facebookmetapixel
Advertisement
10%, 20% या और अधिक? इंश्योरेंस क्लेम करते वक्त कितना देना पड़ता है ‘को-पेमेंट’, एक्सपर्ट से समझें पूरा मसलाबढ़ती चीनी कीमतों के बीच सरकार का बड़ा फैसला, 15 अक्टूबर से पेराई सत्र को दी मंजूरी, कम होंगे दाम?बाजार में आज जमकर हुई बिकवाली! गुरुवार के लिए कैसे हैं संकेत? एक्सपर्ट ने दी ये सलाहम्युचुअल फंड में ज्यादा रिटर्न के पीछे भागना पड़ सकता है भारी, राधिका गुप्ता ने समझाया जोखिमआज लॉन्च होगी iPhone 18 Pro सीरीज व पहला फोल्डेबल आईफोन, जानें संभावित कीमत और कहां देख सकते इवेंटरेलवे इन 5 राज्यों में खर्च करेगा ₹10,783 करोड़, कैबिनेट से 3 बड़े प्रोजेक्ट मंजूरPF का पैसा नहीं कटा? सरकार का नया अभियान देगा राहत, जानें किन कर्मचारियों को मिलेगा लाभ और क्या हैं शर्तेंकम उतार-चढ़ाव वाले शेयरों में पैसे लगाएगा एक्सिस का नया फंड, 9 सितंबर से NFO खुलाभारत की मेजबानी में नई दिल्ली में जुटेगा ब्रिक्स कुनबा, सम्मेलन के बारे में सब कुछ आसान भाषा में समझिएस्टील एक्सचेंज इंडिया ने लौह अयस्क की आपूर्ति के लिए एनएमडीसी से किया समझौता

सीबीआई में निरीक्षक या डीएसपी स्तर पर सीधी भर्ती होनी चाहिए: संसदीय

Advertisement
Last Updated- December 09, 2022 | 2:17 PM IST
CBI

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) में निरीक्षक या पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) के पदों के लिए सीधी भर्ती का प्रावधान होना चाहिए। एक संसदीय समिति ने गुरुवार को राज्यसभा में पेश की गई अपनी रिपोर्ट में यह सिफारिश की है। कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय विभाग से संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने कहा है कि सीबीआई के पास कुल 1,025 मामले लंबित हैं, जिनमें से 66 का पांच साल बाद भी कोई निष्कर्ष नहीं निकला है।

समिति ने कहा है कि यदि जनशक्ति आवश्यकताओं का ध्यान रखा जाए तो लंबित मामलों की संख्या को प्रभावी ढंग से कम किया जा सकता है।

समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट में कहा कि सीबीआई में उपनिरीक्षक के पद से ऊपर के उम्मीदवारों की सीधी भर्ती का कोई प्रावधान नहीं है। रिपोर्ट में सिफारिश की गई है कि ‘‘पुलिस निरीक्षक/पुलिस उपाधीक्षक के रैंक में उम्मीदवारों की सीधी भर्ती का प्रावधान होना चाहिए।’’ निरीक्षक, डीएसपी और एएसपी के पद पर पदोन्नति या प्रति नियुक्ति और सीमित विभागीय प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से अलग-अलग अनुपात में भरे जाते हैं।

रिपोर्ट में प्रकाशित आंकड़ों से पता चलता है कि 31 जनवरी, 2022 तक सीबीआई के पास 1,025 मामलों की जांच लंबित थी, जिनमें से 66 मामले पांच साल से अधिक समय से लंबित है। समिति ने यह भी कहा कि, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, अभियोजन की मंजूरी सक्षम प्राधिकारी द्वारा तीन महीने के भीतर दी जानी चाहिए, जो और एक महीने की अवधि के लिए बढ़ाई जा सकती है।

Advertisement
First Published - December 9, 2022 | 1:35 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement