दुनिया में जैसे ही तनाव बढ़ता है, उसका असर सबसे पहले शेयर बाजार पर दिखता है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच भारतीय बाजार में भी लगातार गिरावट देखने को मिल रही है। शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स करीब 1.93 प्रतिशत गिरकर 74,563.92 पर बंद हुआ और इसमें 1470.50 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। ऐसे उतार-चढ़ाव के दौर में निवेशकों के मन में बड़ा सवाल उठता है कि क्या SIP जारी रखनी चाहिए या इसे रोक देना बेहतर है।
निवेश विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार की गिरावट में घबराकर लिए गए फैसले अक्सर सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। मनीफ्रंट के को-फाउंडर और सीईओ मोहित गांग और ऑप्टिमा मनी के फाउंडर पंकज मठपाल के अनुसार बाजार में उतार-चढ़ाव SIP निवेशकों के लिए खतरा नहीं बल्कि मौका हो सकता है।
मोहित गांग के अनुसार जब बाजार में तेज गिरावट आती है तो कई निवेशक घबरा जाते हैं। वे या तो अपने निवेश बेच देते हैं या SIP बंद कर देते हैं। उनका कहना है कि ऐसा करना गलत फैसला है। बाजार में उतार-चढ़ाव के समय SIP जारी रखना चाहिए क्योंकि गिरते बाजार में वही राशि ज्यादा यूनिट खरीदती है। पंकज मठपाल भी यही मानते हैं कि बाजार में गिरावट SIP निवेशकों के लिए एक मौका बन सकती है। गिरते बाजार में वही SIP राशि ज्यादा यूनिट खरीदती है और जब बाजार सुधरता है तो इसका फायदा निवेशकों को मिलता है।
SIP की सबसे बड़ी ताकत रुपया लागत औसत है। मोहित गांग बताते हैं कि जब कोई निवेशक हर महीने एक निश्चित राशि निवेश करता है तो वह बाजार के अलग-अलग स्तरों पर निवेश करता है। जब कीमतें कम होती हैं तो ज्यादा यूनिट मिलती हैं और जब कीमतें ज्यादा होती हैं तो कम यूनिट मिलती हैं। इस तरह समय के साथ निवेश की औसत लागत कम हो जाती है। पंकज मठपाल के अनुसार SIP का असली उद्देश्य यही है कि निवेशक बाजार के समय का अनुमान लगाने की कोशिश न करें और नियमित निवेश करते रहें।
मोहित गांग के अनुसार बाजार गिरावट के समय निवेशकों की कुछ आम गलतियां सामने आती हैं। सबसे बड़ी गलती है घबराकर निवेश बेच देना। जब निवेश की कीमत अचानक गिरती है तो कई निवेशक डरकर नुकसान में ही निवेश बेच देते हैं। दूसरी गलती है SIP बंद कर देना। इससे निवेशक कम कीमत पर निवेश करने का मौका खो देते हैं। तीसरी गलती है एक साथ बड़ी रकम निवेश करना। कई निवेशक गिरते बाजार को देखकर अचानक बड़ी रकम लगा देते हैं। लेकिन बाजार कब तक नीचे रहेगा और कब सुधरेगा, यह तय नहीं होता। मोहित गांग के अनुसार गिरावट के समय अतिरिक्त निवेश करना चाहिए लेकिन वह पोर्टफोलियो के एक सीमित हिस्से तक ही होना चाहिए।
पंकज मठपाल भी कहते हैं कि डर के कारण निवेशक SIP बंद कर देते हैं या इक्विटी से पैसा निकालकर दूसरी एसेट क्लास में चले जाते हैं। यह व्यवहारिक गलती है।
मोहित गांग के अनुसार बाजार में ज्यादा उतार-चढ़ाव के समय पोर्टफोलियो की समीक्षा करना जरूरी है। अगर किसी एक श्रेणी में निवेश बहुत ज्यादा हो गया है तो उसे संतुलित करना चाहिए। उनका मानना है कि ऐसे समय में लार्ज कैप और मिड कैप फंड में अपेक्षाकृत ज्यादा निवेश रखना बेहतर हो सकता है क्योंकि स्मॉल कैप में गिरावट ज्यादा तेज होती है।
साथ ही वे सलाह देते हैं कि पोर्टफोलियो में 10 से 15 प्रतिशत निवेश सोना या चांदी में रखना भी फायदेमंद हो सकता है। यह आर्थिक या बाजार संकट के समय सुरक्षा कवच की तरह काम करता है।
पंकज मठपाल भी कहते हैं कि एसेट एलोकेशन हमेशा महत्वपूर्ण होता है। कई निवेशक उस एसेट क्लास में ज्यादा निवेश कर देते हैं जो हाल में अच्छा प्रदर्शन कर रही होती है और जब बाजार में उतार-चढ़ाव आता है तब उन्हें संतुलन की अहमियत समझ आती है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर निवेशक के पास अतिरिक्त बचत है तो गिरते बाजार में SIP बढ़ाना समझदारी हो सकती है। मोहित गांग के अनुसार अगर निवेशक के पास आपातकालीन फंड सुरक्षित है और निवेश की अवधि तीन साल से ज्यादा है तो बाजार गिरने पर SIP बढ़ाना लंबे समय में फायदा दे सकता है।
पंकज मठपाल के अनुसार निवेशक चाहें तो ऐसे समय में SIP राशि अस्थायी रूप से बढ़ा सकते हैं ताकि गिरते बाजार में ज्यादा यूनिट जमा हो सकें।
कई नए निवेशक सोचते हैं कि पहले बाजार स्थिर हो जाए फिर निवेश शुरू करेंगे। लेकिन पंकज मठपाल कहते हैं कि सही समय का इंतजार करना अक्सर सबसे बड़ी गलती साबित होता है। SIP का मकसद ही यह है कि निवेश अलग-अलग बाजार स्तरों पर होता रहे। इसलिए नए निवेशकों को इंतजार करने के बजाय निवेश शुरू कर देना चाहिए।
मोहित गांग के अनुसार 2008 के वित्तीय संकट और कोविड के दौरान बाजार में भारी गिरावट आई थी लेकिन समय के साथ बाजार ने मजबूत वापसी भी की। इन घटनाओं से निवेशकों के लिए तीन महत्वपूर्ण सबक मिलते हैं। धैर्य रखें, निवेश जारी रखें और समय-समय पर पोर्टफोलियो को संतुलित करते रहें। वे यह भी कहते हैं कि निवेश को सट्टेबाजी की तरह नहीं देखना चाहिए। निवेश उतना ही करना चाहिए जिससे मानसिक शांति बनी रहे।
विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों को बाजार का समय तय करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। SIP जारी रखें, गिरावट के समय घबराएं नहीं और इसे निवेश बढ़ाने के अवसर के रूप में देखें। इसके साथ ही परिवार की वित्तीय सुरक्षा के लिए कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर आपातकालीन फंड रखना भी जरूरी है। बाजार में उतार-चढ़ाव आते रहेंगे लेकिन अनुशासित और लंबे समय का निवेश ही संपत्ति बनाने का मजबूत रास्ता बनता है।