वर्ष 1998 से जब भारतीय कंपनियों द्वारा तिमाही नतीजे घोषित किए जाने की शुरुआत हुई, उसके बाद से पहली बार बंबई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक सेंसेक्स में शुमार 30 कंपनियों के राजस्व में चौथी तिमाही के दौरान गिरावट दर्ज किए जाने की आशंका है।
गौरतलब है कि चौथी तिमाही में सेंसेक्स की लगभग 16 कंपनियों के शुध्द मुनाफे में गिरावट दर्ज की जा सकती है जबकि तीसरी तिमाही में 14 कंपनियों के मुनाफे में गिरावट दर्ज की गई थी।
फार्मा क्षेत्र की अग्रणी कंपनी रैनबैक्सी लैबोरेटरीज का जिस प्रकार शेयर बाजार में प्रदर्शन जारी है, उससे संकेत मिलते हैं कि इसके शुध्द मुनाफे में कमी हो सकती है। चौथी तिमाही में टाटा स्टील के मुनाफे में भी 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की गिरावट दर्ज किए जाने की आशंका है।
दिसंबर 2008 के दौरान खत्म हुए तीसरी तिमाही में सेंसेक्स की कंपनियों के राजस्व में केवल इकाई अंकों का इजाफा हुआ था और इनके शुध्द मुनाफे में 11 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी।
उल्लेखनीय है कि पहली तिमाही में इन कंपनियों के राजस्व में 29.6 फीसदी का इजाफा हुआ था और दूसरी तिमाही में 27.4 फीसदी की बढ़ोतरी हुई था, जबकि इनके मुनाफे की बात करें तो पहली तिमाही में 17.5 फीसदी की वृध्दि और दूसरी तिमाही में 3 फीसदी से ज्यादा की वृध्दि हुई थी।
सेंसेक्स की कंपनियों को लेकर ज्यादातर कॉर्पोरेट विश्लेषकों का मानना है कि एसीसी, भारती एयरटेल, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (बीएचईएल), एचडीएफसी बैंक, हिंदुस्तान यूनिलीवर, इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज, एनटीपीसी, ओएनजीसी और टाटा पावर के शुध्द मुनाफे में 20 फीसदी से ज्यादा का इजाफा दर्ज किया जा सकता है, जबकि डीएलएफ, ग्रासिम, हिंडाल्को, आईसीआईसीआई बैंक, मारुति सुजुकी, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा (एम ऐंड एम), स्टरलाइट और टाटा मोटर्स के शुध्द मुनाफे में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल), रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और विप्रो के शुध्द मुनाफे में मामूली गिरावट दर्ज की जा सकती है। वहीं एसीसी, भारती एयरटेल, बीएचईएल, एचडीएफसी बैंक, इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज, जयप्रकाश एसोसिएट्स, लार्सन ऐंड टुब्रो, मारुति सुजुकी, रिलायंस इन्फ्रा, टीसीएस और विप्रो की शुध्द बिक्री में वृध्दि के आसार हैं। साथ ही इन कंपनियों में 20 फीसदी से ज्यादा की वृध्दि अनुमानित है, जबकि डीएलएफ, हिंडाल्को, आईसीआईसीआई बैंक, एम ऐंड एम, रिलायंस इंडस्ट्रीज, स्टरलाइट इंडस्ट्रीज और टाटा मोटर्स के बिक्री के आंकडों में गिरावट देखी जा सकती है।
