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SIP लहर पर सवार स्मॉलकैप फंड, 5 साल में 5 गुना बढ़ा AUM

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5 साल में पांच गुना हुईं परिसंपत्तियां, स्मॉलकैप एयूएम में एसआईपी की हिस्सेदारी 55 फीसदी है जो सभी श्रेणियों में सबसे ज्यादा है

Last Updated- August 23, 2026 | 9:44 PM IST
SIP
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पिछले पांच वर्षों में म्युचुअल फंड में सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के बढ़ते चलन का सबसे ज्यादा फायदा स्मॉलकैप फंडों को हुआ है। इस श्रेणी ने मिडकैप फंडों के साथ मिलकर एसआईपी निवेश का एक बड़ा हिस्सा लगातार हासिल किया है। इसके एसआईपी खाते से जुड़ी परिसंपत्तियों में पांच गुना बढ़ोतरी देखी गई है।

मार्च 2021 में स्मॉलकैप फंडों में एसआईपी परिसंपत्तियां 35,489 करोड़ रुपये थीं, जो मार्च 2026 में बढ़कर 1.83 लाख करोड़ रुपये हो गई। पांच साल की अवधि में इसमें लगभग 1.48 लाख करोड़ रुपये की बढ़ोतरी हुई, जो इक्विटी श्रेणी में सबसे ज्यादा है। मिडकैप फंडों ने दूसरी सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज की और उन्होंने अपनी एसआईपी एयूएम में 1.45 लाख करोड़ रुपये जोड़े। 

शुक्रवार को एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (एम्फी) की तरफ से जारी आंकड़ों से पता चलता है कि एसआईपी निवेशकों ने ज्यादा जोखिम और ज्यादा रिटर्न वाली दो श्रेणी को ज्यादा पसंद किया है। 

रुपी विद ऋषभ इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक ऋषभ देसाई ने कहा, इन दो श्रेणियों में ज्यादा दिलचस्पी की दो वजहें हैं। पुराने आंकड़ों को देखें तो लंबे समय में मिड और स्मॉल कैप फंडों ने लार्ज-कैप फंडों के मुकाबले ज्यादा रिटर्न दिया है। इसलिए, ये खुदरा निवेशकों की पसंद के फंड हैं, जो ज्यादातर एसआईपी के जरिये निवेश करते हैं। स्मॉलकैप इकलौती ऐसी इक्विटी श्रेणी है, जिसमें एसआईपी से जुड़ी परिसंपत्तियां कुल एयूएम की आधी से ज्यादा हैं। 

एम्फी ने एक रिपोर्ट में कहा, मार्च 2026 तक स्मॉलकैप श्रेणी की कुल परिसंपत्तियों में एसआईपी एयूएम (स्मॉल-कैप) का हिस्सा 55 फीसदी था। इक्विटी-लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस), लार्जकैप, लार्ज और मिड-कैप और मिड कैप फंड में भी एसआईपी के इस्तेमाल में लगातार बढ़ोतरी देखी गई है। इन श्रेणियों में एसआईपी एयूएम का हिस्सा कुल श्रेणी परिसंपत्तियों का 40-50 फीसदी है, जो दिखाता है कि ये अलग-अलग बाजार पूंजीकरण में निवेश के मुख्य तरीके हैं।

एसआईपी परिसंपत्तियों में बढ़ोतरी के साथ ही कुल एसआईपी एयूएम में स्मॉल-कैप फंडों की हिस्सेदारी भी बढ़ी है। मार्च 2021 में इनकी हिस्सेदारी 8.3 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 12.1 फीसदी हो गई। इस तरह, एसआईपी एयूएम के मामले में ये मिडकैप और फ्लेक्सी-कैप फंडों के बाद तीसरी सबसे बड़ी श्रेणी बन गए हैं। सेक्टोरल और थीमेटिक फंडों की हिस्सेदारी में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और यह 5.8 फीसदी से बढ़कर 8.7 फीसदी हो गई है।

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First Published - August 23, 2026 | 9:44 PM IST

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