इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने टैक्स फॉर्म्स के पुराने ढांचे में कई बड़े किए हैं। यह नया बदलाव सिर्फ फॉर्म्स के नाम बदलने जैसा नहीं है, बल्कि एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे टैक्सपेयर्स के रिपोर्टिंग के तरीके और डिपार्टमेंट की जांच प्रक्रिया में बड़ा बदलाव आएगा।
चाहे आप नौकरीपेशा हों, पेंशनभोगी हों, फ्रीलांसर हों या बिजनेसमैन, इन नए फॉर्म्स का असर हर किसी पर पड़ेगा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस बदलाव का मकसद टैक्स डेटा को ज्यादा सटीक बनाना और जानकारी छिपाने की गुंजाइश को खत्म करना है।
अब तक टीडीएस (TDS) के मिलान के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 26AS की जगह अब Form 168 लेगा। यह नया फॉर्म अब सालाना टैक्स सूचना विवरण (Annual Information Statement) के तौर पर काम करेगा।
टैक्सस्पैनर (Taxspanner) के को-फाउंडर और सीईओ सुधीर कौशिक के मुताबिक, “Form 168 पुराने 26AS के मुकाबले काफी व्यापक होने की उम्मीद है। इसमें न केवल टीडीएस और टीसीएस (TCS) की जानकारी होगी, बल्कि वित्तीय लेनदेन और आय का विस्तृत डेटा भी शामिल होगा।”
उन्होंने चेतावनी भी दी कि इससे पारदर्शिता तो बढ़ेगी, लेकिन जांच का दायरा भी बढ़ जाएगा, इसलिए रिटर्न भरने से पहले लेनदेन का मिलान करना बेहद जरूरी है।
वहीं, सिंघानिया एंड कंपनी की पार्टनर रीतिका नैय्यर का कहना है कि डिपार्टमेंट के पास पहले से मौजूद डेटा, जैसे शेयर बाजार के लेनदेन और भारी-भरकम निवेश की जानकारी भी अब Form 168 में एक साथ दिखेगी। इससे ईमानदार टैक्सपेयर्स के लिए रिटर्न भरना आसान होगा क्योंकि ज्यादातर जानकारी पहले से भरी हुई (Pre-filled) मिलेगी।
पुराने सिस्टम में पैन कार्ड बनवाने के लिए फॉर्म 49A और 49AA का इस्तेमाल होता था, जिससे अक्सर आवेदकों को कन्फ्यूजन होता था। अब सरकार ने इसे हटाकर फॉर्म 93, 94, 95 और 96 पेश किए हैं।
रीतिका नैय्यर ने बताया कि पहले का सिस्टम काफी मुश्किल भरा था। अब भारतीय व्यक्तियों, भारतीय संस्थाओं, विदेशी नागरिकों और विदेशी संस्थाओं के लिए अलग-अलग फॉर्म तय कर दिए गए हैं।
इस पर सिरिल अमरचंद मंगलदास के पार्टनर और टैक्स हेड एस आर पटनायक का कहना है कि इन नए फॉर्म्स में कैटेगरी के हिसाब से अलग फील्ड्स दिए गए हैं। साथ ही आधार और पैन के रिकॉर्ड्स के बीच ‘नेम-मैचिंग’ (नाम के मिलान) के नियम कड़े किए गए हैं। इससे पैन अलॉटमेंट में होने वाली गलतियां कम होंगी और काम तेजी से होगा।
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सीनियर सिटीजन और कम आय वाले लोगों को अक्सर टीडीएस कटने के बाद रिफंड का इंतजार करना पड़ता था। अब Form 121 और 128 इस समस्या को दूर करेंगे।
एस आर पटनायक ने समझाया कि Form 121 पुराने फॉर्म 15G और 15H की जगह लेगा। यह उन लोगों के लिए एक ही डिक्लेरेशन मैकेनिज्म होगा जिनकी टैक्स देनदारी शून्य है। खासकर एफडी (FD) के ब्याज पर निर्भर रहने वाले रिटायर लोगों के लिए यह बड़ी राहत है।
वहीं, Form 128 पुराने फॉर्म 13 की जगह लेगा। रीतिका नैय्यर के अनुसार, यह उन बिजनेस और प्रोफेशनल्स के लिए फायदेमंद होगा जिनकी टैक्स देनदारी कम है, ताकि उनका कैश-फ्लो फालतू टीडीएस कटने की वजह से न फंसे।
टीडीएस सर्टिफिकेट के पुराने सिस्टम को पूरी तरह बदलते हुए अब Form 130 और 131 लाए गए हैं।
सुधीर कौशिक का सुझाव है कि टैक्सपेयर्स को अपनी कटौती की सटीक जानकारी देने के लिए इन्हीं फॉर्म्स का इस्तेमाल करना चाहिए। वहीं एस आर पटनायक ने सलाह दी है कि फ्रीलांसर्स और नौकरीपेशा लोग इन फॉर्म्स को अपने Form 168, बैंक स्टेटमेंट और सैलरी स्लिप के साथ नियमित तौर पर चेक करते रहें। अगर क्लाइंट या कंपनी टीडीएस अपडेट करने में देरी करती है, तो इससे बाद में टैक्स नोटिस आ सकता है।