सेंसेक्स कंपनियों के परिचालन मुनाफे में 8 फीसदी की गिरावट देखी जा सकती है और मार्जिन में 130 आधार अंकों की गिरावट रह सकती है। सेंसेक्स में मार्जिन के लिहाज से पांच उम्दा प्रदर्शन करने वाली कंपनियों में टाटा पावर, रिलायंस इन्फ्रा, इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज, एचडीएफसी बैंक और लार्सन ऐंड टुब्रो का नाम शुमार हो सकता है। वहीं मार्जिन के लिहाज से पिछड़ने वाली कंपनियों में रैनबैक्सी, डीएलएफ, टाटा स्टील, स्टरलाइट और टाटा मोटर्स का नाम आ सकता है।
एडलवाइस के विश्लेषक का मानना है कि सेंसेक्स की कंपनियों के आय में महत्वपूर्ण रुप से 12 फीसदी की गिरावट देखी जा सकती है जबकि राजस्व 4 फीसदी लुढ़क सकता है। वहीं जिंसों की कीमतों में गिरावट आने से निवेश लागत पर आने वाला दवाब हल्का हुआ है ऐसे में परिचालन मार्जिन में 81 आधार अंकों का सुधार देखा जा सकता है।
हालांकि इसका उत्क्रम परिचालन नियंत्रण के सम्मुख खासा असर पड़ता हुआ नहीं दिखाई देगा। एडलवाइस के विश्लेषक ने संकेत दिए हैं कि यह लगातार दूसरी तिमाही होगी जिस दौरान आय में गिरावट दर्ज की जा सकती है, लेकिन अहम मुद्दा यह है कि गिरावट का दायरा पिछली तिमाही की अपेक्षा कहीं अधिक हो सकता है।
इसके पहले की तिमाही में जिंसों की आय में प्रमुख तौर पर गिरावट आयी थी, लेकिन चौथी तिमाही में रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग एवं वित्तीय सेवाएं, मीडिया, भवन-निर्माण, धातु और सीमेंट क्षेत्रों की आय में गिरावट देखी जा सकती है। दैनिक उपभोक्ता वस्तुओं और पूंजीगत वस्तुओं की आय में भी मामूली वृध्दि के आसार दिखाई दे रहे हैं। हालांकि, इस गिरावट के परिदृश्य में तेल विपणन कंपनियों की आय में जबरदस्त इजाफा देखा जा सकता है।
रेलिगेयर रिसर्च के मुताबिक तीसरी तिमाही के बाद बनाए गए सबसे खराब नतीजों के माहौल की तुलना में चौथी तिमाही में कार्पोरेट प्रदर्शन में सुधार आने की उम्मीद है। सेंसेक्स की कंपनियों के शुध्द मुनाफे में चालू तिमाही की शुरुआत में जहां 15 फीसदी की गिरावट होने की आशंका जताई जा रही थी, वहीं अब यह गिरावट 9 फीसदी तक अनुमानित है।
गौरतलब है कि तिमाही दर तिमाही आधार पर सेंसेक्स के शुध्द मुनाफे में 4 फीसदी सुधार होने का अनुमान है। ऑटो, तेल एवं गैस और धातु क्षेत्र की कंपनियों से चालू तिमाही के प्रदर्शन में अच्छे नतीजे देने की उम्मीद है। चौथी तिमाही के लिहाज से सबसे अहम बात यह है कि अधिकांश दिग्गज खिलाड़ियों की आय में मार्क टू मार्केट (एमटीएम) से हुए नुकसान के कारण घाटा उठाना पड़ सकता है।
सेंसेक्स की कंपनियों का परिचालन मार्जिन 381 आधार अंकों तक अनुमानित है लेकिन यह आंकड़ा तीसरी तिमाही के 462 आधार अंकों की तुलना में काफी कम है। चौथी तिमाही के तहत सेंसेक्स की आय वृध्दि में सर्वाधिक योगदान वार्षिक दर की आधार पर ओएनजीसी और स्टेट बैंक का होगा जो क्रमश: 17 फीसदी और 12 फीसदी है। आय में वृध्दि दर्ज कराने वाले सेंसेक्स के अन्य शेयरों में भारती एयरटेल, इंफोसिस टेक्नोलॉजिस, बीएचईएल और एचडीएफसी का भी योगदान हैं लेकिन इनका हिस्सा इकाई अंकों में होगा।
