी सरकार की होती थी। कर्मचारियों का कहना है कि बुढ़ापे में आर्थिक सुरक्षा के लिहाज से यही सबसे भरोसेमंद सिस्टम है। अब देखना होगा कि सरकार और आयोग इतने बड़े वित्तीय बोझ वाले इस मुद्दे पर क्या फैसला लेते हैं।
फाइनेंशियल एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, नेशनल काउंसिल जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी ने आयोग की अध्यक्ष रंजना प्रकाश देसाई से मुलाकात के दौरान एक और अहम सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि रेलवे, डिफेंस, पोस्टल सर्विस और इनकम टैक्स जैसे विभागों की चुनौतियां एक जैसी नहीं होतीं, इसलिए सबके लिए एक जैसा नियम लागू करने के बजाय इन विभागों के लिए अलग-अलग सुनवाई होने चाहिए।
इसके अलावा कर्मचारियों के प्रतिनिधियों ने आयोग से यह भी अपील की है कि वे सिर्फ एयरकंडीशंड कमरों तक सीमित न रहें, बल्कि फील्ड विजिट भी करें। उनका कहना है कि आयोग के सदस्यों को रेलवे यूनिट्स, डिफेंस फैक्ट्री और दुर्गम इलाकों में जाकर खुद देखना चाहिए कि कर्मचारी किन जोखिमों और मुश्किल हालात में काम करते हैं। इससे बेहतर सैलरी स्ट्रक्चर और अन्य भत्ते तय करने में मदद मिलेगी। 31 मई तक मेमोरेंडम जमा होने के बाद साल 2026 में अलग-अलग दौर की बैठकें और चर्चाएं होंगी, जिसके बाद आयोग अपनी अंतिम सिफारिशें सरकार को सौंपेगा।