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SEBI का बड़ा कदम: गिफ्ट सिटी में ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्मों की खुलेगी खिड़की  

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इसके अलावार आय कर अ​धिनियम की कुछ खास धाराओं के तहत टैक्स सेविंग बॉन्ड जारी करने की इजाजत देना भी शामिल है

Last Updated- May 05, 2026 | 10:45 PM IST
SEBI

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने मंगलवार को ऑनलाइन बॉन्ड प्लेटफॉर्म प्रदाताओं (ओबीपीपी) के लिए राहत उपायों का प्रस्ताव रखा। इन उपायों में गिफ्ट सिटी में इंटरनैशनल फाइनैंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी (आईएफएससीए) से नियमन वाली योजनाओं और सेवाओं को अनुमति देने का प्रस्ताव है। इसके अलावार आय कर अ​धिनियम की कुछ खास धाराओं के तहत टैक्स सेविंग बॉन्ड जारी करने की इजाजत देना भी शामिल है।

अभी, ओबीपीपी को ऐसी योजनाएं और सेवाएं देने की अनुमति है जिनका नियमन सेबी, आरबीआई, आईआरडीएआई और पीएफआरडीए जैसे दूसरे नियामक करते हैं। हालांकि, गिफ्ट सिटी में सेवा मुहैया कराने के लिए ऐसे कोई प्रावधान नहीं थे।

इससे पहले, सेबी ने शेयर ब्रोकरों को गिफ्ट सिटी में अलग बिजनेस यूनिट या सब्सिडियरी के तौर पर काम करने की इजाजत दी थी। चूंकि ओबीपीपी का बाजार नियामक सेबी के पास डेट सेगमेंट में शेयर ब्रोकर के तौर पर पंजीकरण होता है। इसलिए उन्होंने भी इसकी इजाजत के लिए अनुरोध किया गया था।

ओबीपीपी को विदेशी मुद्रा प्रबंधन अ​धिनियम (फेमा), 1999 के तहत लागू दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा। इनमें ओवरसीज इन्वेस्टमेंट रूल्स और लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (एलआरएस) के तहत तय सीमाएं शामिल हैं। नियामक ने ओबीपीपी को आयकर अ​धिनियम की धारा 54ईसी के तहत जारी बॉन्ड बेचने की अनुमति का भी प्रस्ताव रखा है।

इनमें कुछ ऐसे टैक्स-बचत बॉन्ड शामिल हैं, जिनको पावर फाइनैंस कॉर्पोरेशन (पीएफसी), भारतीय रेलवे वित्त निगम (आईआरएफसी) और आरईसी जैसी कुछ सरकारी संस्थाओं ने जारी किया है। सेबी ने बताया कि चूंकि इन बॉन्ड को लिस्टिंग से छूट मिली हुई है। इसलिए इस बात को लेकर अस्पष्टता है कि क्या ओबीपीपी इन्हें अपने प्लेटफॉर्म पर पेश कर सकते हैं। 

ओबीपीपी को इन बॉन्ड को पेश करने की अनुमति दी जा सकती है, बशर्ते वे इन्हें पेश करते समय पात्र जारीकर्ताओं, लॉक-इन अवधि, निवेश सीमा, गैर-हस्तांतरणीय स्थिति, टैक्स से जुड़ी खासियतों, शिकायत से जुड़े अस्वीकरण आदि के बारे में पूरी जानकारी दें। 

सेबी ओबीपीपी के अनुपालन अधिकारियों की नियुक्ति के मानदंडों को अन्य शेयर ब्रोकरों के अनुरूप बनाने पर भी विचार कर रहा है। यह कदम इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (आईसीएआई) की सिफारिशों के बाद उठाया जा रहा है। इन सिफारिशों में सीए को कंप्लायंस ऑफीसर के तौर पर नियुक्त करने की बात कही गई है। नियामक ने 26 मई तक इस पर जनता से राय मांगी है।

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First Published - May 5, 2026 | 10:25 PM IST

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