facebookmetapixel
Advertisement
TCS Share: अच्छे नतीजों के बावजूद क्यों गिरा शेयर? अब खरीदना चाहिए या दूर रहें? जानें 3 ब्रोकरेज की सलाहGold and Silver Price Today: कारोबार शुरू होते ही चांदी ₹1,253 फिसली, सोना भी पड़ा नरमWipro Buyback: बायबैक की खबर से उछला Wipro का शेयर, जानिए कब है बोर्ड मीटिंगभारत का ऑनलाइन बाजार 66 अरब डॉलर पार, अब आगे क्या?होर्मुज में टैंकर शुल्क पर ट्रंप की ईरान को चेतावनी, युद्धविराम पर बढ़ा तनाव22 अरब ट्रांजैक्शन के बाद भी UPI ग्रोथ क्यों हुई धीमी?गैर जीवन बीमा प्रीमियम 9% बढ़कर 3.36 लाख करोड़ रुपये, स्वास्थ्य बीमा में तेजी का असरशबरीमला पर केंद्र की बड़ी दलील, क्या बदलेगा नियम?अमेरिका जाएगा भारतीय प्रतिनिधिमंडल, क्या होगा बड़ा व्यापार समझौता?भारत तेजी से बढ़ा रहा बिजली उत्पादन क्षमता, 235 गीगावॉट परियोजनाओं पर काम जारी

HDFC सिक्योरिटीज ने कहा, अगले साल सुस्त रिटर्न के आसार

Advertisement

2025 में मूल्यवान बाजारों में प्रवेश की चुनौती, वैश्विक कर्ज और मुद्रास्फीति की चिंताओं के बावजूद निफ्टी में 10.5% तेजी की उम्मीद

Last Updated- December 19, 2024 | 10:56 PM IST
HDFC Securities

घरेलू ब्रोकरेज फर्म एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने निवेशकों को ऊंचे मूल्यांकन के बीच कम रिटर्न की उम्मीद रखने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म ने निफ्टी के 10 साल तक लगातार अच्छा प्रदर्शन के बाद कम रिटर्न के परिदृश्य पर निवेशकों की प्रतिक्रियाओं पर चिंता जताई है।

एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी धीरज रेल्ली ने कहा, ‘सबसे बड़ी चिंता यह है कि हम पूरी तरह से मूल्यवान बाजारों के साथ 2025 में प्रवेश करने जा रहे हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कोई अवसर नहीं है, और एक परिसंपत्ति वर्ग के रूप में इक्विटी अच्छा प्रदर्शन नहीं करेंगी। मेरा मानना है कि इक्विटी भारत और वैश्विक स्तर पर अन्य परिसंपत्ति वर्गों से बेहतर प्रदर्शन करना जारी रखेंगी। फिर भी, हमें अपनी रिटर्न की अपेक्षाओं को कम करना होगा।’

रेल्ली ने कहा कि अमेरिका में अगले साल नीतिगत उथल-पुथल मुद्रास्फीतिकारी हो सकती है। उनसे निपटने के लिए मौद्रिक नीतिगत कदम अपर्याप्त साबित हो सकते हैं। रेल्ली ने कहा, ‘मौद्रिक नीतियां केवल मुद्रास्फीति के मांग पक्ष से निपट सकती हैं। अगर शुल्कों से अधिकांश वस्तुएं महंगी हो जाती हैं और लगातार भू-राजनीतिक मसले आपूर्ति पक्ष को और ज्यादा मुश्किल बनाते हैं तो इससे मुद्रास्फीति के लिए और अधिक प्रतिकूल परिस्थितियां पैदा हो सकती हैं।’

उन्होंने कहा कि बढ़ता वैश्विक कर्ज बाजारों की अन्य चिंता है। रेल्ली ने कहा, ‘वैश्विक कर्ज करीब 323 लाख करोड़ डॉलर है। यह दुनिया के जीडीपी के कई गुना से भी ज्यादा है। मेरा मानना है कि ये टिकाऊ नहीं हैं। वह भी तब, जब ब्याज दरें ऊंची हों।’एचडीएफसी सिक्योरिटीज का मानना है कि अगले साल तक निफ्टी 26,482 तक पहुंच सकता है जो मौजूदा स्तर से 10.5 फीसदी की तेजी है।

Advertisement
First Published - December 19, 2024 | 10:56 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement