भारत में खुदरा निवेशकों की संख्या बढ़कर करीब 14 करोड़ हो गई है। इसके साथ ही बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) बुनियादी जागरूकता और जानकारी के साथ निवेश के बीच के अंतर को पाटने की कोशिशों को तेज कर रहा है। सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने शुक्रवार को ये बातें कही।
आउटलुक मनी के 40आफ्टर40 कार्यक्रम में पांडेय ने कहा, हालांकि प्रौद्योगिकी ने निवेश को अधिक सुलभ और समावेशी बना दिया है। लेकिन कई नए निवेशक जोखिमों की केवल मामूली समझ के साथ बाजारों में आ रहे हैं, जिससे वे गलत बिक्री, घोटालों और उन जोखिमों के प्रति संवेदनशील हैं, जिन्हें वे पूरी तरह नहीं समझते हैं।
पांडेय ने सेबी के हालिया निवेशक सर्वेक्षण का हवाला देते हुए कहा, प्रतिभूति बाजारों के बारे में सामान्य जागरूकता ज्ञान की सीढ़ी का मात्र पहला पायदान है। जागरूकता और जानकारी के साथ भागीदारी के बीच एक अंतर है। उन्होंने कहा, आज के समय में विश्वास और भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि भागीदारी, विशेष रूप से खुदरा की, तेजी से बढ़ रही है।
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पांडेय ने कहा कि सेबी ने घोटालों और साइबर धोखाधड़ी की बढ़ती संख्या के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया तेज कर दी है। इन घोटालों में ऐसी संस्थाएं शामिल हैं जो झूठा दावा करती हैं कि वे सेबी में पंजीकृत हैं और वे गारंटी वाले रिटर्न की पेशकश करती हैं। ये अक्सर क्यूआर कोड या क्लोन किए गए मोबाइल ऐप्लिकेशनों के माध्यम से भुगतान करती हैं।
इस समस्या से निपटने के लिए बाजार नियामक ने ‘सेबी चेक’ सुविधा शुरू की है। इसके माध्यम से निवेशक पंजीकृत मध्यस्थों के भुगतान विवरण को कुछ ही सेकंड में सत्यापित कर सकते हैं। नियामक ने निवेशकों से धनराशि एकत्र करने वाले मध्यस्थों के लिए नया यूपीआई हैंडल भी अनिवार्य कर दिया है, जिसमें सत्यापित हैंडल पर एक विशिष्ट “@वैलिड” पहचानकर्ता अंकित होगा।