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बढ़ते ऊर्जा संकट के बीच भी भारत ने रूस की LNG खरीदने से क्यों किया इनकार?

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भारत ने रूसी LNG पर क्यों लगाया ब्रेक? अमेरिका, युद्ध और ऊर्जा संकट का पूरा खेल समझिए

Last Updated- May 12, 2026 | 3:40 PM IST
LNG Import

पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से भारत में गैस की कमी की चिंता बनी हुई है। इसके बावजूद भारत ने रूस से ऐसा एलएनजी (तरलीकृत प्राकृतिक गैस) खरीदने से मना कर दिया है, जिस पर अमेरिका ने प्रतिबंध लगाए हैं। इस मामले की जानकारी रखने वाले दो सूत्रों ने यह बात कही।

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक और उपभोक्ता है। भारत एक तरफ अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित रखना चाहता है, वहीं दूसरी तरफ वह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन करने का जोखिम भी नहीं लेना चाहता।

सूत्रों के मुताबिक, रूस के पोर्टोवाया एलएनजी प्लांट से निकला एक जहाज भारत आने वाला था, लेकिन भारत की अनिच्छा के कारण वह अब तक अपना माल उतार नहीं पाया है। यह प्लांट अमेरिका के प्रतिबंधों के दायरे में है।

रॉयटर्स ने अप्रैल में बताया था कि ‘कुनपेंग’ नाम का एलएनजी टैंकर गुजरात के दहेज एलएनजी टर्मिनल की ओर बढ़ रहा था। लेकिन अब यह जहाज सिंगापुर के पास समुद्री क्षेत्र में खड़ा है और उसने अपना अगला गंतव्य सार्वजनिक नहीं किया है।

सूत्रों के अनुसार, भारत ने 30 अप्रैल को रूस के उप ऊर्जा मंत्री पावेल सोरोकिन को साफ बता दिया था कि वह प्रतिबंधित रूसी एलएनजी नहीं खरीदेगा। उस दौरान उनकी मुलाकात पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी समेत भारतीय अधिकारियों से हुई थी।

हालांकि, भारत रूस से कच्चा तेल खरीदना जारी रखे हुए है। इसकी वजह यह है कि अमेरिका ने कुछ देशों को ऊर्जा संकट से निपटने के लिए अस्थायी राहत दी हुई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की खेप को समुद्र में एक जहाज से दूसरे जहाज में ट्रांसफर कर छिपाया जा सकता है, लेकिन एलएनजी कार्गो को सैटेलाइट ट्रैकिंग से छिपाना बहुत मुश्किल होता है।

भारत अधिकृत यानी प्रतिबंधों से बाहर रूसी एलएनजी खरीदने के लिए तैयार है, लेकिन उसका ज्यादातर हिस्सा पहले से ही यूरोप को सप्लाई किया जा रहा है। सूत्रों ने कहा कि चीन अब भी प्रतिबंधित और गैर-प्रतिबंधित दोनों तरह की रूसी एलएनजी का बड़ा खरीदार बना हुआ है।

रूस भारत के साथ लंबे समय के लिए एलएनजी और उर्वरक जैसे पोटाश, फॉस्फोरस और यूरिया की सप्लाई के समझौते भी करना चाहता है।

ईरान संकट से पहले भारत अपनी लगभग आधी गैस जरूरत आयात से पूरी करता था और उसमें से करीब 60 प्रतिशत सप्लाई होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आती थी। भारत के आधे से ज्यादा कच्चे तेल की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है।

इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को लोगों से ईंधन और विदेशी मुद्रा बचाने की अपील की। उन्होंने लोगों से घर से काम करने, विदेश यात्राएं कम करने और सोना व खाद्य तेल के आयात को घटाने का आग्रह किया। (रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

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First Published - May 12, 2026 | 3:40 PM IST

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