करीब 37 लाख करोड़ रुपये के घरेलू म्युचुअल फंड उद्योग ने पिछले दो साल में अपनी प्रबंधन अधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में भारी तेजी दर्ज की है। एचडीएफसी एमएफ के चेयरमैन दीपक पारेख का मानना है कि इस उद्योग को विकास के लिए लंबी राह तय करनी है।
उन्होंने एचडीएफसी एमएफ की 23वीं सालाना आम बैठक (एजीएम) के दौरान कहा, ‘पिछले पांच साल के दौरान एयूएम में 16 प्रतिशत की शानदार सालाना वृद्धि दर के बावजूद भारत में एमएफ उद्योग वैश्विक औसत के मुकाबले कम पहुंच वाला उद्योग बना हुआ है।’
उन्होंने कहा कि 74 प्रतिशत के वैश्विक औसत के मुकाबले भारत का एयूएम-जीडीपी अनुपात महज 16 प्रतिशत है और इक्विटी एयूएम-बाजार पूंजीकरण अनुपात सिर्फ 6 प्रतिशत है, जबकि वैश्विक औसत 33 प्रतिशत है।
वित्त वर्ष 2022 में एमएफ उद्योग की कुल एयूएम 20 प्रतिशत बढ़कर 37.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं, उद्योग ने 3.16 लाख नए फोलियो जोड़े जिसके साथ ही कुल संख्या बढ़कर 12.95 करोड़ फोलियो पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 2022 के दौरान एसआईपी प्रवाह बढ़कर 12,328 करोड़ रुपये हो गया और 2.66 करोड़ नए एसआईपी पंजीकरण दर्ज किए गए।
पारेख ने एमएफ उद्योग के विकास में अहम योगदान निभाने के लिए बाजार नियामक सेबी का आभार प्रकट किया।
उन्होंने कहा, ‘सेबी ने उद्योग के नियमन के साथ साथ विकास के लिए उपयुक्त समावेशी परिवेश तैयार कर निवेशकों में भरोसा पैदा करने की दोहरी जिम्मेदारी निभाई है।’
एचडीएफसी एएमसी का कर-बाद लाभ (पीएटी) वित्त वर्ष 2022 में सालाना आधार पर 5.1 प्रतिशत बढ़कर 1,393 करोड़ रुपये पर रहा। समान अवधि में कुल आय 10.5 प्रतिशत तक बढ़कर 2,433.20 करोड़ रुपये दर्ज की गई। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी की निवेश पूंजी 15.8 प्रतिशत बढ़कर 5,530 करोड़ रुपये रही।
वित्त वर्ष 2022 के अंत में, फंड हाउस की एयूएम 4.1 लाख करोड़ रुपये पर दर्ज की गई, जिसमें से करीब 50 प्रतिशत हिस्सा (2.1 लाख करोड़ रुपये) इक्विटी-केंद्रीय एयूएम से जुड़ा हुआ है।