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Jane Street: जेन स्ट्रीट की ट्रेडिंग रणनीति ने भारतीय डेरिवेटिव बाजार में मचाई खलबली

भारतीय विकल्पों पर जेन स्ट्रीट का बड़ा दांव, रणनीति पर सवाल

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 22, 2024 | 9:32 PM IST

अमेरिकी ट्रेडिंग कंपनी, जेन स्ट्रीट ग्रुप, सुर्खियों में है। ऐसा माना जा रहा है कि इस कंपनी ने भारतीय विकल्पों पर सफल ट्रेडिंग करके 1 अरब डॉलर से भी ज्यादा कमा लिए हैं। खास बात ये है कि जेन स्ट्रीट ने कोई आम रणनीति इस्तेमाल नहीं की, बल्कि एक ऐसा तरीका अपनाया जिसने भारतीय बाजार के जानकारों को भी चौंका दिया।

यही वजह है कि भारत के डेरिवेटिव मार्केट, जो दुनिया में सबसे तेज गति से बढ़ रहा है, पर अब सबकी निगाहें टिक गई हैं। इस खास रणनीति को लेकर अब कोर्ट में बहस चल रही है, जिससे इस पूरे मामले पर और भी ज्यादा सुर्खियां बटोर ली हैं।

वॉल स्ट्रीट की जेन स्ट्रीट नाम की ट्रेडिंग फर्म ने अपने दो पूर्व कर्मचारियों और एक दूसरी कंपनी मिलेनियम मैनेजमेंट पर मुकदमा दायर किया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने जेन स्ट्रीट की एक खास ट्रेडिंग रणनीति चुरा ली है जो भारत के विकल्पों पर फोकस करती है। जेन स्ट्रीट का कहना है कि यह रणनीति बेहद गोपनीय और काफी मूल्यवान है। इस मामले ने वॉल स्ट्रीट पर हलचल मचा दी है क्योंकि इससे पता चलता है कि ट्रेडिंग फर्म किस तरह की गोपनीय जानकारियों का इस्तेमाल करती हैं।

भले ही जेन स्ट्रीट की खास ट्रेडिंग रणनीति के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिली है, यह मामला बताता है कि हाई-स्पीड ट्रेडिंग फर्म भारत के बाजार से किस तरह मुनाफा कमा रही हैं। पिछले दशक में भारत दुनिया का सबसे बड़ा विकल्प अनुबंधों वाला बाजार बन चुका है। इसी वजह से जेन स्ट्रीट की प्रतिस्पर्धी कंपनियां जैसे ऑप्टिवर, सिटाडेल सिक्योरिटीज, आईएमसी ट्रेडिंग और जंप ट्रेडिंग भी तेजी से भारतीय बाजार में पैर पसार रही हैं।

यह मुकदमा इस बात को भी उजागर करता है कि कैसे हाई-स्पीड ट्रेडिंग फर्म गोपनीय जानकारी का इस्तेमाल तेजी से काम करने और मुनाफा कमाने के लिए करती हैं। जेन स्ट्रीट का दावा है कि चोरी हुई रणनीति काफी मूल्यवान और गोपनीय थी, लेकिन पूर्व कर्मचारियों ने इसका गलत फायदा उठाया। फिलहाल तो यह मुकदमा शुरुआती दौर में है, लेकिन इससे हाई-स्पीड ट्रेडिंग और भारत पर इसके असर को लेकर जरूर बहस छिड़ने वाली है।

भारत में विकल्पों का बाजार “विजेता सब कुछ ले जाता है” जैसा बन गया है, यह कहना है ग्रीनलैंड इन्वेस्टमेंट मैनेजमेंट के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी अनंत जटिया का। उनकी फर्म $1 बिलियन से भी ज्यादा का निवेश संभालती है और जटिया का मानना है कि ये बाजार अब बेहद प्रतिस्पर्धी हो चुका है, यहां लड़ाई माइक्रोसेकंड से भी कम समय, यानी नैनोसेकंड में होती है। इसका मतलब है कि जो फर्म सबसे तेज जानकारी हासिल कर उस पर काम कर सकती है, वही सबसे ज्यादा मुनाफा कमा सकती है।

मुंबई के बाजार जानकार जेन स्ट्रीट की ट्रेडिंग रणनीति को लेकर अंदाजा लगा रहे हैं। इस बीच कई लोगों को चिंता है कि कंपनी का इतना मुनाफा छोटे निवेशकों की जेब से कटकर आ रहा है। गौरतलब है कि भारत में करीब 35% विकल्प कारोबार खुदरा निवेशक करते हैं।

बाजार नियमन करने वाली संस्था का अनुमान है कि 90% सक्रिय खुदरा कारोबारी डेरिवेटिव में पैसा गंवा देते हैं। इक्विरस सिक्योरिटीज के तेजस शाह का कहना है कि कोविड के बाद से डेरिवेटिव में छोटे निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है। जटिल बाजार-निर्माता रणनीतियों से ये निवेशक गुमराह हो सकते हैं।

जज ने बताया कि सुनवाई के दौरान जेन स्ट्रीट ने दावा किया था कि इस रणनीति से पिछले साल उसने करीब 1 बिलियन डॉलर कमाए। वहीं ब्लूमबर्ग की जनवरी की रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी ने पिछले साल शुद्ध कारोबार राजस्व में 10 बिलियन डॉलर से भी ज्यादा कमाई की थी।

भले ही कुछ जोखिम मौजूद हैं, भारत घरेलू और विदेशी दोनों तरह के बाजार निर्माताओं के लिए अभी भी एक आकर्षक बाजार बना हुआ है। इसकी कई वजह हैं। पहली वजह है 2014 में स्थापित हुई हाई-फ्रिक्वेंसी ट्रेडिंग करने वाली भारतीय कंपनी ग्रेविटॉन रिसर्च कैपिटल की सफलता।

दूसरी वजह है दुबई और सिंगापुर को टक्कर देने के लिए भारत का GIFT सिटी नाम का एक वित्तीय केंद्र बनाने का प्रयास। मुंबई में एएसके इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के वैभव सांघवी का कहना है कि भारत में अब मौजूद तरलता ही असल में बाजार निर्माताओं को खींचने वाली ताकत है। उनके अनुसार अमेरिका के अलावा भारत ही एक ऐसा बाजार है जो इस तरह का मौका दे सकता है। (ब्लूमबर्ग के इनपुट के साथ)

First Published : April 22, 2024 | 9:32 PM IST