मंगलवार को घरेलू सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) शेयरों में बड़ी गिरावट आई। इसका कारण अमेरिका में सूचीबद्ध आईटी कंपनियों के शेयरों में आई गिरावट रही। यह सब तब हुआ जब ओपनएआई ने कंसल्टिंग और इंजीनियरिंग फर्म टुमोरो को खरीदने का ऐलान किया। ओपनएआई का मकसद एआई सॉफ्टवेयर को उद्यम स्तर पर ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल में लाना है।
निफ्टी आईटी इंडेक्स 3.73 फीसदी गिरकर 28,235 पर बंद हुआ। यह 18 मई, 2023 के बाद से इसका सबसे निचला स्तर है। एआई के बल पर ऑटोमेशन के इस दौर में इस साल यह इंडेक्स अब तक अपनी कुल वैल्यू का एक-चौथाई से भी ज्यादा हिस्सा गंवा चुका है। इसकी वजह पारंपरिक आईटी सर्विस बिजनेस मॉडलों के लंबे समय तक टिकाऊ रहने को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं।
निफ्टी आईटी इंडेक्स के सभी 10 शेयर लाल निशान में बंद हुए। इनमें इन्फोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक्नॉलजीज जैसे दिग्गजों में 3 से 4 प्रतिशत के बीच गिरावट आई।
बाजार के कारोबारियों का कहना है कि ओपनएआई के इस नए कदम से इस आशंका को बढ़ावा मिला है कि वैश्विक एआई कंपनियां सॉफ्टवेयर टूल्स से आगे बढ़कर एंड-टू-एंड कंसल्टिंग और क्रियान्वयन सेवाओं के क्षेत्र में तेजी से विस्तार कर रही हैं। ये वे क्षेत्र हैं जो अरसे से भारतीय आईटी कंपनियों के राजस्व को बढ़ाते रहे हैं।
बजाज ब्रोकिंग के फंडामेंटल एनालिस्ट शाश्वत सिंह ने कहा कि ओपनएआई की नई ‘डेप्लॉयमेंट कंपनी’ बिजनेस यूनिट की शुरुआत पारंपरिक बिल योग्य-घंटे वाले मॉडलों के लिए बुनियादी खतरा है, जिन्होंने लंबे समय से वैश्विक आईटी उद्योग को सहारा दिया है।
सिंह ने कहा, ‘कंसल्टिंग फर्म टुमोरो का अधिग्रहण करके और ‘फॉर्वर्ड डेप्लॉयड इंजीनियर्स’ का उपयोग करके, ओपनएआई मॉडल डेवलपमेंट से आगे बढ़कर वर्कफ्लो रीडिजाइन और संगठनात्मक बदलाव के हाई-वैल्यू क्षेत्र में कदम बढ़ा रही है।’
उन्होंने कहा कि निवेशकों को डर है कि भारतीय आईटी कंपनियों को वे एआई कंपनियां तेजी से पीछे धकेल सकती हैं, जो अपनी खुद की टेक्नोलॉजी को सीधे ग्राहकों के लिए ऑटोमेट करने और लागू करने में सक्षम हैं।
लेकिन, कुछ विश्लेषकों ने तर्क दिया कि बाजार जेनरेटिव एआई से होने वाले दीर्घावधि जोखिमों पर शायद जरूरत से ज्यादा प्रतिक्रिया दे रहा है।
नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज के एक नोट में कहा गया है कि आईटी कंपनियों ने मार्च तिमाही में मोटे तौर पर मजबूत आय दर्ज की है। अनिश्चितता के बावजूद राजस्व वृद्धि, मार्जिन और सौदे हासिल करने का सिलसिला मजबूत बना रहा। ब्रोकरेज ने कहा कि एआई-आधारित बदलाव के कार्यक्रम और लागत-बचत पहल की मांग से सौदों की रफ्तार को लगातार समर्थन मिला, हालांकि सौदे पूरी होने में लगने वाला समय थोड़ा बढ़ गया।