भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने निवेशकों से कहा कि वे पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण पैदा हुई वैश्विक अस्थिरता से न घबराएं। सेबी प्रमुख ने कहा कि इस लड़ाई के कारण प्रमुख समुद्री मार्गों में व्यवधान उत्पन्न हो रहा है और तेल एवं गैस की आपूर्ति के साथ-साथ कीमतों का भी झटका लग रहा है। इस कारण वैश्विक बाजारों में उथल-पुथल हो रही है। पांडेय नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया में निफ्टी 50 इंडेक्स के 30 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित समारोह में बोल रहे थे।
पांडेय ने कहा, ऐसी अनिश्चितताओं के बीच भारत के घरेलू फंडामेंटल मजबूत बने हुए हैं, जो सुदृढ़ता मुहैया करा रहे हैं। इस समय घबराने की जरूरत नहीं है बल्कि इस तूफान के बीच शांत रहना जरूरी है। उन्होंने यह भी बताया कि बेंचमार्क इंडेक्स ने अनिश्चितता और वैश्विक झटकों के कई चरणों का सामना करते हुए दीर्घकालिक वृद्धि पेश की है।
वैश्विक अस्थिरता के कारण इस साल बेंचमार्क सूचकांकों में अब तक करीब 8 फीसदी की गिरावट आई है। पांडेय ने बताया कि निफ्टी 50 सूचकांक ने करीब 11 फीसदी सालाना चक्रवृद्धि के हिसाब से बढ़ोतरी दर्ज की है, जो इसकी शुरुआत से बढ़कर अब तक करीब 25 गुना हो गई है। उन्होंने कहा कि 40 से अधिक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) अब इस सूचकांक को ट्रैक करते हैं, जिससे निवेशकों को शेयर बाजारों में हिस्सा लेने के सरल और किफायती विकल्प मिलते हैं।
पांडेय ने कहा, हमारे बाजारों को आकार देने वाली अगली पीढ़ी की कंपनियां उन उद्योगों की हो सकती हैं, जो आज शुरुआती दौर में हैं। जैसे-जैसे भारत की अर्थव्यवस्था वृद्धि दर्ज करती रहेगी और वैश्विक वित्तीय प्रणालियों के साथ जुड़ती जाएगी, हमारे बाजार भी बड़े और अधिक जटिल होते जाएंगे। इससे नए अवसर तो पैदा होंगे ही, साथ ही नई जिम्मेदारियां भी आएंगी।
स्टॉक एक्सचेंजों के बीच प्रतिस्पर्धी लेकिन सहयोगी दृष्टिकोण पर सेबी प्रमुख ने कहा कि कॉमन कॉन्ट्रैक्ट नोट और इंटरऑपरेबिलिटी जैसी बातें गहरे और ज्यादा परिपक्व बाजार इकोसिस्टम को दर्शाती हैं। उन्होंने कहा, इन 30 वर्षों में निफ्टी कॉरपोरेट इंडिया का दर्पण, निवेशक भावना का बैरोमीटर और हमारे बाजारों की दिशा का मार्गदर्शक बन गया है।
कार्यक्रम से इतर एनएसई के प्रबंध निदेशक और सीईओ आशीषकुमार चौहान ने कहा कि एक्सचेंज अपने बहुप्रतीक्षित आरंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के लिए इसी महीने निवेश बैंकरों की नियुक्ति की योजना बना रहा है।
मेगा आईपीओ के लिए कम सार्वजनिक फ्लोट की अनुमति देने के नियामक के फैसले पर लंबित अधिसूचना की वजह से संभावित देरी पर चिंता दूर करते हुए चौहान ने कहा कि सेबी ने एनएसई को कम फ्लोट के साथ आगे बढ़ने की इजाजत दी है क्योंकि कोई पहचान वाला प्रवर्तक नहीं है।