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FPI Data: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने फरवरी 2026 में भारतीय शेयर बाजार में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह 17 महीनों में सबसे बड़ी मासिक निवेश राशि है और इसे भारत-अमेरिका के अंतरिम व्यापार समझौते, घरेलू बाजार में हालिया सुधार और कंपनियों की मजबूत तिमाही आय से जोड़ा जा रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि फरवरी का यह निवेश पिछले तीन महीनों की लगातार बिकवाली के बाद आया है। जनवरी में FPIs ने 35,962 करोड़ रुपये और दिसंबर में 22,611 करोड़ रुपये निकाले थे। नवंबर में भी 3,765 करोड़ रुपये का बहिर्वाह हुआ था। कुल मिलाकर, 2025 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से 1.66 ट्रिलियन रुपये (लगभग 18.9 अरब अमेरिकी डॉलर) निकाले, जिससे यह अवधि विदेशी निवेश के लिहाज से काफी चुनौतीपूर्ण रही।
पिछले साल के बहिर्वाह के पीछे वैश्विक मुद्रा बाजार में अस्थिरता, अंतरराष्ट्रीय व्यापार में तनाव, अमेरिका द्वारा संभावित टैरिफ की चिंता और शेयरों के अधिक मूल्यांकन जैसी वजहें थीं।
विशेषज्ञों के अनुसार, फरवरी का निवेश मुख्य रूप से सेकेंडरी मार्केट में हुआ, जो विदेशी निवेशकों के भरोसे में फिर से सुधार को दर्शाता है। वेंचुरा सिक्योरिटीज के हेड ऑफ रिसर्च, विनीत बोलींजार ने कहा कि यह निवेश संकेत है कि विदेशी निवेशकों ने 2025 में हुई भारी निकासी के बाद भारतीय बाजार में फिर से अवसर देखना शुरू कर दिया है।
Angel One Ltd के वरिष्ठ फंडामेंटल एनालिस्ट, जावेद खान का मानना है कि तीन मुख्य कारक इस निवेश प्रवाह को बढ़ावा दे रहे हैं। इनमें भारत और अमेरिका के बीच बढ़ती व्यापारिक सहमति, भारतीय बाजार की मूल्यांकन में सुधार और तीसरी तिमाही (Q3 FY26) में 14.7 प्रतिशत की मजबूत आय वृद्धि शामिल है। उन्होंने कहा कि ये संकेत भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास कहानी पर निवेशकों के विश्वास को दर्शाते हैं।
Groww Mutual Fund के सीईओ, वरुण गुप्ता ने भी इसी रुख की पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बाजार में निवेशकों की रुचि में बढ़ोतरी का कारण कंपनियों की आय में सुधार, मूल्यांकन में गिरावट और व्यापारिक अनिश्चितताओं में कमी के शुरुआती संकेत हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत ने हाल ही में यूरोपीय संघ और यूनाइटेड किंगडम समेत कई फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTAs) पर सहमति बनाई है, जो निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
विशेषज्ञों ने कहा कि क्षेत्रीय निवेश में विदेशी निवेशकों का रुख अलग-अलग रहा। वित्तीय और पूंजीगत वस्तु क्षेत्रों में FPIs ने बड़ी मात्रा में खरीदारी की, जबकि आईटी क्षेत्र में निवेशकों ने अपनी हिस्सेदारी घटाई। इस क्षेत्र से 10,956 करोड़ रुपये की निकासी हुई, जिसे विश्लेषकों ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े संभावित व्यवधान और हालिया “Anthropic” झटका के साथ जोड़ा।
Geojit Investments के मुख्य निवेश रणनीतिकार, वीके विजयकुमार ने बताया कि विदेशी निवेशकों ने आईटी स्टॉक्स में भारी बिक्री की है, लेकिन वित्तीय सेवाओं और पूंजीगत वस्तु क्षेत्रों में फिर से निवेश करना शुरू किया है। उनका कहना है कि यह प्रवृत्ति बाजार में संतुलन और निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं को दर्शाती है।
वित्तीय विश्लेषक खान के अनुसार, वित्त वर्ष 2027 में 15 प्रतिशत की लाभ वृद्धि हासिल करना इस समय मुख्य रूप से चौथी तिमाही के नतीजों पर निर्भर करेगा। वहीं, रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 से नीचे स्थिर रहना निवेशकों के रिटर्न के लिए एक राहत भरी खबर साबित हो सकती है।
वित्तीय सलाहकार विजयकुमार ने बताया कि विदेशी निवेशक फिलहाल उभरते बाजारों में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने से पहले स्थिति को आंकने की रणनीति अपनाएंगे। इसके बावजूद, देश की जीडीपी में सुधार की संभावनाएं और FY27 के लिए कॉर्पोरेट कंपनियों के मजबूत नतीजे मध्यम अवधि में निवेशकों के लिए सकारात्मक संकेत हैं।
दूसरी ओर, मध्य पूर्व में जारी संघर्ष ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में जोखिम भरी मुद्रा का माहौल उत्पन्न कर दिया है। इस स्थिति का प्रभाव कच्चे तेल की कीमतों और मुद्रा के उतार-चढ़ाव पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को इन कारकों पर नजर बनाए रखना आवश्यक है क्योंकि ये अगले वित्तीय फैसलों और निवेश प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं।
-पीटीआई इनपुट के साथ