होर्मुज को फिर से खोलने के फैसले से ईरान पलट गया है जिससे शांति वार्ता और ऊर्जा कीमतों को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। इससे निवेशकों की मुसीबतें एक बार फिर बढ़ सकती है। शनिवार को ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से अपने नियंत्रण में लेना शुरू कर दिया जिससे अनिश्चितताएं बढ़ गईं। ईरान ने अमेरिका पर संघर्ष-विराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कहा कि उसने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी जारी रखी हुई है। होर्मुज स्ट्रेट से गुज़रने की कोशिश कर रहे जहाज़ों पर गोलीबारी भी की गई है। सप्ताहांत के दौरान होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय झंडे वाले दो जहाज़ों पर गोलीबारी हुई थी।
ईरान ने पहले घोषणा की थी कि वह होर्मुज से जहाजों को निकलने की अनुमति देगा। मौजूदा घटनाक्रम ने तनाव में लगातार कमी आने की उन उम्मीदों को झटका दिया है, जिनके बल पर पिछले हफ्ते माहौल में सुधार देखा गया था।
शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे हफ्ते बढ़त देखने को मिली। इसकी वजह भू-राजनीतिक चिंताओं में कमी आने के बीच वैश्विक जोखिम की भावना को बढ़ावा मिलना था। पिछले हफ्ते बेंचमार्क निफ्टी और सेंसेक्स में करीब 1.2 फीसदी का इजाफा हुआ। उससे पिछले हफ्ते सेंसेक्स में 5.8 फीसदी और निफ्टी में 5.9 फीसदी की जबरदस्त उछाल आई थी, जो फ़रवरी 2021 के बाद से उनका सबसे बेहतर प्रदर्शन था।
अल्फानीति फिनटेक के सह-संस्थापक यू आर भट्ट ने कहा, सोमवार को बाजारों में निराशा हो सकती है और वे अपनी बढ़त गंवा सकते हैं। अगर आगे कोई प्रगति नहीं होती है तो बाजार और भी गिर सकता है। इस समय बाजारों के लिए कमाई के सीजन से ज्यादा बातचीत और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति मायने रखेगी। जब तक चौंकाने वाला कोई बड़ा घटनाक्रम नहीं होता, तब तक कमाई से बाजार में कोई खास हलचल होने की संभावना नहीं है।
भट्ट ने कहा कि निवेशकों को सावधान रहना चाहिए और मौजूदा हालात में जल्दबाजी में कोई भी कदम उठाने से बचना चाहिए। उन्होंने कहा, इन भू-राजनीतिक घटनाक्रम का अनुमान लगाना मुश्किल है और बाजार हाल के निचले स्तरों से काफी हद तक उबर चुका है। बेहतर यही होगा कि किसी स्पष्ट और निर्णायक समझौते का इंतज़ार किया जाए, भले ही इस कारण बाद में थोड़ी ऊंची कीमतों पर खरीदारी करनी पड़े।
हालांकि सोमवार को बाजार के गिरावट के साथ खुलने की संभावना है। लेकिन हालिया गिरावट के बाद मूल्यांकन में आई नरमी और चल रही बातचीत को देखते हुए गिरावट सीमित ही रहेगी। स्वतंत्र इक्विटी विश्लेषक अंबरीश बालिगा ने कहा, बाजार पिछले कारोबारी सत्र के बंद स्तर पर या थोड़ा नीचे खुल सकते हैं, लेकिन यह कोई बड़ी गिरावट नहीं होगी। पिछले कुछ दिनों से बाजार का सेंटिमेंट सकारात्मक रहा है। होर्मुज में नया शटडाउन बातचीत की एक रणनीति हो सकती है। जब तक बड़े पैमाने पर संघर्ष फिर से शुरू नहीं हो जाता, तब तक बड़ी गिरावट की संभावना कम है।
आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक ऊर्जा की कीमतों पर निर्भर करेगी। मार्सेलस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स के संस्थापक और मुख्य निवेश अधिकारी सौरभ मुखर्जी ने कहा, अगर ब्रेंट क्रूड फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच जाता है तो हमें अगले कुछ दिनों में बाजार में 2 फीसदी तक की गिरावट की उम्मीद करनी चाहिए। भले ही लड़ाई खत्म हो गई हो, लेकिन जब तक माल की आवाजाही के रास्ते बाधित रहेंगे, आर्थिक नुकसान जारी रहेगा। ऐसी खबरें हैं कि गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर को नुकसान पहुंचा है, जिसका मतलब हो सकता है कि कमी लंबे समय तक बनी रह सकती है।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के निवेश पर भी नजर रहेगी। हाल में एफपीआई शुद्ध खरीदार हो गए हैं, लेकिन वे 43,419 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल भी रहे हैं। शुक्रवार को एफपीआई 683 करोड़ रुपये के शुद्ध खरीदार रहे, वहीं देसी संस्थान 4,722 करोड़ रुपये के शुद्ध बिकवाल रहे।