भारत में डिजिटल भुगतान में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ रही है। अब 38 फीसदी महिलाएं सप्ताह में कम से कम एक बार यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल कर रही हैं। वे इसका उपयोग मुख्य रूप से रोजमर्रा के खर्च जैसे किराना, बिजली-पानी के बिल और मोबाइल रिचार्ज के लिए करती हैं। इससे साफ है कि दैनिक लेन-देन में डिजिटल पेमेंट तेजी से जगह बना रहा है। यह जानकारी ‘PayNearby Women Financial Index (PWFI) 2026’ की रिपोर्ट में सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में महिलाएं तेजी से वित्तीय सेवाओं से जुड़ रही हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बढ़ा रही हैं। गौरतलब है कि PayNearby भारत का एक ब्रांचलेस बैंकिंग और डिजिटल फाइनैंशियल सर्विस नेटवर्क है।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल और वित्तीय सेवाएं देने वाली 10,000 महिला एजेंटों के बीच किए गए सर्वे में पता चला कि 85 फीसदी महिलाएं खुद को परिवार की मुख्य बचतकर्ता मानती हैं। इससे यह साफ होता है कि महिलाओं में वित्तीय अनुशासन बढ़ रहा है और परिवार की आर्थिक योजना में उनकी भूमिका मजबूत हो रही है।
साथ ही, 71 फीसदी महिलाएं अब अपने बैंक खाते खुद ऑपरेट करती हैं। यह रुझान खासकर 18–30 और 31–40 वर्ष की महिलाओं में ज्यादा देखा गया है। इससे संकेत मिलता है कि महिलाएं अब अपने वित्तीय जरूरतों को संभालने में पहले से ज्यादा आत्मविश्वास दिखा रही हैं और इसके लिए परिवार के अन्य सदस्यों पर कम निर्भर हैं।
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रिपोर्ट के अनुसार 78 फीसदी महिलाएं लेन-देन के लिए महिला एजेंटों को प्राथमिकता देती हैं। इसके पीछे भरोसा, सहजता और बातचीत में आसानी जैसे कारण बताए गए हैं। ये असिस्टेड सर्विस मॉडल महिलाओं को वित्तीय सेवाएं अपनाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनके जरिए महिलाएं बेसिक बैंकिंग से लेकर लंबी अवधि की बचत और सुरक्षा योजनाओं तक आसानी से जुड़ पा रही हैं।
सर्वे में सामने आया है कि महिलाओं में निवेश और एसेट से जुड़े उत्पादों को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। लगभग 44 फीसदी महिलाओं ने छोटे-छोटे SIP के जरिए गोल्ड आधारित सेविंग प्रोडक्ट्स में निवेश करने की इच्छा जताई। खासकर जब उन्हें स्थानीय सेवा प्रदाताओं से मार्गदर्शन मिलता है। इससे पता चलता है कि सुरक्षित बचत के साधन के रूप में सोने पर भरोसा अभी भी मजबूत बना हुआ है।
इसके साथ ही फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और रिकरिंग डिपॉजिट (RD) जैसे लचीले जमा उत्पाद भी काफी लोकप्रिय हैं। 98 फीसदी महिलाओं ने इनमें बचत करने की इच्छा जताई। हालांकि म्युचुअल फंड के बारे में जागरूकता अभी भी कम है और 10 फीसदी से भी कम महिलाएं इस कैटेगरी से परिचित हैं।
घर के खर्च को संभालने के लिए महिलाओं के लिए कैश निकासी अभी भी सबसे जरूरी वित्तीय सेवाओं में से एक है। करीब 54 फीसदी महिलाएं पैसे निकालने के लिए बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन, जैसे फेस ऑथेंटिकेशन, को प्राथमिकता देती हैं। आमतौर पर महिलाएं 1,000 से 2,500 रुपये के बीच की राशि निकालती हैं। हालांकि तुरंत पैसे की जरूरत के लिए नकद जरूरी बना हुआ है, लेकिन सुविधा और तेजी की वजह से डिजिटल पेमेंट भी धीरे-धीरे रोजमर्रा के लेन-देन का हिस्सा बनते जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार कई महिलाएं आपातकालीन स्थिति के लिए अलग से फंड रखती हैं। वे अनपेक्षित खर्चों से निपटने के लिए थोड़ी-थोड़ी लेकिन नियमित बचत करती हैं। हालांकि फिलहाल सिर्फ 32 फीसदी महिलाएं ही औपचारिक बैंकिंग संस्थानों के जरिए बचत करती हैं।