गौरतलब है कि सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 14 शेयरों द्वारा सूचकांक की आय में वृध्दि दर्शाने के आसार हैं जबकि अन्य 14 द्वारा सेंसेक्स की आय में गिरावट आ सकती है। सेंसेक्स की वृध्दि में सर्वाधिक नकारात्मक योगदान करने वालों में टाटा स्टील (-61 फीसदी), इसके बाद डीएलएफ (-38 फीसदी), स्टरलाइट इंडस्ट्रीज (-16 फीसदी), टाटा मोटर्स (-13 फीसदी) और आईसीआईसीआई बैंक (-9 फीसदी) शामिल हैं। टाटा स्टील और रैनबैक्सी तिमाही में घाटा उठाने वाली कंपनियां हो सकती हैं।
सेंसेक्स की प्रति शेयर आय (ईपीएस) में गिरावट का अनुमान है जो कि मार्च 2008 में खत्म हुई चौथी तिमाही के साथ शुरु हुई थी और इस दौरान जारी है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज (एमओएसएल) रिसर्च के मुताबिक यद्यपि वित्त वर्ष 2009-10 में 886 रुपये के ईपीएस अनुमान में कोई बदलाव नहीं हुआ है, 2008-09 के लिए ईपीएस अनुमान पूर्व में दिसंबर 2008 को खत्म हुई तिमाही के नतीजों की समीक्षा करने के बाद 840 रुपये आंकी गई थी लेकिन इसकी तुलना में अब यह 877 रुपये पर है।
अधिकांश का घटेगा मुनाफा तो कई रह सकती हैं फायदे में
सूचना प्रौद्योगिकी
रहेगा मिला जुला रुख
मार्च 2009 में समाप्त हुई चौथी तिमाही के लिए बीएसई सेंसेक्स में शामिल तीन सॉफ्टवेयर सेवा कंपनियों के तिमाही दर तिमाही (क्यूओक्यू) राजस्व बढ़ोतरी और शुद्ध मुनाफे में गिरावट दर्ज होने का अनुमान है।
साल दर साल (वाईओवाई) राजस्व बढ़ोतरी 20 फीसदी रहने की संभावना है वहीं शुद्ध मुनाफा लगभग 12 फीसदी तक बढ़ने का अनुमान है। अपने न्यूनतम हेज के साथ इन्फोसिस टेक्नोलॉजीज रुपये में गिरावट से फायदे में रहेगी वहीं टीसीएस और विप्रो चौथी तिमाही में उच्च हेजिंग नुकसान दर्ज कर सकती हैं।
एमओएसएल के तकनीकी विशेषज्ञों ने उम्मीद जताई है कि अमेरिकी डॉलर के संदर्भ में इन्फोसिस का राजस्व तिमाही दर तिमाही के आधार पर 1.1 फीसदी तक घटेगा। मूल्य निर्धारण और वसूली में कमी आने के कारण इसके परिचालन मार्जिन में 65 बेसिस प्वाइंट यानी 0.65 फीसदी की गिरावट आने का अनुमान है।
केआरसी के विश्लेषकों ने संभावना जताई है कि इन्फोसिस को रुपये में गिरावट और दूरसंचार क्षेत्र में आउटसोर्सिंग सौदों से बढ़त हासिल होगी। एडलवाइस के विश्लेषक ने अनुमान व्यक्त किया है कि इन्फोसिस साल दर साल 20 फीसदी अतिरिक्त राजस्व और मुनाफा बढ़ोतरी दर्ज करेगी।
एमओएसएल के विश्लेषक का अनुमान है कि डॉलर के संदर्भ में टीसीएस के राजस्व में तिमाही दर तिमाही 3.2 फीसदी की गिरावट आएगी। मूल्य निर्धारण में कमी की वजह से इसका परिचालन मार्जिन 2 फीसदी तक कम रहने की उम्मीद है। तीसरी और चौथी तिमाही के दौरान टीसीएस परियोजनाओं को रद्द किया था जिसका मौजूदा तिमाही में नकारात्मक असर स्पष्ट दिखेगा।
