पिछले कुछ महीनों में बिटकॉइन में आई तेजी ने ट्रेडरों और निवेशकों को क्रिप्टोकरेंसी की ओर आकर्षित किया। पिछले कुछ हफ्तों में आई तेजी को देखते हुए जेफरीज के वैश्विक प्रमुख (इक्विटी रणनीतिकार) क्रिस्टोफर वुड ने सोने में निवेश घटाया और अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व वाले पेंशन फंडों के अपने वैश्विक पोर्टफोलियो में बिटकॉइन को शामिल किया, जिसका गठन कैलेंडर वर्ष 2002 की तीसरी तिमाही में हुआ था। क्रिप्टोकरेंसी में गिरावट आने पर उनकी योजना इसमें अपना निवेश बढ़ाने की है।
अपने साप्ताहिक नोट ग्रिड ऐंड फियर में वुड ने लिखा है, कई सालों में पहली बार पोर्टफोलियो में हाजिर सोने के भारांक 50 फीसदी में 5 फीसदी की कमी लाई जाएगी और इसका निवेश बिटकॉइन में किया जाएगा। 20,000 डॉलर के एतिहासिक स्तर पार करने के बाद अगर बिटकॉइन में मौजूदा स्तर से बड़ी गिरावट आती है तो हमारा इरादा इस पोजीशन में और जोडऩे का होगा।
मार्च 2020 के निचले स्तर से बिटकॉइन में 474 फीसदी की भारी भरकम बढ़ोतरी हुई है और इस साल अब तक यह 214 फीसदी चढ़ा है। गुरुवार को पहली बार क्रिप्टो 23,000 डॉलर के स्तर के पार निकल गया और यह एक दिन पहले 20,000 डॉलर के स्तर पर पहुंचा था।
इसका आविष्कार 2008 मेंं हुआ और इसे 2009 में उतारा गया। विभिन्न वर्षों में क्रिप्टो करेंसी संस्थानों व खुदरा निवेशकों के लिए निवेश का विकल्प बन गया।
क्रिप्टोकरेंसी में निवेश को न तो कानूनी बनाया गया है और न ही इस पर रोक लगाई गई है। साल 2018 में आरबीआई ने क्रिप्टो भुगतान पर पाबंदी लगाई थी, जिसे मार्च में सर्वोच्च न्यायालय ने पलट दिया। केंद्रीय बैंंक ने बाद में स्पष्ट किया कि उसने भारत में क्रिप्टोकरेंसी मसलन बिटकॉइन पर पाबंदी नहीं लगाई है बल्कि विनियमित इकाइयो मसलन बैंको आदि को इससे जुड़े जोखिम से बचाने की कोशिश की है।