AMC Share Price Today: इक्विटी म्युचुअल फंड्स में मजबूत नेट इनफ्लो के चलते एसेट मैनेजमेंट कंपनियों (AMC) के शेयरों की मांग बढ़ गई। इसी वजह से मंगलवार के इंट्रा-डे ट्रेड में बीएसई पर इन शेयरों में 20 फीसदी तक की तेजी देखने को मिली।
Aditya Birla Sun Life AMC का शेयर 20 फीसदी उछलकर 1,044.35 रुपये के 52 हफ्ते के हाई पर पहुंच गया। Shriram AMC का शेयर 7 फीसदी बढ़कर 299.85 रुपये हो गया। ICICI Pru AMC का शेयर 3,078.70 रुपये और Nippon Life India Asset Management (NAM) का शेयर 885.20 रुपये पर पहुंच गया। इन दोनों शेयरों में करीब 6-6 फीसदी की तेजी रही। इसके अलावा UTI AMC का शेयर 5 फीसदी बढ़कर 996.30 रुपये और HDFC AMC का शेयर 4 फीसदी चढ़कर 2,550 रुपये हो गया।
वहीं, बाजार के प्रमुख सूचकांक बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) में ज्यादा बड़ी तेजी नहीं दिखी। दोपहर 2:29 बजे यह 0.7 फीसदी बढ़कर 78,095 के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश 8 फीसदी बढ़कर 25,978 करोड़ रुपये का निवेश हो गया। इस बढ़ोतरी के पीछे भारत-अमेरिका ट्रेड डील से जुड़ा पॉजिटिव माहौल भी एक वजह माना जा रहा है। इससे म्युचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) जनवरी के 81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर फरवरी में 82 लाख करोड़ रुपये हो गया। आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में इक्विटी फंड्स में 25,978 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया, जो पिछले महीने के 24,028 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
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भारत की सबसे बड़ी मल्टी-फैमिली वेल्थ मैनेजमेंट फर्म, क्लाइंट एसोसिएट्स के को-फाउंडर रोहित सरीन ने कहा कि फरवरी 2026 भारत के म्युचुअल फंड उद्योग के लिए पॉजिटिव रहा। इस दौरान 94,530 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया, जो वैश्विक चुनौतियों और बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद घरेलू निवेशकों के मजबूत भरोसे को दिखाता है।
उन्होंने कहा कि इक्विटी-ओरिएंटेड स्कीम्स ने भी मजबूत प्रदर्शन जारी रखा। फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और सेक्टोरल/थीमैटिक फंड्स में लगातार निवेश आता रहा, जो भारत की लंबी अवधि के आर्थिक विकास की कहानी पर निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है।
इस दौरान मल्टी एसेट एलोकेशन फंड सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाली कैटेगरी रही, जिसमें 8,476 करोड़ रुपये से ज्यादा का शुद्ध निवेश आया। इससे यह संकेत मिलता है कि घरेलू निवेशक अब डायवर्सिफाइड और लक्ष्य-आधारित निवेश की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं।
सरीन ने बताया कि महीने के दौरान 21 नई ओपन-एंडेड स्कीम्स लॉन्च की गईं, जिससे साफ है कि एसेट मैनेजर्स भी इस पॉजिटव रुख को साझा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत का म्युचुअल फंड सेक्टर लगातार मजबूत और व्यापक विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के मुताबिक Nippon AMC के शेयरों में आगे भी तेजी की संभावना है। कंपनी ने कहा कि Nippon AMC लगातार उद्योग में सबसे तेज मार्केट शेयर बढ़ाने वाली कंपनियों में बनी हुई है। इसका म्युचुअल फंड क्वार्टरली एवरेज एसेट अंडर मैनेजमेंट (QAAUM) 7 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो सालाना आधार पर 23 फीसदी की बढ़ोतरी है। साथ ही कंपनी का कुल मार्केट शेयर बढ़कर पांच साल के हाई 8.7 फीसदी पर पहुंच गया है।
यह बढ़ोतरी लगातार शुद्ध निवेश (नेट इनफ्लो), मजबूत SIP मोमेंटम और बेहतर इक्विटी मिक्स (दिसंबर 2025 तक 47 फीसदी) के कारण हुई है। इसी वजह से वित्त वर्ष 2026 में अब तक उद्योग में सबसे ज्यादा इक्विटी शेयर वृद्धि 7.1 फीसदी दर्ज की गई है, जो सालाना आधार पर 11 बेसिस पॉइंट ज्यादा है।
कंपनी अपने अल्टरनेटिव निवेश, GIFT City और ऑफशोर प्लेटफॉर्म का विस्तार कर रही है। इसके तहत अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) में कुल प्रतिबद्धताएं 8,920 करोड़ रुपये तक पहुंच गई हैं। वहीं GIFT सिटी में AUM 370 करोड़ रुपये और ऑफशोर AUM 18,000 करोड़ रुपये हो गया है। बढ़ती संस्थागत और वैश्विक निवेशकों की भागीदारी के बीच ये सेगमेंट म्युचुअल फंड के मुख्य कारोबार के अलावा नए ग्रोथ ड्राइवर के रूप में उभर रहे हैं।
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मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के विश्लेषकों का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026 से 2028 के बीच कंपनी के रेवेन्यू, EBITDA और कोर PAT में क्रमशः 16%, 17% और 18% की सालाना बढ़त देखने को मिल सकती है। ब्रोकरेज फर्म ने इस शेयर पर ‘BUY’ रेटिंग बरकरार रखते हुए 1,040 रुपये का टारगेट प्राइस दिया है, जो FY28E की अनुमानित कमाई के 38 गुना मूल्यांकन पर आधारित है।
मजबूत AUM ग्रोथ, रिटेल निवेशकों में मजबूत पकड़, SIP के जरिए लगातार आने वाला निवेश, ETF सेगमेंट में बाजार नेतृत्व और अल्टरनेटिव तथा स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (SIF) जैसे ज्यादा रिटर्न देने वाले सेगमेंट की ओर बेहतर पोर्टफोलियो मिक्स के कारण Nippon AMC की कमाई में आगे भी स्थिर और मजबूत वृद्धि की संभावना दिखाई देती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज के मुताबिक हाल के नियामकीय बदलावों में कुछ इक्विटी स्कीम्स में 5 बेसिस प्वाइंट (bp) के एग्जिट लोड को हटाना, टोटल एक्सपेंस रेशियो (TER) की स्लैब में बदलाव और कैश ट्रांजैक्शंस पर ब्रोकरेज कैप को घटाकर 6 bp करना (पहले यह प्रभावी रूप से लगभग 8–8.5 bp था) शामिल हैं। ब्रोकरेज हाउस के अनुसार इन बदलावों का तुरंत वित्तीय असर सीमित रहने की संभावना है, क्योंकि प्रभावी ब्रोकरेज दर पहले से ही नए तय किए गए कैप से नीचे चल रही थी।
संरचनात्मक रूप से देखा जाए तो उद्योग पर धीरे-धीरे यील्ड में कमी का दबाव बना रह सकता है। अनुमान है कि यह हर साल करीब 1–2 बेसिस प्वाइंट तक हो सकता है। इसका कारण टेलीस्कोपिक TER संरचना और लगातार हो रहे नियामकीय बदलाव हैं। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक जैसे-जैसे AUM बढ़कर कम TER स्लैब में जाता है, बड़ी स्कीम्स पर अतिरिक्त TER दबाव पड़ सकता है, जबकि छोटी स्कीम्स को स्लैब में हुए बदलाव से थोड़ा फायदा मिल सकता है।
(डिस्क्लेमर: इस स्टॉक पर दी गई राय और आउटलुक संबंधित ब्रोकरेज फर्मों के हैं। इन्हें बिजनेस स्टैंडर्ड का समर्थन प्राप्त नहीं है। पाठकों को अपनी समझ और विवेक से निर्णय लेने की सलाह दी जाती है।)