वित्त वर्ष 27 की जून तिमाही में केमिकल सेक्टर का प्रदर्शन बाकी सेक्टर से अलग और बेहतर रहा। उसने पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले राजस्व और शुद्ध लाभ में जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की। जहां ज्यादातर सेक्टर लागत बढ़ने की समस्या से जूझ रहे थे, वहीं केमिकल कंपनियों ने सकल और परिचालन मुनाफा मार्जिन में बढ़ोतरी दर्ज की।
कंपनियों के कुल राजस्व में बढ़ोतरी की मुख्य वजह बिक्री से मिलने वाली बेहतर रकम थी, जबकि मुनाफे में बढ़त कम लागत वाली इन्वेंट्री से हुई। हालांकि, ईरान युद्ध के कारण कच्चे माल और उत्पादों की कीमतों में भारी उछाल के बीच यह फायदा मुख्य रूप से कम लागत वाली इन्वेंट्री से मिला था, लेकिन निकट भविष्य में यह फायदा शायद बरकरार न रहे। इसकी वजह कच्चे माल की ज्यादा लागत और कम मांग है।
ब्रोकरेज का मानना है कि कुछ चुनिंदा कंपनियों को फायदा मिलता रहेगा, जबकि सितंबर तिमाही में दूसरी कंपनियों के फायदे घट सकते हैं। इस सेक्टर की कंपनियों के राजस्व में कुल वृद्धि 17 से 24 फीसदी के दायरे में रही। इसकी मुख्य वजह बिक्री से मिलने वाली ज्यादा रकम थी। हालांकि इस तरह के लाभ में एकरूरता नहीं थी।
ऐक्सिस डायरेक्ट की शिवानी मोरे बताती हैं कि महंगे फ्लोरोकेमिकल्स, कॉन्ट्रैक्ट डेवलपमेंट और मार्केटिंग ऑर्गनाइजेशन (सीडीएमओ), स्पेशलिटी इनग्रेडिएंट्स और न्यूट्रिशन कंपनियों ने उम्मीद से बेहतर वृद्धि दिखाई। लेकिन कृषि रसायन के निर्यात, बल्क कमोडिटी और मॉनसून पर निर्भर घरेलू रसायनों के मामले में मार्जिन में कमी और वॉल्यूम घटता दिखा।
ब्रोकरेज का कहना है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें आईं। इससे माल ढुलाई की लागत बढ़ गई और निर्यात करने में देर हुई। ऐक्सिस की राय में नवीन फ्लोरीन इंटरनैशनल बेहतर प्रदर्शन करने वाली कंपनी बनकर उभरी। उसने अपने उच्च प्रदर्शन वाले उत्पाद और सीडीएमओ सेगमेंट में परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल किया और प्रोडक्ट मिक्स को भी बेहतर बनाए रखा।
पश्चिम एशिया से जुड़े लॉजिस्टिक्स रूट में भारी बदलाव के बावजूद आरती इंडस्ट्रीज ने ज्यादा मार्जिन वाले खास प्रोजेक्ट्स और फ्यूल एडिटिव्स की मांग में सुधार का सफलतापूर्वक फायदा उठाया। साथ ही, एपकोटेक्स इंडस्ट्रीज़ ने सिंथेटिक रबर के मामले में मजबूत कीमत का दम दिखाया और घरेलू बिक्री में अच्छी बढ़त दर्ज की।
ग्लोबल क्रॉप प्रोटेक्शन और बल्क इंटरमीडिएट्स वाले सेगमेंट का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहा। उसे भारी मंदी का सामना करना पड़ा। पीआई इंडस्ट्रीज़ की निर्यात मात्रा में गिरावट आई और कीमतें भी कम रहीं। धानुका एग्रीटेक को जून में 40 फीसदी कम बारिश का सामना करना पड़ा, जिससे बुआई में देरी हुई और हर्बिसाइड की बिक्री घट गई।
