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Middle East conflict: रिलायंस को फायदा, तेल और गैस कंपनियों पर दबाव

वेस्ट एशिया तनाव से तेल-गैस कंपनियों पर दबाव, रिफाइनरी कंपनियों को लाभ

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निकिता वशिष्ठ   
Last Updated- March 06, 2026 | 1:56 PM IST

Middle East Conflict:मिडिल ईस्ट में जंग का माहौल लगातार गहराता जा रहा है। कई जगह रिफाइनरी बंद हो रही हैं, उत्पादन रुक रहा है और ऊर्जा की सप्लाई चेन कमजोर पड़ने लगी है। इसका असर अब भारत के तेल और गैस सेक्टर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। ग्लोबल ब्रोकरेज नोमुरा के मुताबिक, अगर हालात ऐसे ही रहे तो आने वाले समय में विमानन, पेट्रोल-डीजल बेचने वाली कंपनियों और गैस सप्लाई करने वाले कारोबार पर दबाव बढ़ सकता है। लेकिन इस संकट में हर किसी को नुकसान नहीं हो रहा। कुछ कंपनियों के लिए यह मौका भी बन सकता है।

रिफाइनरी कंपनियों की चमक बढ़ सकती है

जंग के कारण पेट्रोलियम उत्पादों के दाम तेजी से बढ़ रहे हैं। खासकर एटीएफ यानी विमान ईंधन और डीजल के मार्जिन रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गए हैं। एटीएफ का मार्जिन करीब 144 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जबकि डीजल का मार्जिन लगभग 57 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। इसका असर यह हुआ कि सिंगापुर का रिफाइनिंग मार्जिन अचानक उछलकर करीब 30 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया है। सिर्फ एक हफ्ते पहले यह करीब 3.4 डॉलर प्रति बैरल था। यानी रिफाइनरी कंपनियों के लिए यह बड़ा फायदा साबित हो सकता है। नोमुरा का कहना है कि आने वाली तिमाही में इन कंपनियों को अचानक बड़ा मुनाफा हो सकता है। इसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज को सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है।

Middle East Conflict: पेट्रोल-डीजल बेचने वाली कंपनियों पर दबाव

लेकिन कहानी का दूसरा पहलू भी है। सरकारी तेल कंपनियां जैसे इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल इस तेजी का पूरा फायदा नहीं उठा पा रही हैं। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, लेकिन पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतें उतनी तेजी से नहीं बढ़ रहीं। इससे इन कंपनियों का मार्जिन दबाव में आ गया है। नोमुरा के मुताबिक इस समय ईंधन मार्केटिंग का औसत मार्जिन करीब 19.8 रुपये प्रति लीटर के घाटे में पहुंच गया है। यानी पेट्रोल-डीजल बेचने में कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ रहा है।

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Middle East Conflict: गैस कंपनियों के सामने नई परेशानी

जंग का असर गैस बाजार पर भी पड़ रहा है। कतर ने अपने बड़े एलएनजी टर्मिनल रास लाफान से गैस निर्यात रोक दिया है। यह दुनिया के सबसे बड़े गैस निर्यात केंद्रों में से एक है। भारत इस टर्मिनल से लंबे समय से गैस खरीदता है। इसलिए सप्लाई रुकने से भारत के एलएनजी आयात पर असर पड़ सकता है। नोमुरा का अनुमान है कि अगर कतर और यूएई दोनों जगह सप्लाई में समस्या रही, तो भारत के करीब 48 प्रतिशत एलएनजी आयात प्रभावित हो सकते हैं। इसका असर गैस कंपनियों और उद्योगों पर पड़ सकता है। महंगी गैस की वजह से कई फैक्ट्रियां और उर्वरक कंपनियां खपत कम कर सकती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक पेट्रोनेट एलएनजी और गुजरात गैस जैसी कंपनियों पर इसका असर ज्यादा पड़ सकता है।

रूस से मिल सकती है थोड़ी राहत

हालांकि इस मुश्किल समय में भारत को एक छोटी राहत भी मिल सकती है। रूस ने संकेत दिया है कि वह भारत के पास मौजूद करीब 95 लाख बैरल कच्चे तेल की सप्लाई भारत की ओर मोड़ सकता है। अगर ऐसा होता है, तो कम से कम कुछ समय के लिए भारत को तेल सप्लाई की चिंता से राहत मिल सकती है।

First Published : March 6, 2026 | 1:41 PM IST