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सावधान! Silver ETFs में 12% तक कम हो सकता है रिटर्न, निवेश से पहले जानें ये सच

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त्योहारों के मौसम में चांदी की कीमतों में उछाल के बीच Silver ETFs दिख रहे हैं आकर्षक, लेकिन 5–12% प्रीमियम निवेशकों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।

Last Updated- October 13, 2025 | 12:45 PM IST
Silver ETFs

Silver ETFs: त्योहारों का मौसम शुरू होते ही चांदी एक बार फिर से सुर्खियों में है। इस बार कीमतों में जबरदस्त उछाल देखने को मिला है और निवेशक बड़ी संख्या में Silver Exchange Traded Funds (ETFs) और Fund of Funds (FoFs) खरीद रहे हैं। लेकिन जानकारों की मानें तो इस चमक के पीछे एक सच्चाई छिपी है। भारत में चांदी इस समय वैश्विक बाजारों से 5 से 12 फीसदी महंगी बिक रही है। यानी निवेशक अंतरराष्ट्रीय दरों की तुलना में कहीं ज्यादा कीमत चुका रहे हैं।

चांदी की मांग क्यों बढ़ी, सप्लाई क्यों पीछे रह गई?

Axis Mutual Fund की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया भर में चांदी की मांग तेजी से बढ़ी है, लेकिन उसकी सप्लाई उतनी तेज नहीं बढ़ पाई। वैश्विक खदानों से निकलने वाली चांदी की मात्रा बहुत मामूली रूप से बढ़ी है और 2026 तक इसके अपने हाई पर पहुंचने की उम्मीद है। इसके विपरीत, चांदी की खपत नई ऊंचाइयों को छू रही है।

इसकी सबसे बड़ी वजह है बढ़ता ग्रीन इकोनॉमी और हाई-टेक सेक्टर। जैसे कि सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक वाहनों (EVs), इलेक्ट्रॉनिक्स, 5G नेटवर्क और सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री में चांदी की बढ़ती मांग। अब चांदी सिर्फ गहने बनाने की धातु नहीं रह गई है, बल्कि आज की नई तकनीकों का एक ज़रूरी हिस्सा बन गई है।

रोचक बात यह है कि अब कुछ देशों के केंद्रीय बैंक भी चांदी खरीदने लगे हैं, जबकि ऐसा पहले बहुत कम देखा गया था। सऊदी अरब के केंद्रीय बैंक ने हाल ही में चांदी में निवेश किया है। जो आमतौर पर सोने पर केंद्रित केंद्रीय बैंकों के लिए एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। इससे दुनिया भर में चांदी की मांग और बढ़ गई है और उपलब्ध मात्रा कम पड़ने लगी है।

यह भी पढ़ें: क्या सोना-चांदी में अब मुनाफा बुक करने का सही समय है? एक्सपर्ट ने बताई मालामाल करने वाली स्ट्रैटेजी

Silver ETFs में निवेश का रुझान क्यों बढ़ा?

दुनिया भर में निवेशक चांदी में पैसा लगा रहे हैं। 2025 की पहली छमाही में ही Silver ETFs में करीब 9.5 करोड़ औंस (95 million ounces) चांदी निवेश की गई। जो पिछले पूरे साल की तुलना में भी ज्यादा है। इस तरह दुनिया भर में कुल Silver ETF होल्डिंग अब 1.13 अरब औंस, यानी लगभग 40 अरब डॉलर से अधिक की वैल्यू तक पहुंच चुकी है।

भारत में भी यही रुझान देखने को मिला है। धनतेरस और दिवाली जैसे त्योहारों से पहले खरीदारों ने सिक्के, बार, मूर्तियां और गहने खरीदने के लिए दुकानों का रुख किया। सितंबर में भारत की चांदी के आयात (imports) में पिछले साल के मुकाबले लगभग दोगुनी वृद्धि हुई। बुलियन डीलर और ज्वैलर्स ने त्योहारों से पहले स्टॉक बढ़ाने के लिए तेजी से खरीदारी की, जिससे घरेलू बाजार में फिजिकल चांदी की कमी हो गई। इसका सीधा असर यह हुआ कि भारत में चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क से ऊपर चली गईं।

यह भी पढ़ें: इस साल सोना 65 बार पहुंचा नई ऊंचाई पर, निफ्टी रह गया पीछे; फिर भी निवेशकों के लिए है बड़ा मौका

Silver ETFs में बढ़ता प्रीमियम निवेशकों के लिए जोखिम क्यों है?

भारत के Silver ETFs असली (फिजिकल) चांदी में निवेश करते हैं। आम तौर पर इनकी कीमतें वैश्विक बाजारों के अनुसार ही रहती हैं, बस इसमें टैक्स और इंपोर्ट ड्यूटी जोड़ दी जाती है। लेकिन अभी चांदी की कमी के कारण ये ETFs वैश्विक कीमतों से 5 से 12 प्रतिशत महंगे बिक रहे हैं।

इसका मतलब है कि अगर कोई निवेशक आज Silver ETF खरीदता है, तो वह चांदी के असली दाम से ज्यादा भुगतान कर रहा है। भविष्य में अगर सप्लाई सुधर गई, तो यह अतिरिक्त प्रीमियम कम हो सकता है और ETF की कीमत गिर सकती है। भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम जस के तस हों।

Axis Mutual Fund की रिपोर्ट में बताया गया है, “भारत में 5–12% का प्रीमियम मतलब है कि निवेशक अभी चांदी के असली दाम से ज्यादा चुका रहे हैं। जब चांदी की सप्लाई सामान्य हो जाएगी, तो यह प्रीमियम खत्म हो सकता है और ETF की कीमतें गिर सकती हैं, भले ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी के दाम न बदलें।”

लंबी अवधि के लिए क्यों आकर्षक, लेकिन शॉर्ट टर्म में सावधानी क्यों जरूरी?

विशेषज्ञों का मानना है कि लंबी अवधि (long term) में चांदी अब भी एक मजबूत निवेश विकल्प है। यह न सिर्फ टेक्नोलॉजी और क्लीन एनर्जी सेक्टर में बढ़ते उपयोग से फायदा देगी, बल्कि महंगाई (inflation) और बाजार की अस्थिरता (volatility) के दौर में एक भरोसेमंद सुरक्षा कवच (hedge) का काम भी करती है।

हालांकि, जो निवेशक कम अवधि (short term) के लिए निवेश करना चाहते हैं, उन्हें इस समय सावधानी बरतनी चाहिए। वर्तमान में कीमतें पहले से काफी ऊंची हैं, और महंगे स्तर पर एंट्री करने से कम समय में नुकसान होने का खतरा बढ़ सकता है।

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First Published - October 13, 2025 | 12:45 PM IST

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