भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने सोमवार को कहा कि 3 अगस्त से शुरू हुआ नया क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (सीएएस) जारी रहेगा। नियामक हालांकि उद्योग से सुझाव ले रहा है ताकि अगर जरूरत हो तो इसमें कुछ बदलाव किए जा सकें।
एनआईएसएम में साइबर रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म लॉन्च करने के मौके पर चेयरमैन ने कहा, सीएएस तो पक्का रहेगा ही, बस हमें यह देखना है कि क्या इसमें कोई ऐसी सीमाएं या समस्याएं हैं, जिन्हें सुधारा जा सकता है तो निश्चित रूप से हम उनमें सुधार करेंगे। सेबी प्रमुख ने कहा कि ट्रैकिंग एरर की कोई चिंता नहीं है और उद्योग के कई लोगों ने इस कदम का स्वागत किया है क्योंकि इससे सौदे करने के लिए एक ही भाव मिलता है। पहले वाले सिस्टम में वॉल्यूम वेटेड ऐवरेज के आधार पर निकाली गई कीमत मिलती थी।
उन्होंने कहा कि उद्योग में कई लोग अभी भी अपने सिस्टम को अपडेट नहीं कर पाए हैं, जो पुराने सिस्टम और वीडब्ल्यूएपी सिस्टम पर बने हैं। पांडेय ने उद्योग की तैयारी से जुड़े सवालों का जवाब देते हुए कहा, यह एक बड़ा माइक्रोस्ट्रक्चर है। जब कोई चीज सालों से चल रही होती है तो लोगों को लगता है कि वह कभी नहीं बदलेगी, बदलाव कभी नहीं आएगा। और इसलिए वे नया सिस्टम सीखने में पूरी ऊर्जा नहीं लगाते। जब भी कोई बड़ी चीज आती है तो शुरू में कुछ दिक्कतें आती हैं क्योंकि लोगों को लगता है कि इसे टाल दिया जाएगा।
उन्होंने कहा, यह असल में एफपीआई को आकर्षित करने और पैसिव इन्वेस्टिंग, जो पहले से ही बाजार का 30 फीसदी है, की सुविधा देने में हमारी सफलता पर निर्भर करता है। हम सिर्फ इसलिए इस मामले पर कोई फैसला नहीं ले सकते कि कुछ लोग अपनी मर्ज़ी से ऑप्शन ट्रेडिंग करना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नियामक जल्द ही सीएएस को स्थिर करने की कोशिशों के तहत प्रतिभूतियों को उधार लेने और देने (एसएलबी) की प्रक्रिया पर परामर्श पत्र लाएगा।
उन्होंने कहा, इससे निश्चित रूप से सीएएस में मदद मिलेगी क्योंकि इसमें ज्यादा भागीदारी की जरूरत होगी। एसएलबी से सीएएस में भागीदारी बढ़ती है और यही हमारा लक्ष्य रहा है। हमारे पास एक वर्किंग ग्रुप है और हमें जल्द ही सुधारे गए एसएलबी पर काम शुरू करना होगा। मैं बस इतना कह सकता हूं कि बहुत जल्द, जिसका मतलब है कि हमें तेजी दिखाने की जरूरत है। साथ ही, परामर्श पत्र जारी करने से पहले हमें बाजार के अलग-अलग भागीदारों की बात भी सुननी होगी।
एसएलबी एक ऐसा तरीका है, जिसमें निवेशक अपने शेयरों को फीस लेकर दूसरों को उधार दे सकते हैं। दूसरी ओर, शॉर्ट-सेलिंग एक ट्रेडिंग रणनीति है, जिसमें कोई व्यक्ति उधार ली गई सिक्योरिटी को पहले बेच सकता है और बाद में उसे कम कीमत पर खरीदकर अंतर से मुनाफा कमा सकता है। सोमवार से एक्सचेंजों ने एसएलबी स्कीम के तहत कम समय वाले अनुबंध भी शुरू किए हैं। इसमें ट्रेडर्स को लेनदेन के रिवर्स लेग को तीन दिनों के भीतर निपटान करने का विकल्प मिलता है।
हेरफेर के मामलों के बारे में पूछे जाने पर पांडेय ने कहा कि नियामक डेटा का विश्लेषण कर रहा है। उन्होंने कहा, हम सोशल मीडिया से मिले सभी सुझावों पर गौर कर रहे हैं। हमारी टीमों ने उन्हें देखा भी है। वे प्रतिभागियों के साथ चर्चा कर रहे हैं। हमें अपने लक्ष्यों को हासिल करना है। भागीदारी से कई चीजों में सुधार होगा। सांकेतिक कीमतें बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।