आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की तेज होती दौड़ के बीच भारतीय आईटी सेक्टर के भविष्य को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं। क्या एआई भारतीय आईटी कंपनियों के लिए बड़ा मौका है या बड़ा खतरा, इस पर एक्सपर्ट्स की राय अभी पूरी तरह साफ नहीं है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के ग्लोबल हेड (इक्विटी स्ट्रेटेजी) क्रिस्टोफर वुड ने बीएस मंथन 2026 में जतिन भूटानी के साथ खास बातचीत में भारतीय आईटी सेक्टर पर एआई के प्रभाव को लेकर अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि एआई आईटी सर्विस कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती है। अभी यह साफ नहीं है कि कंपनियां इससे फायदा उठाएंगी या नुकसान झेलेंगी। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:
मैं इस पर एक्सपर्ट नहीं हूं। लेकिन बाजार में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रभाव को लेकर चिंता जरूर है। मेरा इस पर बहुत मजबूत मत नहीं है। लेकिन यह साफ है कि एआई आईटी सर्विस कंपनियों के लिए चुनौती है। अभी यह तय नहीं है कि वे इससे फायदा उठाएंगी या नुकसान होगा। मेरे अपने भारतीय पोर्टफोलियो में आईटी शेयर नहीं हैं।
छोटी अवधि में भारतीय आईटी कंपनियां कॉरपोरेट ग्राहकों को अपने छोटे लैंग्वेज मॉडल (Language Model) अपनाने और उन्हें काम में लाने में मदद कर सकती हैं। इससे उन्हें नए काम और कमाई के मौके मिल सकते हैं। लेकिन लंबी अवधि की तस्वीर अलग हो सकती है। एआई की तेजी से बढ़ती ताकत की वजह से सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया भर की सॉफ्टवेयर कंपनियों के सामने काम करने के तरीके में बड़े बदलाव का खतरा है। यानी आने वाले समय में पूरे उद्योग में उलटफेर देखने को मिल सकता है।
हो सकता है कई हों, लेकिन वैश्विक नजरिए से भारत एक ‘रिवर्स एआई ट्रेड’ नेशन है। अगर वैश्विक स्तर पर एआई थीम कमजोर पड़ती है, तो भारत बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।
Also Read | टैरिफ, कर्ज और AI… क्या तीन तरफ से घिर गए हैं ग्लोबल बाजार? जेफरीज की रिपोर्ट ने बताई हकीकत
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के मामले में इस समय चीन दुनिया में काफी आगे माना जा रहा है। एआई के क्षेत्र में चीन कई मामलों में अमेरिका से बेहतर स्थिति में है, खासकर इसलिए क्योंकि वहां ओपन सोर्स मॉडल को बढ़ावा दिया गया है। भारत को भी चीनी तकनीक को समझने और उससे सीखने की कोशिश करनी चाहिए।
चीन के पास एक बड़ा फायदा सस्ती और भरपूर ऊर्जा है। एआई के लिए दो चीजें सबसे ज्यादा जरूरी मानी जाती हैं- एनर्जी और कंप्यूटिंग पावर। एनर्जी के मामले में चीन अमेरिका से आगे है, जबकि कंप्यूटिंग ताकत के मामले में अमेरिका अभी भी बढ़त बनाए हुए है।
अगर एआई ट्रेड वैश्विक स्तर पर कमजोर पड़ता है तो एफआईआई भारत में लौट सकते हैं। फिलहाल उन्होंने भारत में बिकवाली की है और चीन, कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में निवेश बढ़ाया है। सरकार को कैपिटल गेन टैक्स खत्म कर देना चाहिए। विदेशी निवेशक भारतीय बाजार में कैपिटल गेन टैक्स देते हैं। जबकि कई देशों में उन्हें यह टैक्स नहीं देना पड़ता।