केआरसी के विश्लेषक का कहना है कि टीसीएस का परिचालन मार्जिन उच्च कर्मचारी लागत की वजह से डगमगाएगा। एडलवाइज का अनुमान है कि टीसीएस मूल्य निर्धारण में कमी और विदेशी मुद्रा के नुकसान की वजह से मुनाफे में कमी दर्ज करेगी।
एमओएसएल के विश्लेषक की भविष्यवाणी है कि विप्रो तुलनात्मक रूप से डॉलर राजस्व के संदर्भ में 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज करेगी। वसूली और मूल्य निर्धारण में कमी की वजह से इसके परिचालन मार्जिन में 1.4 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है।
एडलवाइज का अनुमान है कि विदेशी मुद्रा नुकसान और राजस्व में धीमी बढ़ोतरी की वजह से विप्रो साल दर साल शुद्ध मुनाफे में 17 फीसदी की कमी दर्ज करेगी। वहीं केआरसी का कहना है कि विप्रो का दूरसंचार क्षेत्र से प्राप्त होने वाला राजस्व घटेगा, क्योंकि वैश्विक दूरसंचार कंपनियों ने अपने खर्च और कर्मचारियों की संख्या में कटौती की है।
दूरसंचार
मात देने की तैयारी
ऐसी संभावना जताई जा रही है कि भारती एयरटेल मजबूत राजस्व और मुनाफा बढ़ोतरी की वजह से रिलायंस कम्युनिकेशन (आरकॉम) को मात देगी। केआरसी के विश्लेषक के मुताबिक भारती के राजस्व में 50 फीसदी से भी अधिक का इजाफा होने की संभावना है।
वहीं एडलवाइस और एमओएसएल के विश्लेषकों ने यह बढ़ोतरी 28-30 फीसदी होने का अनुमान लगाया है। तिमाही के दौरान जेपीवाई यानी जापानी मुद्रा में तेज गिरावट के कारण कम विदेशी मुद्रा घाटे की वजह से भारती के लाभ में इजाफा होने की उम्मीद है। कंपनी का आधा बकाया ऋण जापानी मुद्रा में है।
तिमाही दर तिमाही 10-14 फीसदी की मजबूत उपभोक्ता बढ़ोतरी के बावजूद आर-कॉम को राजस्व में महज 14-17 फीसदी की बढ़त हासिल होने की संभावना है। कंपनी को मजबूत ट्रैफिक ग्रोथ के बावजूद रेवेन्यू पर मोबाइल (आरपीएम) में 4-6 फीसदी की गिरावट दर्ज होने की आशंका है। आरपीएम में कमी, लॉन्च पर भारी-भरकम खर्च, और अन्य संबद्ध लागत की वजह से इसका सालाना मार्जिन 3.9 फीसदी तक गिरने की आशंका जताई जा रही है।
एमओएसएल ने भारती के राजस्व में साल दर साल 28.1 फीसदी और तिमाही दर तिमाही 4 फीसदी का इजाफा होने का अनुमान व्यक्त किया है। इस बढ़त का प्रमुख कारण इसकी मोबाइल सेवाओं में हुए 10 फीसदी का इजाफा है। इसके मोबिलिटी राजस्व तिमाही दर तिमाही 3.3 फीसदी की बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
इसके साल दर साल मार्जिन में 0.8 फीसदी तक की कमी और तिमाही दर तिमाही मार्जिन 0.2 फीसदी की गिरावट के साथ 40.7 फीसदी रहने का अनुमान है। एडलवाइस का मानना है कि भारती का मोबिलिटी एआरपीयू (प्रति उपभोक्ता औसत राजस्व) तिमाही दर तिमाही 2.6 फीसदी घटने की आशंका है।
