भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद इक्विटी बाजारों में भारी तेजी ने प्राथमिक बाजारों में धारणा को मजबूत कर दिया है। छोटे ऋण देने वाली कंपनी आय फाइनैंस और एआई एवं एनालिटिक्स फर्म फ्रैक्टल एनालिटिक्स अगले सप्ताह अपने बहुप्रतीक्षित आईपीओ की तैयारी में लगी हैं। हालांकि इन निर्गम के आकार घटाए गए हैं। दोनों कंपनियों के आईपीओ 9 फरवरी को खुलेंगे। इनके निर्गम का आकार 1,010 करोड़ रुपये और 2,834 करोड़ रुपये हैं।
दिसंबर 2024 में आय फाइनैंस ने 1,450 करोड़ रुपये के आईपीओ के लिए आवेदन किया था। इसमें 885 करोड़ रुपये का फ्रेश इश्यू तथा 565 करोड़ रुपये की बिक्री पेशकश (ओएफएस) शामिल थी। बाद में कंपनी ने फ्रेश इश्यू का आकार घटाकर 710 करोड़ रुपये और ओएफएस का 300 करोड़ रुपये कर दिया।
इसी तरह, फ्रैक्टल एनालिटिक्स ने भी अपने आईपीओ का आकार घटा दिया है। कंपनी ने फ्रेश इश्यू का आकार पहले के 1,279 करोड़ रुपये से घटाकर 1,024 करोड़ रुपये कर दिया है। ओएफएस का आकार 3,621 करोड़ रुपये से घटाकर 1,810 करोड़ रुपये किया गया है। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि पिछले 12-18 महीनों में इक्विटी बाजारों में तेज गिरावट के बाद बाजार धारणा में बदलाव आया है।
एक निवेश बैंकर ने कहा, ‘हालांकि आईपीओ की कतार मजबूत है। कई कंपनियां इंतजार कर रही हैं। लेकिन सौदों के लिहाज से माहौल अभी भी मुश्किल बना हुआ है। आईपीओ लाने वालों को मूल्यांकन और आकार कम करना पड़ रहा है।’
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बाद धारणा में सुधार आने से अवसरों का नया दौर शुरू हुआ है। बजट के दिन गिरावट के बाद से सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में लगभग 5 प्रतिशत की तेजी आई है, जिससे जोखिम लेने की क्षमता में सुधार हुआ है।
2025 में एक रिकॉर्ड साल के बाद जनवरी में आईपीओ की रफ्तार धीमी पड़ गई। इसका कारण 3 अरब डॉलर से ज्यादा की एफपीआई निकासी के फलस्वरूप प्रमुख बाजारों में भारी बिकवाली होना था। इस महीने सिर्फ तीन मेनबोर्ड आईपीओ ही आए, जिनसे कुल मिलाकर 4,765 करोड़ रुपये जुटाए गए। यह अप्रैल 2024 के बाद से सबसे कम मासिक संग्रह था।