बचत के प्रमुख लक्ष्यों में बच्चों की शिक्षा सबसे पहले है। इसके बाद मेडिकल इमरजेंसी और घरेलू जरूरत के सामान की खरीद आते हैं। इससे पता चलता है कि महिलाएं परिवार की दीर्घकालिक स्थिरता और वित्तीय सुरक्षा पर खास ध्यान देती हैं।
महिलाओं के बीच बीमा अपनाने की दर 26 फीसदी तक पहुंच गई है। इनमें स्वास्थ्य, जीवन और दुर्घटना बीमा सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले विकल्प हैं। लगभग 32 फीसदी महिला एजेंट अपने समुदाय में बीमा पॉलिसी कराने में एक्टिव भूमिका निभा रही हैं, जिससे लोगों में जागरूकता और पहुंच दोनों बढ़ रही है।
कर्ज लेने के मामले में भी महिलाएं अब ज्यादा सहज हो रही हैं। करीब 73 फीसदी महिलाओं ने औपचारिक कर्ज लेने की इच्छा जताई। वे मुख्य रूप से मेडिकल खर्च, बच्चों की पढ़ाई, खेती से जुड़े खर्च, घर की मरम्मत और छोटे कारोबार के लिए कर्ज लेना चाहती हैं। इसके अलावा गोल्ड लोन भी कम समय के लिए पैसे की जरूरत पूरी करने का एक उपयोगी विकल्प बनता जा रहा है, क्योंकि इससे घर की संपत्ति बेचे बिना पैसे मिल जाते हैं।
वित्तीय सेवाओं के अलावा अब कम्युनिटी सर्विस सेंटरों पर स्वास्थ्य से जुड़ी सेवाओं का महत्व भी बढ़ रहा है। करीब 37 फीसदी महिलाएं स्वास्थ्य और स्वच्छता से जुड़ी सेवाओं का लाभ ले रही हैं। इनमें टेलीहेल्थ कंसल्टेशन, सैनिटरी पैड और वेलनेस प्रोडक्ट्स शामिल हैं। इन सेवाओं के बढ़ते उपयोग से पता चलता है कि मासिक धर्म स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और महिलाओं को बुनियादी स्वास्थ्य सेवाओं तक पहले से बेहतर पहुंच मिल रही है।
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PayNearby के सीईओ और एमडी आनंद कुमार बजाज ने कहा कि यह रिपोर्ट दिखाती है कि अब महिलाएं सिर्फ वित्तीय सेवाओं की पहुंच तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे व्यवस्थित रूप से वित्तीय गतिविधियों में भागीदारी भी कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि अब ज्यादा महिलाएं अपने बैंक खाते खुद संभाल रही हैं, नियमित मासिक बचत की आदतें बना रही हैं और गोल्ड आधारित बचत, बीमा और औपचारिक कर्ज जैसे वित्तीय उत्पादों के साथ पहले से ज्यादा सहज हो रही हैं।
PayNearby की CMO और डिजिटल नारी की प्रोग्राम डायरेक्टर जयत्री दासगुप्ता ने कहा कि महिला एजेंट अंतिम छोर तक वित्तीय सेवाएं पहुंचाने में अहम भूमिका निभा रही हैं, क्योंकि कई महिलाएं भरोसेमंद महिला सेवा प्रदाताओं के साथ लेन-देन करना पसंद करती हैं। उन्होंने बताया कि अब जुड़ाव केवल साधारण लेन-देन तक सीमित नहीं है, बल्कि वित्तीय सलाह और लंबी अवधि की वित्तीय योजना की ओर भी बढ़ रहा है।
कुल मिलाकर PWFI 2026 की रिपोर्ट बताती है कि देश में महिलाएं धीरे-धीरे अपनी वित्तीय क्षमता और भागीदारी को मजबूत कर रही हैं। सेविंग, बीमा, डिजिटल पेमेंट और औपचारिक कर्ज में उनकी भागीदारी बढ़ रही है, जिसे समुदाय आधारित भरोसेमंद सेवा नेटवर्क का समर्थन मिल रहा है।