एमओएसएल का अनुमान है कि मतबूत ग्राहक आधार की बदौलत आरकॉम का राजस्व साल दर साल 13 प्रतिशत और तिमाही दर तिमाही 2.6 प्रतिशत के हिसाब से बढ़ेगा। स्तरीय ग्राहक के नहीं जुड़ने और जीएसएम पर मुफ्त प्रोत्साहन मिनट्स दिए जाने से एआरपीयू घटने का अनुमान किया जा रहा है। आक्रामक रूप से नेटवर्क का विस्तार करने के कारण साल दर साल आधार पर मार्जिन में 2.20 प्रतिशत की कमी आने के आसार हैं।
अनुमान किया जा रहा है कि शुध्द लाभ साल दर साल आधार पर 10 प्रतिशत और तिमाही दर तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत घटेगा। एडलवाइस का आकलन है कि जीएसएम लॉन्च के समय के प्रोत्साहन ऑफर की वजह से तिमाही दर तिमाही आधार पर आरकॉम का एआरपीयू 9.5 फीसदी घटेगा। डेरिवेटिव आय में अनिश्चितता एक जोखिम है इसलिए एडलवाइस का अनुमान है कि आरकॉम के शुध्द लाभ में 9 प्रतिशत की कमी आ सकती है।
बैंकवित्तीय संस्थान
चौथी तिमाही निराशाजनक
विश्लेषकों का अनुमान है कि चौथी तिमाही बैंकों के लिए ज्यादा अच्छा नहीं रहेगा। चार वित्तीय संस्थानों की ब्याज से होने वाली शुध्द आय इकाई अंकों में दर्ज किए जाने का अनुमान है।
मार्च 2008 में समाप्त हुई तिमाही में शुध्द लाभ में कमी आई थी। परिसंपत्तियों के कीमतों और देनदारियों की कीमतों का पुनर्निधारण, जमाओं में जबरदस्त बढ़ोतरी के बावजूद ऋण वृध्दि में गिरावट आने और तरजीही क्षेत्र की उधारी से कम लाभ होने से शुध्द ब्याज मार्जिन दवाब में आने का अनुमान है।
एडलवाइस का अनुमान है कि एचडीएफसी के ऋण वितरण में लगभग 10 फीसदी की वृध्दि होगी। कोष की लागत कम होने से स्प्रेड्स में बढ़ोतरी की संभावना है। एमओएसएल का अनुमान है कि एचडीएफसी की वितरण वृध्दि दर चौथी तिमाही में 4 प्रतिशत रहेगी जबकि दिसंबर 2008 को समाप्त हुए नौ महीनों में यह 22 प्रतिशत था।
केआरसी का अनुमान है कि एचडीएफसी को ब्याज से होने वाली आय में कमी आएगी क्योंकि उधारी दरें कम हुई हैं। एचडीएफसी बैंक का एनआईआई (ब्याज से होने वाली शुध्द आय) और शुध्द लाभ की वृध्दि दर 21 प्रतिशत से अधिक रहने की उम्मीद है। एडलवाइस का अनुमान है कि एचडीएफसी बैंक के मार्जिन में कोई परिवर्तन नहीं होगा क्योंकि इसने प्रधान उधारी दरों को अपरिवर्तित रखा है।
एमओएसएल का अनुमान है कि इस तिमाही में बैंक के ट्रेजरी लाभ में पिछली तिमाहियों के जबरदस्त लाभ के मुकाबले कमी आएगी। विभिन्न रिपोर्ट के आधार पर शुध्द लाभ वृध्दि लगभग 37 प्रतिशत रहने का अनुमान है और समायोजित आधार पर इसके 29 प्रतिशत रहने की संभावना है।
चौथी तिमाही में आईसीआईसीआई बैंक प्रदर्शन बुरा रहा। इस दौरान इसकी एनआईआई और शुध्द लाभ में कमी आई। मार्क टु मार्केट प्रावधानों के कारण ट्रेजरी लाभ कम होने से शुध्द लाभ मार्जिन घटने के आसार हैं। बैंकिंग विश्लेषकों का अनुमान है कि खुदरा ऋण वृध्दि के मध्दम होने से ऋण में 4 प्रतिशत की कमी आएगी। बैंक की जमाओं में 12 प्रतिशत की कमी आने का अनुमान है क्योंकि इस तिमाही में बल्क जमाओं का पुनर्भुगतान किया जाना है।
