Market Outlook: आने वाले सप्ताह में भारतीय शेयर बाजार की चाल मुख्य रूप से पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव से प्रभावित रहने की संभावना है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक घटनाक्रम के साथ साथ अमेरिका की केंद्रीय बैंक नीति और महंगाई से जुड़े आर्थिक आंकड़े भी निवेशकों के रुख को प्रभावित करेंगे।
रिलिगेयर ब्रोकिंग लिमिटेड के रिसर्च प्रमुख Ajit Mishra के अनुसार यह सप्ताह घरेलू और वैश्विक स्तर पर कई महत्वपूर्ण आर्थिक घटनाओं और आंकड़ों के कारण काफी अहम रहने वाला है। उन्होंने कहा कि भू-राजनीतिक घटनाक्रम इस समय बाजार के लिए सबसे महत्वपूर्ण कारक बने हुए हैं क्योंकि इनका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ता है और वही बाजार की दिशा तय कर सकता है।
अजित मिश्रा के मुताबिक घरेलू स्तर पर निवेशकों की नजर प्रमुख मैक्रो आर्थिक संकेतकों पर रहेगी। इनमें थोक मूल्य सूचकांक यानी डब्ल्यूपीआई आधारित महंगाई दर, व्यापार संतुलन से जुड़े आंकड़े और विदेशी मुद्रा भंडार के ताजा आंकड़े शामिल हैं। इनसे देश की आर्थिक स्थिति और महंगाई के रुझान का अंदाजा लगाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि वैश्विक स्तर पर निवेशकों का ध्यान अमेरिका के केंद्रीय बैंक Federal Reserve की नीतिगत बैठक पर रहेगा। इस बैठक में ब्याज दरों को लेकर लिया जाने वाला फैसला और आर्थिक अनुमानों की घोषणा वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है। इसके साथ ही Federal Open Market Committee की आर्थिक प्रक्षेपण रिपोर्ट भी निवेशकों के लिए अहम मानी जा रही है।
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पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। इस दौरान BSE Sensex 4354.98 अंक यानी करीब 5.51 प्रतिशत गिर गया, जबकि Nifty 50 में 1299.35 अंकों यानी करीब 5.31 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
लाइव लॉन्ग वेल्थ के संस्थापक और रिसर्च एनालिस्ट Hariprasad K के अनुसार पिछले सप्ताह भारतीय शेयर बाजारों पर भारी दबाव देखने को मिला। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर जोखिम लेने की भावना कमजोर पड़ गई है। इसकी प्रमुख वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव और विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार बिकवाली रही है।
उन्होंने बताया कि 27 फरवरी के बाद से BSE Sensex में लगभग 6723 अंकों यानी करीब 8.27 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की जा चुकी है।
दरअसल फरवरी के अंत से पश्चिम एशिया में तनाव और तेज हो गया है। Israel और Iran के बीच बढ़ते टकराव ने क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ा दी है। इस संघर्ष के कारण वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम समुद्री मार्ग Strait of Hormuz में अवरोध की स्थिति बन गई है।
एनरिच मनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी Ponmudi R का कहना है कि आने वाला सप्ताह बाजार के लिए काफी उतार चढ़ाव वाला रह सकता है। उनके अनुसार बाजार की दिशा काफी हद तक पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष से जुड़े घटनाक्रम पर निर्भर करेगी।
उन्होंने कहा कि विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर बाजार की नजर रहेगी। यह वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि यहां लंबे समय तक व्यवधान बना रहता है तो वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इसका असर एशिया सहित कई देशों में महंगाई के दबाव के रूप में देखने को मिल सकता है और निवेशकों की धारणा भी कमजोर पड़ सकती है।
इसके अलावा विदेशी निवेशकों की गतिविधियां भी बाजार के लिए अहम संकेत देंगी। मार्च के पहले पखवाड़े में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से करीब 52,704 करोड़ रुपये की निकासी की है। इसके पीछे पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, रुपये में कमजोरी और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर चिंता को प्रमुख कारण माना जा रहा है।
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मोतिलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज के वेल्थ मैनेजमेंट विभाग के रिसर्च प्रमुख Siddhartha Khemka के अनुसार इस सप्ताह कई महत्वपूर्ण वैश्विक आर्थिक आंकड़े जारी होने वाले हैं। इनमें यूरोजोन की महंगाई दर, अमेरिका के रोजगार से जुड़े आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के नीतिगत फैसले शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इस सप्ताह Bank of England और European Central Bank की नीतिगत घोषणाओं के साथ साथ अमेरिका के रोजगार संबंधी आंकड़े भी निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण संकेत देंगे।