अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में 139 पैसे टूटकर 94.90 पर पहुंच गया। राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की अमेरिकी शांति प्रस्ताव पर प्रतिक्रिया को अस्वीकार किए जाने के बाद कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया, जिसका असर रुपये पर पड़ा। फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, मजबूत अमेरिकी डॉलर और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) की भारी बिकवाली ने भी रुपये पर दबाव बढ़ाया।
इंटरबैंक फॉरेक्स एक्सचेंज में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 94.97 पर खुला और बाद में थोड़ा सुधरकर 94.90 पर पहुंच गया। यह पिछले बंद स्तर से 139 पैसे की भारी गिरावट है। शुक्रवार को रुपया शुरुआती नुकसान से उबरते हुए 71 पैसे की मजबूत बढ़त के साथ 93.51 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।
फिनरेक्स ट्रेजरी एडवाइजर्स LLP के ट्रेजरी प्रमुख और एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनिल कुमार भंसाली ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा ईरान की प्रतिक्रिया को खारिज किए जाने के बाद ब्रेंट ऑयल की कीमतें बढ़ गईं। डॉलर इंडेक्स भी ऊपर गया और जोखिम वाले एसेट्स में गिरावट आई। इजरायल ने लेबनान पर हमले जारी रखे, जबकि हिजबुल्लाह ने दावा किया कि उसने ड्रोन के जरिए इजरायली सेना के कैंपों पर हमला किया। वहीं यूएई ने भी ईरान से आए ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। उन्होंने कहा कि इस तरह युद्ध जारी है, जिससे तेल की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं और इसी वजह से रुपया शुक्रवार के बंद स्तर से नीचे खुला।
केडिया एडवाइजरी के डायरेक्टर अजय केडिया के मुताबिक, ईरान संघर्ष से सुरक्षित निवेश की मांग बढ़ी है। डॉलर इंडेक्स में रिकवरी
अमेरिका-ईरान तनाव बढ़ने से डॉलर मजबूत हुआ। दरअसल, ट्रंप ने ईरान की शांति पेशकश को खारिज कर दिया है। इसके चलते पश्चिम एशिया में संघर्ष फिर तेज होने की आशंका गहरा गई है।
केडिया का कहना है कि सोमवार को अमेरिकी डॉलर इंडेक्स 98 के करीब पहुंच गया और पिछले सप्ताह की गिरावट का कुछ हिस्सा रिकवर कर लिया। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के कारण सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ी।
दूसरी ओर, शुक्रवार को जारी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के अनुसार अप्रैल में नॉन-फार्म पेरोल 1,15,000 बढ़े, जो 62,000 के अनुमान से काफी अधिक थे। इससे यह उम्मीद मजबूत हुई कि फेडरल रिजर्व इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। अब बाजार की नजर अमेरिका के अप्रैल महंगाई आंकड़ों पर है, ताकि यह आकलन किया जा सके कि तेल की बढ़ती कीमतों का व्यापक महंगाई दबाव पर कितना असर पड़ रहा है।
इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती को मापने वाला डॉलर इंडेक्स 0.20 प्रतिशत बढ़कर 98.20 पर कारोबार कर रहा था। वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड वायदा कारोबार में 4.17 प्रतिशत उछलकर 105.5 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। एक्सचेंज आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 4,110.60 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक 1 मई को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 7.794 अरब डॉलर घटकर 690.693 अरब डॉलर रह गया। इससे पिछले 24 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार 4.82 अरब डॉलर घटकर 698.487 अरब डॉलर रहा था।
ईरान की सरकारी मीडिया ने रविवार को बताया कि ईरान ने अमेरिकी युद्धविराम प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तानी मध्यस्थों के जरिए भेज दी है और वह चाहता है कि बातचीत का केंद्र युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने पर हो।
हालांकि ट्रंप ने ईरान के इस प्रस्ताव को “पूरी तरह अस्वीकार्य” बताते हुए खारिज कर दिया। उन्होंने इसके बारे में ज्यादा जानकारी साझा नहीं की। इसी बीच एक प्रमुख रिपब्लिकन नेता ने ट्रंप से “सैन्य विकल्प” पर विचार करने का आग्रह किया।
एजेंसी इनपुट के साथ