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बाजार हलचल : एक जैसा मगर अलग, अदाणी ग्रुप को फंड्स का सहारा

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भारत और दक्षिण कोरिया में कई समानताएं हैं, जिनके बारे में शायद ही किसी ने सोचा हो। इस साल दोनों देशों के बाजार में विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की है

Last Updated- June 07, 2026 | 11:29 PM IST
Stock Market

भारत और दक्षिण कोरिया में कई समानताएं हैं, जिनके बारे में शायद ही किसी ने सोचा हो। इस साल दोनों देशों के बाजार में विदेशी निवेशकों ने लगातार बिकवाली की है। उन्होंने दक्षिण कोरियाई इक्विटी से लगभग 70 अरब डॉलर और भारतीय शेयरों से करीब 30 अरब डॉलर निकाले हैं।

दोनों ही बाजारों में देसी संस्थानों और खुदरा निवेशकों ने इस झटके को संभालने के लिए कदम बढ़ाया है। लेकिन समानताएं यहीं खत्म हो जाती हैं। दक्षिण कोरिया का बाजार इस साल लगभग 100 फीसदी चढ़ा है जबकि भारतीय सूचकांक अभी भी करीब 10 फीसदी नीचे है।

एक फंड मैनेजर के शब्दों में, इसका कारण यह है कि कोरिया में बिकवाली मुख्य रूप से जबरदस्त तेजी के बाद मुनाफावसूली के लिए की जा रही है जबकि भारत में यह वृद्धि की चिंताओं और कमाई के अनिश्चित परिदृश्य को दर्शाती है।

अदाणी समूह को फंडों का सहारा

सालों तक अदाणी समूह की सबसे बड़ी शिकायतों में से एक यह थी कि उसे घरेलू एमएफ से कोई खास सहारा नहीं मिल रहा। लेकिन अब ऐसा नहीं है। हाल के हफ्तों में समूह ने एसबीआई एमएफ, बिड़ला एमएफ और कैपिटल समूह से निवेश हासिल किया है। शेयरधारिता आंकड़ों से पता चलता है कि समूह में संस्थागत स्वामित्व लगातार बढ़ रहा है। इस साल अदाणी के शेयर, बाजार में सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वालों में से रहे हैं।

अदाणी एनर्जी सॉल्यूशंस, अदाणी पावर और अदाणी ग्रीन एनर्जी में से हर एक में करीब 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जबकि बाजार में सुस्ती के बावजूद मुख्य कंपनी अदाणी एंटरप्राइजेज में करीब 35 फीसदी की बढ़त हुई है। समूह के कुल एमकैप ने भी हिंडनबर्ग मामले से हुए नुकसान की भरपाई कर ली है।

अलग तरह की एफपीआई निकासी

सिटी और मॉर्गन स्टैनली जैसी विदेशी ब्रोकरेज कंपनियों ने हाल में मुंबई में अपनी इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस समाप्त की है। इसमें पूरे एशिया, खासकर हॉन्गकॉन्ग और सिंगापुर से फंड मैनेजर और विश्लेषक शामिल हुए। लोगों की इतनी बड़ी संख्या जुटी कि एक अनपेक्षित समस्या खड़ी हो गई – घर लौटने के लिए विमानों की कमी।

मुंबई से हॉन्गकॉन्ग के लिए रोज़ाना सिर्फ एक सीधी विमान सेवा होने से कॉन्फ्रेंस में शामिल लोगों के एक साथ लौटने की होड़ में सीटों की कमी हो गई। कुछ लोगों को अपना प्रवास बढ़ाना पड़ा। एक विदेशी बैंक एग्जिक्यूटिव को अपनी वापसी की यात्रा टालनी पड़ी और उसने मजाक में कहा, कॉन्फ़्रेंस असल में एयरपोर्ट और उसके बाद भी छह घंटे तक चलती रही क्योंकि सभी लोग एक ही विमान में सवार थे।

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First Published - June 7, 2026 | 11:29 PM IST

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