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Defence Stocks Budget 2026: डिफेंस सेक्टर पर सरकार का फोकस बना हुआ है। ऐसे में बजट 2026 में डिफेंस सेक्टर के आवंटन में अच्छा-खासा इजाफा होने की उम्मीद है। इससे सेक्टर को तगड़ा बूस्ट मिल सकता है। बेहतर आउटलुक और बजट से बूस्ट मिलने की संभावनाओं को देखते हुए निवेशकों की नजर डिफेंस स्टॉक्स पर है और इस साल की शुरुआत में इनमें खरीदारी की सेंटीमेंट देखा जा रहा है। निफ्टी डिफेंस इंडेक्स की बात करें तो यह करीब 2 फीसदी उछल चुका है। मार्केट एनालिस्ट मानते हैं कि डिफेंस कंपनियों की ऑर्डरबुक मजबूत है और इनफ्लो बना हुआ है।
दिसंबर तिमाही (Q3FY26) में डिफेंस कंपनियों के ऑर्डर मजबूत बने रहे। इस दौरान भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BEL) ने करीब 5,500 करोड़ रुपये के ऑर्डर हासिल किए। भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (BDL) ने 4,600 करोड़ रुपये के ऑर्डर की घोषणा की। KEC इंटरनेशनल को 7,600 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले, जबकि KPIL ने 5,100 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर अपने खाते में जोड़े।
मजबूत ऑर्डर बैकलॉग और पाइपलाइन में लंबित परियोजनाओं के फाइनल होने से तीसरी तिमाही में कवरेज यूनिवर्स के लिए करीब 16 फीसदी सालाना एग्जीक्यूशन ग्रोथ को समर्थन मिलने की उम्मीद है।
मार्केट एनालिस्ट के मुताबिक, बजट 2026-27 में डिफेंस सेक्टर में स्वदेशीकरण और एक्सपोर्ट पर सरकार का फोकस अधिक मजबूत हो सकता है। इंडिजेनाइजेशन को विस्तार, डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर को टैक्स रियायत और इंफ्रास्ट्रक्चर सपोर्ट के साथ खरीद प्रक्रिया को आसान करने जैसे कदम घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दे सकते हैं।
स्टॉक्सकार्ट के सीईओ और डायरेक्टर प्रणय अग्रवाल का कहना है कि बजट से सबसे ज्यादा फायदा एयरोस्पेस और डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स सेगमेंट को मिलने की संभावना है। वहीं, शिपबिल्डिंग सेक्टर के लिए बेहतर आवंटन हो सकता है। सरकार बजट 2026–27 में रक्षा क्षेत्र से जुड़ी मौजूदा पहलों को और मजबूत कर सकती है।
उन्होंने कहा कि पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट के तहत अब तक 5,500 से ज्यादा वस्तुओं की पहचान की जा चुकी है, जिनमें से 3,000 से ज्यादा वस्तुओं का उत्पादन पूरी तरह से भारत में हो रहा है। उनका कहना है कि लाइसेंस प्रक्रिया को आसान करना, एक्सपोर्ट ऑथराइजेशन की वैधता ऑर्डर पूरा होने तक बढ़ाना और निर्यात प्रक्रियाओं को डिजिटल करना अनुपालन लागत घटा सकता है। साथ ही विदेशी बाजारों में एंट्री को आसान बना सकता है।
मास्टर कैपिटल सर्विसेज लिमिटेड के चीफ रिसर्च ऑफिसर डॉ. रवि सिंह का कहना है कि डिफेंस सेक्टर को आगे भी सरकार के मजबूत समर्थन से फायदा मिलने की उम्मीद है। खासकर स्वदेशीकरण पर फोकस के चलते बजट में डिफेंस सेक्टर के लिए कैपेक्स बढ़ाया जा सकता है। साथ ही, घरेलू खरीद को प्राथमिकता और निर्यात को बढ़ावा देने वाली नीतियां लाई जा सकती हैं।
प्रणय अग्रवाल के मुताबिक, निवेशकों के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) एयरोस्पेस सेगमेंट में एक मजबूत बजट-प्रॉक्सी है। कंपनी की बाजार में मजबूत पकड़ है, ऑर्डर बुक सशक्त है और निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं, जो लंबी अवधि की कमाई को सहारा देती हैं।
डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स में भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (BEL) और डेटा पैटर्न्स प्रमुख कंपनियां मानी जा रही हैं। ये रडार, कम्युनिकेशन और इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम्स में मजबूत स्थिति रखती हैं और स्वदेशीकरण से इन्हें फायदा मिल सकता है।
शिपबिल्डिंग सेक्टर में मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स (MAZDOCK) के पास मजबूत डिफेंस ऑर्डर बुक है। पनडुब्बियों और आधुनिक युद्धपोतों जैसे बड़े प्रोजेक्ट्स से कंपनी को लंबे समय तक राजस्व की अच्छी दृश्यता मिलती है। इसके अलावा, गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) भी विविध ऑर्डर बुक और बढ़ते निर्यात के चलते एक भरोसेमंद विकल्प माना जा रहा है।
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डॉ. रवि सिंह का कहना है कि लॉन्ग टर्म निवेशकों को शॉर्ट टर्म बजट रिएक्शन के पीछे भागने के बजाय उन कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए, जिनकी एग्जीक्यूशन कैपेसिटी मजबूत है और जो सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ रोडमैप के अनुरूप काम कर रही हैं। ऐसी कंपनियां लंबे समय में बेहतर रिटर्न दे सकती हैं।