कैमलिन फाइन साइंसेज पर मार्जिन का दबाव सबसे ज्यादा था। कंपनी को कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी का बोझ ग्राहकों पर न डाल पाने, अपनी अरोमा कैपेसिटी का पूरा इस्तेमाल न कर पाने और ब्राज़ील में बहुत ज्यादा माल ढुलाई खर्च का सामना करना पड़ा। इस सेक्टर में ऐक्सिस डायरेक्ट की पसंदीदा कंपनियों में आरती इंडस्ट्रीज, नवीन फ्लोरीन और जुबिलैंट इंग्रेविया शामिल हैं।
कोटक इंस्टिट्यूशनल इक्विटीज के अनुसार वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही भी केमिकल इंटरमीडिएट्स बनाने वाली कई कंपनियों के लिए जबरदस्त मुनाफे वाली साबित हुई, क्योंकि युद्ध की वजह से कीमतों में तेजी आई थी। कई कंपनियों, खासकर आधार रसायन बनाने वाली कंपनियों को तैयार माल की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण भारी मुनाफा हुआ। ब्रोकरेज फर्म के अभिजित अकेला और चैतन्य साहनी का कहना है कि ऐसा तब हुआ जब कंपनियों के पास कम लागत वाले कच्चे माल का स्टॉक मौजूद था।
कोटक के कवरेज वाली कंपनियों में दीपक नाइट्राइट, आरती इंडस्ट्रीज, अतुल, जुबिलैंट इन्ग्रेविया और एसआरएफ जैसे प्रमुख नाम शामिल हैं। एग्रोकेमिकल सेक्टर पर इस साल दक्षिण-पश्चिम मॉनसून की देरी का असर पड़ा, जिससे खरीफ सीजन की बुआई धीमी गति से शुरू हुई। नतीजतन, बायर क्रॉपसाइंस, रैलिस इंडिया और पीआई इंडस्ट्रीज जैसी एग्रोकेमिकल कंपनियों की वृद्धि धीमी रही। इस सेक्टर को लेकर ब्रोकरेज फर्म का नजरिया सतर्कता भरा है।
महंगाई और आर्थिक अनिश्चितता की वजह से मांग में संभावित सुस्ती और ज्यादातर बड़ी कंपनियों के महंगे मूल्यांकन को देखते हुए कोटक रिसर्च सावधानी बरत रही है और ऐसे ‘बॉटम-अप’ आइडिया चुन रही है, जिनमें जोखिम-प्रतिफल अनुपात आकर्षक हो। उसकी पसंदीदा कंपनियों में जुबिलैंट इन्ग्रेविया, गोदरेज एग्रोवेट, एस एच केलकर ऐंड कंपनी और क्लीन साइंस ऐंड टेक्नॉलजी शामिल हैं, क्योंकि इनमें उचित मूल्यांकन पर आय में अच्छी वृद्धि की संभावना है।
कम लागत वाली इन्वेंट्री और राजस्व में मजबूत वृद्धि का असर मार्जिन के मोर्चे पर प्रदर्शन में भी दिखा। जहां कुल सकल मार्जिन में मामूली बढ़ोतरी हुई, वहीं परिचालन मुनाफा मार्जिन में लगभग 240 आधार अंक की वृद्धि हुई।
नुवामा रिसर्च का कहना है कि इस तिमाही में कई केमिकल कंपनियों को इन्वेंट्री से फायदा हुआ। पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण कच्चे माल और उत्पादों की कीमतों में तेजी से हुए बदलावों ने इसमें मदद की।
रेफ्रिजरेंट गैस बनाने वाली कंपनियों को मजबूत मांग और आर-32 की ऊंची कीमतों का फायदा मिलता रहा, जिससे इस सेक्टर में बेहतर कमाई और मुनाफा हुआ। लेकिन ब्रोकरेज का मानना है कि यह सेक्टर काफी दिलचस्प लग रहा है क्योंकि चीनी युआन के मुकाबले रुपया कमजोर हुआ है, जिससे प्रतिस्पर्धा में सुधार की उम्मीद है।
इसके अलावा, इस सेक्टर में पूंजीगत खर्च का चक्र पीछे चल रहा है और मुनाफा मार्जिन रिकॉर्ड निचले स्तर पर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे आगे चलकर मुनाफा बढ़ सकता है। इस सेक्टर में उसकी पसंदीदा कंपनियां नवीन फ्लोरीन और आरती इंडस्ट्रीज हैं।