प्रमुख सूचकांक – सेंसेक्स और निफ्टी-50 भी वित्त वर्ष 2022 में लगातार दूसरे वित्त वर्ष दो अंक का प्रतिफल दर्ज करने को तैयार हैं और इनमें करीब 19 प्रतिशत की तेजी आई है। वहीं स्मॉल-कैप सूचकांक का तुलनात्मक तौर पर प्रदर्शन इस साल अब तक शानदार रहा है।
बीएसई पर स्मॉलकैप सूचकांक वित्त वर्ष 2022 में अब तक 36 प्रतिशत चढ़ा है और बीएसई मिडकैप तथा बीएसई-500 सूचकांकों में तेजी के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन है। बीएसई मिडकैप और बीएसई-500 सूचकांकों में इस अवधि के दौरान 19 प्रतिशत और 21 प्रतिशत की तेजी आई है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) द्वारा रिकॉर्ड बिकवाली के बावजूद यह मजबूत तेजी स्थानीय इक्विटी में घरेलू निवेशकों से मजबूत प्रवाह और आय में सुधार की मदद से आई है। घरेलू म्युचुअल फंडों (डीएमएफ) ने वित्त वर्ष 2022 में 1.74 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड शुद्घ पूंजी प्रवाह दर्ज किया।
नैशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरीज लिमिटेड (एनएसडीएल) के आंकड़ों से पता चलता है कि हालांकि, एफपीआई ने 1.42 लाख करोड़ रुपये की शुद्घ निकासी दर्ज की। वित्त वर्ष 2021 में एफपीआई ने भारतीय इक्विटी में 2.74 लाख करोड़ रुपये का शुद्घ निवेश किया था, जबकि डीएमएफ ने 1.20 लाख करोड़ रुपये का बिकवाली की थी।
एचएसबीसी में एशिया प्रशांत मामलों के लिए इक्विटी रणनीति प्रमुख हेराल्ड वैन डर लिंडे ने अपनी ताजा रिपोर्ट में लिखा है, ‘एफआईआई ने 80 प्रतिशत बिकवाली वित्त और सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) क्षेत्रों से की है। एफआईआई प्रवाह (मिडकैप के प्रतिशत के तौर पर) अब एक दशक निचले स्तरों पर है।
हालांकि लंबे समय तक टकराव बने रहने से बिकवाली तेज हो सकती है और हमारा मानना है कि ऐसे परिवेश में करीब 7-8 अरब डॉलर की निकासी हो सकती है, जो वैश्विक वित्तीय संकट (जीएफसी) के दौरान दर्ज किए गए स्तरों के समान है।’
आगामी राह
कई विश्लेषकों को वित्त वर्ष 2023 में कई समस्याओं के बीच बाजार अस्थिर रहने का अनुमान है। उनका मानना है कि रूस और यूक्रेन के बीच मौजूदा भूराजनीतिक संकट से जिंस कीमतें ऊंची बनी रहेंगी, खासकर तेल में तेजी बनी रहेगी, जिससे शेयर बाजार में तेजी पर विराम लग जाएगा।
जूलियस बेयर में एशियाई मामलों के शोध प्रमुख मार्क मैथ्यूज ने कहा, ‘पिछले 12 महीनों के दौरान तेल कीमतों में तेजी भारत के लिए एक प्रमुख समस्या है। हम मार्जिन दबाव के साथ कैलेंडर वर्ष 2022 के लिए 15 प्रतिशत ईपीएस की संभावना देख रहे हैं। हमने भारत पर सकारात्मक रुख दोहराया है और सेंसेक्स के लिए 66,000 का लक्ष्य बरकरार रखा है।’
इक्विनोमिक्स रिसर्च के संस्थापक एवं मुख्य निवेश अधिकारी जी चोकालिंगम का मानना है कि बाजारों में अप्रैल 2022 से सुधार आना शुरू हो जाएगा। जब भूराजनीतिक समस्याएं काफी हद तक थम जाएंगी, एफआईआई फिर से वित्त वर्ष 2023 में भारतीय बाजार में दांव लगाना पसंद करेंगे।
उन्होंने कहा, ‘स्मॉल और मिडकैप (एसएमसी) शेयरों का प्रदर्शन वित्त वर्ष 2023 में भी अच्छा रह सकता है, क्योंकि छोटे निवेशकों का जोर इक्विटी पर बना रहेगा। बड़ी तादाद में एसएमसी शेयर मूल्यांकन के संदर्भ में आकर्षक बने हुए हैं। हालांकि हमने आसान तरलता के लिहाज से लार्ज-कैप के लिए करीब न्यूनतम 30 प्रतिशत इक्विटी आवंटन का सुझाव दिया है।’