भारत में इस साल निवेश करने के लिए 78 प्राइवेट इक्विटी कंपनियां 24 अरब डॉलर जुटाने की कोशिश में हैं।
एक शोध रिपोर्ट की मानें तो पिछले साल 30 प्राइवेट इक्विटी कंपनियों ने 9.2 अरब डॉलर जुटाए थे, इसके मुकाबले यह लक्ष्य तीन गुना है। इसमें रियल एस्टेट फंड भी शामिल हैं।
ब्रिटेन की एसेट रिसर्च ऐंड कंसंल्टेंसी ग्रुप की कंपनी प्रेक्विन का कहना है कि पूरे एशिया भर में 117 प्राइवेट इक्विटी (पीई) कंपनियां हैं जो भारत में निवेश करने के लिए 59 अरब डॉलर फंड जुटाना चाहती हैं।
कंपनी के प्रवक्ता टिम फ्रीडमेन का कहना है, ‘हमने अपने सभी साझीदारों से बात क रके यह अनुमान लगाया है। फंड जुटाने के लिए यह हमारा ताजा आंकड़ा है।’ उनका कहना है कि वैश्विक स्तर पर प्राइवेट इक्विटी को लेकर ज्यादातर निवेशकों का सकारात्मक नजरिया है। दिसंबर 2008 में प्रेक्विन ने एक सर्वे कराया था।
इस सर्वे के मुताबिक 29 फीसदी निवेशक अपने प्राइवेट इक्विटी पोर्टफोलियों को कम समय के बजाय लंबे समय तक के लिए बढ़ाना चाहते हैं। जबकि 67 फीसदी निवेशक इसे पहले की तरह ही बनाए रखना चाहते हैं। केवल 4 फीसदी निवेशक भविष्य में प्राइवेट इक्विटी में अपने निवेश को कम करने का इरादा रखते हैं।
ग्रांट थोर्टन, स्पेशियलिस्ट एडवायजरी सर्विसेज के पार्टनर सी. जी. श्रीविद्या का कहना है, ‘वर्ष 2008 में भारत में पीई निवेश 10 अरब डॉलर तक था लेकिन निवेश के लिए जो रकम जुटाई गई थी वह निवेश के मुकाबले 2-3 गुणा ज्यादा है। हर जगह मंदी का आलम है लेकिन भारत में विकास की संभावनाएं हैं।’
आदित्य बिड़ला प्राइवेट इक्विटी की मिसाल भी ले सकते हैं। आदित्य बिड़ला गु्रप ने इस महीने से पहले ही पीई सेगमेंट में प्रवेश करने की घोषणा कर दी थी। इस साल के अंत तक उनकी योजना 20-25 करोड़ डॉलर जुटाने की है।
आदित्य बिड़ला प्राइवेट इक्विटी के प्रबंध निदेशक और सीईओ भारत बांका का कहना है, ‘हमलोगों ने पीई बिजनेस की घोषणा की है। हमलोग पिछले एक साल से इस पर काम कर रहे थे। इसके लिए हमारी बातचीत घरेलू और विदेशी लिमिटेड पार्टनर के साथ भी हो रही है। इसीलिए हमें यह पूरा भरोसा है कि हम फंड जुटा लेंगे।’
सैफ्रॉन कै पिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक के. श्रीनिवास भी इस रिर्पोट पर अपनी सहमति जताते हैं। हालांकि उनका कहना है कि इस वक्त पूरा माहौल मुश्किलों का संकेत दे रहा है।