Budget 2026: अगर आप ऐसी कंपनियों के शेयर रखते हैं जो अक्सर बायबैक का ऐलान करती हैं, तो यूनियन बजट 2026–27 आपके लिए एक अहम और ज्यादातर सकारात्मक बदलाव लेकर आया है। 1 फरवरी को पेश बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बायबैक पर टैक्स नियमों में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया है। इसका मकसद भ्रम खत्म करना और टैक्स से जुड़े लूपहोल्स को बंद करना है। वित्त मंत्री ने कहा कि अब शेयर बायबैक से मिलने वाली रकम को डिविडेंड नहीं, बल्कि कैपिटल गेन माना जाएगा। यानी बायबैक से मिला पैसा अब कैपिटल गेन टैक्स के तहत टैक्सेबल होगा।
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अब तक बायबैक पर टैक्स का तरीका अलग-अलग स्ट्रक्चर पर निर्भर करता था। इससे निवेशकों को उलझन होती थी और कंपनियों के लिए योजना बनाना मुश्किल होता था। नए प्रस्ताव के तहत यह साफ हो गया है कि बायबैक की रकम पर कैपिटल गेन टैक्स लगेगा, न कि डिविडेंड टैक्स।
रिटेल निवेशकों के लिए यह राहत की बात है। कैपिटल गेन के नियम पहले से जाने-पहचाने हैं और समझना आसान है। इससे निवेशकों को पहले से पता रहेगा कि बायबैक से मिलने वाली रकम पर कितना टैक्स लगेगा। बायबैक, डिविडेंड और बाजार में शेयर बेचने तीनों की तुलना करना अब आसान होगा।
हालांकि, प्रमोटर्स के लिए टैक्स में फर्क रखा गया है। घरेलू कंपनियों वाले प्रमोटर्स पर बायबैक से हुए लाभ पर 22 प्रतिशत टैक्स लगेगा। जबकि गैर-घरेलू कंपनियों वाले प्रमोटर्स पर 30% टैक्स लगेगा। इसका मकसद टैक्स से बचने की कोशिशों को रोकना और सिस्टम को पारदर्शी बनाना है।
कानूनी एक्सपर्ट्स एक्विला के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर (टैक्स) राजर्षि दासगुप्ता के मुताबिक, माइनॉरिटी शेयरहोल्डर्स को इससे बड़ा फायदा होगा। अब अगर लंबे समय के लिए रखे गए शेयर बायबैक में दिए जाते हैं, तो उन पर 12.5% लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगेगा, न कि इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बदलाव से बायबैक पर टैक्स को लेकर स्पष्टता और पारदर्शिता आएगी। इससे कंपनियों और निवेशकों दोनों के लिए योजना बनाना आसान होगा और निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा।
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी बात यह है कि अब शेयर बायबैक टैक्स का ग्रे एरिया नहीं रहा। बायबैक को फिर से एक कैपिटल ट्रांजैक्शन माना गया है, न कि मुनाफे का बंटवारा। इससे छोटे निवेशकों को टैक्स के बाद ज्यादा रिटर्न मिल सकता है और भारत का पूंजी बाजार और मजबूत व निवेशक-हितैषी बनता दिखता है।