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भारत को बड़ा झटका! ग्लोबल मार्केट कैप में हिस्सेदारी 3% से नीचे गिरी, ताइवान और कोरिया निकले आगे

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भारी बिकवाली से वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी 3% से नीचे गिर गई है। एआई की कमी और महंगे मूल्यांकन के कारण भारत अब ताइवान से पिछड़ने की कगार पर है

Last Updated- May 12, 2026 | 10:13 PM IST
Stock Market today
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

दो कारोबारी सत्रों में करीब 180 अरब डॉलर के भारी नुकसान के बाद वैश्विक बाजार पूंजीकरण (एमकैप) में भारत की हिस्सेदारी चार साल में पहली बार 3 फीसदी से नीचे गिर गई है। मंगलवार तक भारत का बाजार पूंजीकरण 4.77 ट्रिलियन डॉलर था। यह 164 ट्रिलियन डॉलर के वैश्विक एमकैप का 2.9 फीसदी है। जब भारत के बाजार शीर्ष पर थे तो वैश्विक मार्केट वैल्यू में देश की हिस्सेदारी 4.73 फीसदी थी। हालांकि एमकैप के मामले में भारत दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा इक्विटी बाजार बना हुआ है। लेकिन ताइवान इस कैलेंडर वर्ष में अब तक 45 फीसदी की जबरदस्त बढ़त के बाद इसे पीछे छोड़ने के कगार पर है।

दक्षिण कोरिया का मार्केट 75 फीसदी बढ़ा है और वह भी 4.7 ट्रिलियन डॉलर के मार्केट कैप के साथ उसके ठीक पीछे है। भारत के अपेक्षाकृत महंगे मूल्यांकन, वैश्विक ऊर्जा झटकों के प्रति ज्यादा संवेदनशीलता और एआई संबंधित बड़े निवेश के अवसरों की कमी ने निवेशकों के मनोबल पर बुरा असर डाला है और बाजार के आकर्षण को कम कर दिया है।

कोप्ले फंड रिसर्च के सीईओ और संस्थापक स्टीवन होल्डन ने एक लिंक्डइन पोस्ट में कहा, सालों तक भारत की ग्रोथ स्टोरी उभरते बाजारों में सबसे साफ-सुथरी कहानियों में से एक थी। उन्होंने कहा कि इसकी वजह घरेलू मांग, यहां की आबादी और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी आईटी सेवा क्षेत्र था। लेकिन 2020 के बाद से भारत की दोबारा रेटिंग में उस उम्मीद का काफी हिस्सा शामिल हो गया है, शायद जरूरत से ज्यादा।

उन्होंने कहा, एआई से भारत के आईटी सेक्टर को होने वाले ढांचागत खतरे को लेकर चिंता, साथ ही रुपये की कमजोरी, तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और टैरिफ से जुड़ी अनिश्चितता ने भारत में निवेश को और भी जटिल बना दिया है।

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First Published - May 12, 2026 | 9:51 PM IST

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