केंद्रीय बैंक के कदमों के कारण बाजार में आए हालिया उतारचढ़ाव ने विश्लेषकों को सतर्क कर दिया है और उनका सुझाव है कि निवेशकों को शेयर विशेष पर ही केंद्रित रहना चाहिए। उनका मानना है कि सुरक्षात्मक दांव मसलन एफएमसीजी व फार्मा जैसे क्षेत्र ऐसे अनिश्चित माहौल में निवेश के लिहाज से बेहतर बने रहेंगे।
उदाहरण के लिए जेफरीज के विश्लेषकों का कहना है कि निफ्टी-50, 15,500 का स्तर परख सकता है। अहम सवाल यह है कि बाजारों में संभावित गिरावट के दौर में कौन से शेयर सुरक्षात्मक होंगे क्योंकि ट्रेंड लगातार बदल रहा है।
जेफरीज के प्रबंध निदेशक महेश नंदूरकर ने अभिनव सिन्हा के साथ लिखी रिपोर्ट में कहा है, एफएमसीजी, पावर यूटिलिटीज और फार्मा सबसे अच्छे सुरक्षात्मक दांव होंगे। दूसरी ओर, रियल्टी, एनबीएफसी, धातु व इंडस्ट्रियल्स ज्यादा नाजुक रह सकते हैं। हालांकि नकदी निर्विवाद रूप से सुरक्षात्मक है। उन्होंने वित्तीय क्षेत्रों (एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस को हटा दिया गया है) में भारांक घटाकर अपने मॉडल पोर्टफोलियो में नकदी का आवंटन 3 फीसदी बढ़ाया है।
उनके विश्लेषण के आधार पर अक्टूबर 2021 में बाजार के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने के बाद उम्दा प्रदर्शन करने वाले कई शेयर बाद में आई गिरावट में कमजोर हुए हैं और इसका उल्टा भी देखने को मिला है। वाहन क्षेत्र, इंडस्ट्रियल्स, रियल्टी और मैटीरियल ने पिछली तेजी (जून 2022 से सितंबर 2022) में उम्दा प्रदर्शन किया है, पर जेफरीज का मानना है कि ये अब नाजुक हो सकते हैं और गिरावट के प्रति संवेदनशील भी। एनबीएफसी भी चुनौतियों का सामना कर सकती हैं क्योंकि फंड की लागत का दबाव संभावित तौर पर बैंक के मुकाबले उनकी स्थिति को कमजोर करता है।
नंदूरकर और सिन्हा की रिपोर्ट में कहा गया है, निफ्टी के अक्टूबर 2021 के सर्वोच्च स्तर के बाद से हम अभी गिरावट के चौथे दौर में हैं। हेल्थकेयर व एफएमसीजी (जो लगातार सुरक्षात्मक बने हुए हैं) को छोड़ दें तो पूरे क्षेत्र का प्रदर्शन गिरावट की अवधि में अलग-अलग रहा है। गिरावट के इस दौर में यही चीजें जारी रह सकती हैं। आईटी क्षेत्र नाजुक बना रहेगा क्योंकि राजस्व की रफ्तार के मोर्चे पर चिंता उभर सकती है। चुनिंदा पीएसयू मसलन एनटीपीसी और पावर ग्रिड भी सुरक्षात्मक श्रेणी में रहेंगी।
एक्सचेंजों पर हेल्थकेयर व एफएमसीजी सूचकांकों ने सितंबर 2022 के बाद से क्रमश: 3 फीसदी व 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ बाजारों के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया है। उच्च बीटा वाले मसलन बिजली, तेल व गैस, रियल्टी व वाहन सूचकांकों ने कमजोर प्रदर्शन किया है। इसकी तुलना में एसऐंडपी बीएसई सेंसेक्स इस अवधि में दो फीसदी से ज्यादा टूटे हैं।
विश्लेषकों ने कहा, निवेशकों ने हालांकि अनिश्चितता के बीच हेल्थकेयर शेयरों को सुरक्षात्मक दांव के तौर पर खरीदा, लेकिन एफएमसीजी शेयरों में बढ़ोतरी पाम तेल में गिरावट व कच्चे तेल में उछाल के कारण हुई। एमके ग्लोबल के विश्लेषकों ने भी रणनीति के तौर पर अपने पोर्टफोलियो को समायोजित किया है और अब सुरक्षात्मक दांव के हक में ज्यादा हैं।
उनके विश्लेषकों ने हालिया नोट में कहा है, हम अपने पोर्टफोलियो में सुरक्षात्मक शेयर लगातार जोड़ रहे हैं और इसके लिए धातु व सीमेंट से कुछ रकम निकालकर एफएमसीजी व फार्मा में लगा रहे हैं। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक कमजोर प्रदर्शन के बाद हम कुछ लार्जकैप आईटी शेयरों को अपेक्षाकृत सुरक्षात्मक पा रहे हैं।
लंबी अवधि के लिए खरीदें
विश्लेषकों को लगता है कि वैश्विक बाजार अगले कुछ महीनों में स्थिर होंगे और उनका मानना है कि ये सेंटिमेंट हमारे यहां भी दिखेंगे। उनका कहना है कि मूल्यांकन के आधार पर भी भारतीय बाजार मध्यम से लंबी अवधि के लिहाज से सकारात्मक बने रहेंगे।
इक्विनॉमिक्स रिसर्च के संस्थापक व मुख्य निवेश अधिकारी जी. चोकालिंगम ने कहा, वैश्विक बाजारों में इस स्तर से तेज गिरावट शायद ही देखने को मिलेगी और उतारचढ़ाव शायह ही एक या दो महीने से ज्यादा रहेगा। निफ्टी अभी वित्त वर्ष 24 के अनुमानित ईपीएस 929 रुपये के 18.6 गुने पर कारोबार कर रहा है, जो उचित है।
देसी बाजार में अगले साल करीब 15 फीसदी का रिटर्न मिलने की उम्मीद है। ऐसे में जोखिम ताइवान या उत्तर कोरिया में युद्ध या तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार ले जाने में ओपेक की कामयाबी होगी। प्रभुदास लीलाधर के विश्लेषकों ने आधारभूत हालात में निफ्टी का लक्ष्य 20,936 बनाए रखा है, वहीं तेजी वाले हालात में 22,918 और मंदी वाले हालात में 15,800 का लक्ष्य रखा है। प्रभुदास लीलाधर ने कहा है कि उतारचढ़ाव का मौजूदा दौर अस्थायी होगा।