भारतीय स्टेट बैंक के बारे में अनुमान किया जा रहा है कि इसके एनआईआई में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और शुध्द लाभ वृध्दि 7 प्रतिशत रहेगी। तीसरी तिमाही में जुटाए गए अधिक लागत वाली जमाओं के कारण बैंक का मार्जिन घटने की संभावना है।
परिसंपत्ति गुणवत्ता में गिरावट आने और अपेक्षाकृत अधिक जोखिम वाली परिसंपत्तियों में निवेश को देखते हुए एमओएसएल का अनुमान है कि बैंक की गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का प्रावधान अधिक रहेगा। एडलवाइस का अनुमान है कि एसबीआई की तिमाही दर तिमाही ऋण वृध्दि मजबूत रहेगी लेकिन ऋणों के पुन: मूल्य निर्धारण से मार्जिन पर दवाब बना रहेगा।
सीमेंट
लागत बढ़ने से पड़ेगा मुनाफे पर असर
माल भाड़ा और ऊर्जा की कीमतों के रूप में लागत बढ़ने से पिछली कुछ तिमाहियों में सीमेंट क्षेत्र की लाभोत्पादकता प्रभावित हुई है। आयातित कोयले और पेट कोक की कीमतें जहां 60 प्रतिशत तक कम हुई हैं वहीं कच्चे तेल की कीमतें भी अपने शीर्ष स्तर से 70 प्रतिशत नीचे आई हैं।
सेंसेक्स में शामिल तीन सीमेंट कंपनियों में विभिन्न कारोबार वाली ग्रासिम और केवल सीमेंट का कारोबार करने वाली एसीसी की बिक्री और लाभ में तेजी आने का अनुमान है जबकि जयप्रकाश इंडस्ट्रीज, जिसकी दिलचस्पी सीमेंट के साथ-साथ अभियांत्रिकी में है, की बिक्री और लाभ में कमी आने के आसार हैं।
एसीसी की शुध्द बिक्री में 10 से 17 प्रतिशत तक बढ़त होने का अनुमान है। औसत प्राप्तियां पूर्ववत रहने की संभावना है। ऊर्जा की लागत घटने से तिमाही दर तिमाही मार्जिन 2.90 फीसदी बढ़ने का अनुमान है यद्यपि सालाना आधार पर इसमें एक प्रतिशत की कमी आने का अनुमान किया जा रहा है। कोयले की घरेलू कीमतें घटने से कंपनी को फायदा हो सकता है क्योंकि कंपनी ज्यादातर घरेलू कोयले पर निर्भर करती है।
कंपनी को ईंधन और माल भाड़ा लागत से भी लाभ होने का अनुमान है क्योंकि कुल बिक्री के प्रतिशत आधार पर इसमें क्रमश: 3.3 और 1.6 फीसदी के कमी आने का अनुमान है। ग्रासिम को राजस्थान स्थित 45 लाख टन क्षमता वाली इकाई के शुरू होने से लाभ होने का अनुमान है। सीमेंट कारोबार में 4 से 7 प्रतिशत की बढ़ोतरी का अनुमान है जबकि प्राप्तियां तिमाही दर तिमाही 2 प्रतिशत और साल दर साल 5.6 फभ्सदी बढ़ने का अनुमान है।
एमओएसएल के मुताबिक सीमेंट प्रभाग का परिचालन मार्जिन तिमाही दर तिमाही 0.7 फीसदी और साल दर साल 4.5 फीसदी बढ़ने की संभावना है। एमओएसएल का अनुमान है कि जयप्रकाश एसोसिएट्स को तीसरी तिमाही में मध्य प्रदेश के सिध्दि स्थित 20 लाख टन सीमेंट उत्पादन इकाई के शुरू होने से लाभ होगा।
प्रबंधन जल्द ही 25 लाख टन क्षमता यूपी सीमेंट इकाई में जोडना चाहती है। केआरसी का अनुमान है कि तिमाही के दौरान कंपनी की बिक्री मुख्यत: सीमेंट उत्पादन में हुई 11 प्रतिशत की बढ़ोतरी से प्रभावित होगी।
