फरवरी में इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश 8 फीसदी बढ़कर 25,978 करोड़ रुपये का निवेश हो गया। माना जा रहा है कि भारत-US ट्रेड डील के चलते निवेशकों का भरोसा बढ़ा और निवेश में तेजी आई। उद्योग संगठन एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) ने मंगलवार को फरवरी माह के आंकड़े जारी किये। आंकड़ों के मुताबिक, बीते महीने इक्विटी फंड्स में निवेश बढ़ा लेकिन सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए इनफ्लो में कमी आई। फरवरी में SIP के जरिए 29,845 करोड़ का निवेश आया, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 31,002 करोड़ रुपये था।
एम्फी की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, म्युचुअल फंड इंडस्ट्री की कुल प्रबंधित संपत्ति (AUM) जनवरी के 81 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर फरवरी में 82 लाख करोड़ रुपये हो गई। कुल मिलाकर फरवरी में म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में 94,530 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश आया। हालांकि यह जनवरी में आए 1.56 लाख करोड़ रुपये से कम है।
इन्क्रेड मनी के सीईओ- एमएफ नितिन अग्रवाल का कहना है कि फरवरी के एम्फी आंकड़ों से सबसे अहम बात यह सामने आती है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद इक्विटी फंड में निवेश मजबूत बना हुआ है। फ्लेक्सी कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप जैसी कैटेगरी में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया है। इससे संकेत मिलता है कि निवेशक उन क्षेत्रों में निवेश बढ़ा रहे हैं जहां हाल में गिरावट आई है और अब उन्हें अब पहले के मुकाबले बेहतर वैल्यू दिखाई दे रही है।
उन्होंने कहा कि गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में जनवरी 2026 में रिकॉर्ड निवेश देखने को मिला था, लेकिन फरवरी में यह रफ्तार कुछ कम हुई है। इससे लगता है कि निवेशकों की डिफेंसिव निवेश रणनीति धीरे-धीरे कम हो रही है और लंबी अवधि में वेल्थ बनाने के लिए इक्विटी फिर से पसंदीदा विकल्प बनती दिख रही है।
एम्फी के आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी में एसआईपी के जरिए निवेश करीब 4 फीसदी गिरकर ₹29,845 करोड़ रुपये पर आ गया। जबकि इससे पहले जनवरी में एसआईपी के जरिए रिटेल निवेशकों ने 31,002 करोड़ रुपये म्युचुअल फंड्स में लगाए थे। एसआईपी के जरिए निवेश घटने पर एम्फी का कहना है कि पिछले महीने कम वर्किंग दिन होने के लिए एसआईपी इनफ्लो में कमी आई है।
आंकड़ों के अनुसार, फरवरी में इक्विटी फंड में 25,978 करोड़ रुपये का निवेश आया, जो जनवरी में आए 24,028 करोड़ रुपये से अधिक है। इक्विटी स्कीम्स में फ्लेक्सी कैप फंड में सबसे ज्यादा 6,924.65 करोड़ रुपये का निवेश हुआ। इसके बाद मिड कैप फंड में 4,003 करोड़ रुपये और स्मॉल कैप फंड में 3,881 करोड़ रुपये का निवेश आया।
सेक्टोरल और थीमैटिक फंड में भी 2,987 करोड़ रुपये का निवेश हुआ, जबकि लार्ज कैप फंड में 2,112 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश देखा गया। हालांकि ईएलएसएस फंड में 650 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई, जिससे यह संकेत मिलता है कि इस दौरान कुछ निवेशकों ने मुनाफा वसूली की या टैक्स बचत निवेश कम किया।
एम्फी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी वेंकट एन चालासानी के मुताबिक इक्विटी में यह सकारात्मक निवेश भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के चलते बढ़ा हो सकता है। अमेरिका, इजरायल और ईरान से जुड़े पश्चिम एशिया के बढ़ते तनाव के कारण इस महीने बाजार में कुछ उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है, लेकिन लंबे समय में भारत की ग्रोथ स्टोरी मजबूत बनी रहेगी।
फरवरी में डेट म्युचुअल फंड में 42,106 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया, जो जनवरी के 74,827 करोड़ रुपये से कम है। वहीं हाइब्रिड स्कीम्स में 11,983.37 करोड़ रुपये का नेट इनफ्लो रहा। इस दौरान गोल्ड ETF में फरवरी में 5,255 करोड़ रुपये का निवेश आया, जबकि जनवरी में यह 24,040 करोड़ रुपये और दिसंबर में 11,647 करोड़ रुपये था।
मोतीलाल ओसवाल एसेट मैनेजमेंट कंपनी के कार्यकारी निदेशक और चीफ बिजनेस अफसर अखिल चतुर्वेदी ने कहा कि फरवरी में म्युचुअल फंड की कुल बिक्री 65,542 करोड़ रुपये रही, जो जनवरी के 69,642 करोड़ रुपये से कम है। वहीं शुद्ध बिक्री लगभग स्थिर रही और यह 27,385 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछले महीने यह 27,804 करोड़ रुपये थी।
फरवरी में केवल 28 दिन होने के चलते अगर आंकड़ों को 30 दिन के आधार पर देखा जाए तो कुल बिक्री लगभग 70,224 करोड़ रुपये और शुद्ध बिक्री करीब 29,341 करोड़ रुपये के बराबर बैठती है। इससे संकेत मिलता है कि निवेश की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। मिड कैप और स्मॉल कैप फंड में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी रही, जबकि लार्ज कैप फंड में भी शुद्ध निवेश में सुधार देखा गया। हालांकि हाइब्रिड, वैल्यू या कॉन्ट्रा और मल्टी कैप कैटेगरी में निवेश की रफ्तार पहले के मुकाबले धीमी रही।
अबेकस म्युचुअल फंड के सीईओ वैभव चुघ का कहना है कि इक्विटी बाजार और निवेश उत्पादों में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। जियो-पॉलिटिकल टेंशन के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेशक अब वैल्यूएशन में सुधार को बेहतर तरीके से समझने लगे हैं। इसी वजह से स्मॉल और मिड कैप कैटेगरी में निवेश जारी है।
हाइब्रिड फंड और गोल्ड एक्सचेंज ट्रेडेड फंड में भी इनफ्लो बना हुआ है। इससे यह संकेत मिलता है कि निवेशक अपने पोर्टफोलियो को सुरक्षित रखने के लिए डायर्सिफाइड निवेश विकल्प अपना रहे हैं। इसे अमूमन वैश्विक अनिश्चितता के खिलाफ सुरक्षा का तरीका माना जाता है।
चुघ का कहना है, हालांकि जनवरी में गोल्ड ईटीएफ में भारी निवेश देखने को मिला था, लेकिन अब ऐसा लगता है कि इक्विटी बाजार में कीमतों में सुधार के बाद कुछ निवेश फिर से इक्विटी की ओर लौट रहा है। इंडस्ट्री का कुल एयूएम 82 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो इस बात का संकेत है कि भारत में बचत का बड़ा हिस्सा अब फाइनैंशल निवेश की ओर बढ़ रहा है। फरवरी में कम वर्किंग दिनों के चलते SIP में थोड़ी कमी देखी गई, लेकिन निवेशकों का सेंटीमेंट मजबूत है और फोलियो की संख्या लगातार बढ़ रही है।