एडलवाइस के विश्लेषकों का मानना है कि तिमाही दर तिमाही प्राप्तियां पांच फीसदी और कारोबार 17 फीसदी बढ़ने से जयप्रकाश की स्थिति मजबूत होगी। इस कंपनी 50 प्रतिशत बिकी उत्तर प्रदेश में होती है जहां फरवरी और मार्च में कीमतों में अधिकतम बढोतरी देखी गई है।
धातु
हो सकता है धातु कंपनियों को नुकसान
अनुमान है कि चौथी तिमाही में हिंडाल्को और स्टरलाइट इंडस्ट्रीज की शुध्द बिक्री और शुध्द लाभ में अलौह धातुओं की कीमतें घटने की वजह से भारी गिरावट आएगी। टाटा स्टील की शुध्द बिक्री तीन फीसदी बढ़ने का अनुमान है जबकि इसका शुध्द लाभ 33 फीसदी घटने के आसार हैं।
हालांकि, एमओएसएल के अनुसार समेकित तौर पर टाटा स्टील की बिक्री घटने और 920 करोड रुपये की शुध्द हानि होने का अनुमान है। विश्लेषकों का अनुमान है कि इस तिमाही के दौरान कीमतें कम होने से कोरस की परिसंपत्तियां महत्वपूर्ण रूप से घटेगा। यूरोप में मांग में आई भारी कमी से कोरस चिंता का विषय बना हुआ है।
लागत कम करने के अप्रत्याशित उपाय किए जाने के बावजूद टाटा स्टील को इसमें और अधिक फंड लगाना पड़ सकता है। इस्पात की नरम होती कीमतों के कारण भारतीय परिचालन से टाटा स्टील को होने वाला लाभ दवाब में आने का अनुमान है।
अनुमान है कि एल्युमीनियम और तांबे की कीमतों में भारी कमी होने से चौथी तिमाही में हिंडाल्को की शुध्द बिक्री में 30 प्रतिशत और शुध्द लाभ में 60 प्रतिशत की गिरावट आएगी। लंदन मेटल एक्सचेंज पर मूलभूत धतुओं की कीमतें घटने से स्टरलाइट की शुध्द बिक्री 42 प्रतिशत घटने का अनुमान है।
पावर
ऊर्जा-संचार का अनुमान
पावर उत्पादन और वितरित करने वाली कंपनियों के राजस्व में 20 फीसदी और शुध्द लाभ में दहाई अंकों में बढ़ोतरी होने का अनुमान है। ईंधन की कीमतें बढ़ने से राजस्व में अच्छी खासी बढ़ोतरी हुई है।
इस तिमाही के दौरान एनटीपीसी और रिलायंस इन्फ्रा के पास नकदी का भंडार होने से इनके अन्य आय में बढ़ोतरी का अनुमान किया जा रहा है। चौथी तिमाही में 500 मेगावाट की अतिरिक्त वाणिज्यिक क्षमता जुड़ने और अधिक पीएलएफ से एनटीपीसी के राजस्व में 14 फीसदी की बढ़ोतरी की उम्मीद है जबकि इसका शुध्द लाभ लगभग 10 से 12 प्रतिशत बढने का अनुमान किया जा रहा है।
रिलायंस इन्फ्रा के राजस्व में 50 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान है जबकि इसके शुध्द लाभ में 20 प्रतिशत से अधिक की कमी के आसार हैं। टाटा पावर के राजस्व में लगभग 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हो सकती है जबकि इसके लाभ में 100 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी का अनुमान किया जा रहा है।
टाटा पावर की शुध्द बिक्री में दहाई अंकों में बढ़त होने का अनुमान है जबकि इसका शुध्द लाभ भी टाटा टेलीसर्विसेज को टाटा पावर की हिस्सेदारी बेचे जाने से बढ़ सकता है।