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पूरी तरह बदल गया ट्रेंड! क्यों पुराने लॉयल्टी प्रोग्राम्स छोड़ ‘इंस्टेंट डिजिटल रिवॉर्ड्स’ के दीवाने हो रहे युवा?

एक्सपर्ट के मुताबिक, फिनटेक और UPI के दौर में युवा ग्राहक पारंपरिक लॉयल्टी प्रोग्राम्स के बजाय तुरंत मिलने वाले और पर्सनलाइज्ड डिजिटल रिवॉर्ड्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- May 30, 2026 | 2:18 PM IST

Digital Rewards Trend: भारत में डिजिटल क्रांति और फिनटेक ऐप्स के आने के बाद न सिर्फ लोगों के पेमेंट करने का तरीका बदला है, बल्कि उनके शॉपिंग और रिवॉर्ड्स पाने के तौर-तरीकों में भी एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। आज का युवा कंज्यूमर किसी भी चीज के लिए लंबा इंतजार करने के मूड में नहीं है। यही वजह है कि देश में ‘पारंपरिक लॉयल्टी प्रोग्राम्स’ धीरे-धीरे अपनी चमक खो रहे हैं और उनकी जगह ‘इंस्टेंट और डिजिटल-फर्स्ट रिवॉर्ड्स’ लेते जा रहे हैं। ब्रांड्स और कंपनियों के लिए अब अपने ग्राहकों को बांधे रखने का यह सबसे बड़ा हथियार बन चुका है।

बता दें कि ‘पारंपरिक लॉयल्टी प्रोग्राम’ एक पुराना तरीका है जिसमें ग्राहक को हर खरीदारी पर पॉइंट्स मिलते हैं, जिन्हें लंबे समय तक जमा करने के बाद ही कोई इनाम या छूट मिलती है।

इस बदलते दौर और कंज्यूमर्स की नई मानसिकता पर बात करते हुए Gyftr के फाउंडर और CEO अरविंद प्रभाकर कहते हैं, “आज के युवा ग्राहक पेमेंट करने, खरीदारी करने और एंटरटेनमेंट आदि के लिए तुरंत मिलने वाले डिजिटल अनुभवों के आदी हो चुके हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि उन्हें मिलने वाले रिवॉर्ड्स भी बिना किसी झंझट के तुरंत मिलें और उनका इस्तेमाल करना आसान हो।”

युवाओं को क्यों नहीं पसंद आ रहे पुराने लॉयल्टी प्रोग्राम्स?

पिछले कुछ सालों में जेन जेड (Gen Z) और मिलेनियल्स की खरीदारी और खर्च करने की क्षमता में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। यह ऐसी पीढ़ी है जो हर काम में स्पीड, सुविधा और तुरंत मिलने वाले फायदे को प्राथमिकता देती है। 

इसी बदलाव की ओर इशारा करते हुए प्रभाकर बताते हैं, “पारंपरिक लॉयल्टी प्रोग्राम्स की सबसे बड़ी समस्या यह है कि इनमें रिवॉर्ड मिलने में काफी समय लग जाता है। इसके अलावा, उन्हें रिडीम करने की प्रक्रिया भी अक्सर मुश्किल होती है और ग्राहकों के पास विकल्प भी सीमित होते हैं। इसके मुकाबले डिजिटल रिवॉर्ड्स ग्राहकों को तुरंत फायदा, आसान अनुभव और उनकी पसंद के मुताबिक ज्यादा उपयोगी विकल्प दिलाते हैं।”

आज का युवा ग्राहक खरीदारी करने के बाद महीनों तक रिवॉर्ड पॉइंट्स जमा होने का इंतजार नहीं करना चाहता। वह चाहता है कि खरीदारी के तुरंत बाद उसे कोई कैशबैक, वाउचर या दूसरा फायदा मिल जाए। मोबाइल स्क्रीन पर तुरंत मिलने वाला रिवॉर्ड उसे ज्यादा आकर्षित करता है। खासकर जेन जेड की इस सोच ने कंपनियों को अपने लॉयल्टी और रिवॉर्ड प्रोग्राम्स की रणनीति बदलने के लिए मजबूर कर दिया है।

प्रभाकर के मुताबिक, जेन जेड ने ब्रांड्स की सोच में बड़ा बदलाव लाया है। उनका कहना है कि अब कंपनियां सभी ग्राहकों के लिए एक जैसे रिवॉर्ड्स देने के पुराने तरीके से आगे बढ़ रही हैं। इसकी जगह वे ग्राहकों की पसंद, जरूरत और व्यवहार को समझकर उन्हें ज्यादा पर्सनलाइज्ड और उनके लिए काम के रिवॉर्ड्स देने पर जोर दे रही हैं। 

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UPI और फिनटेक ऐप्स ने कैसे बदली ग्राहकों की उम्मीदें?

भारत में इंस्टेंट रिवॉर्ड्स की बढ़ती लोकप्रियता के पीछे UPI, डिजिटल वॉलेट्स और फिनटेक ऐप्स की बड़ी भूमिका है। इन तकनीकों ने ग्राहकों के लेनदेन करने के तरीके और उनकी उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है। अब लोग हर सर्विस में तेजी, आसान अनुभव और तुरंत मिलने वाला फायदा चाहते हैं। यही वजह है कि रफ्तार और सुविधा आज के डिजिटल बाजार की सबसे बड़ी जरूरत बन गई है।

इस बदलाव में फिनटेक की भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रभाकर कहते हैं, “UPI, डिजिटल वॉलेट्स और फिनटेक ऐप्स ने स्पीड, सुविधा और डिजिटल लेनदेन को लेकर ग्राहकों की उम्मीदों को पूरी तरह बदल दिया है।” 

यही वजह है कि अब ग्राहक खरीदारी के बाद अलग से कूपन या रिवॉर्ड मिलने का इंतजार नहीं करना चाहता। वह चाहता है कि रिवॉर्ड्स उसकी पूरी पेमेंट यात्रा का ही हिस्सा हों। दूसरे शब्दों में, जैसे ही पेमेंट सफल हो, उसी समय कैशबैक, डिस्काउंट या कोई दूसरा फायदा भी तुरंत मिल जाए।

लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ तुरंत रिवॉर्ड दे देना ही ग्राहकों को लंबे समय तक किसी ब्रांड से जोड़े रखने के लिए पर्याप्त है? इस पर अरविंद प्रभाकर का जवाब ‘नहीं’ है। उनके अनुसार, ग्राहकों को बनाए रखने के लिए सिर्फ स्पीड नहीं, बल्कि पर्सनलाइजेशन भी उतना ही जरूरी है।

वे कहते हैं, “ग्राहकों की पसंद और जरूरतों के मुताबिक रिवॉर्ड्स देना बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन इसके साथ रफ्तार भी बनी रहनी चाहिए। जो ब्रांड्स पर्सनलाइजेशन और स्पीड, दोनों के बीच सही संतुलन बना पाएंगे, वही ग्राहकों का भरोसा और वफादारी सबसे ज्यादा हासिल कर सकेंगे।”

आने वाले 3 से 5 सालों में कैसा होगा रिवॉर्ड्स का भविष्य?

डिजिटल रिवॉर्ड्स की दुनिया में बदलाव का यह दौर अभी शुरुआत भर है। आने वाले सालों में नई तकनीकें इस पूरे इकोसिस्टम को और अधिक स्मार्ट, तेज और सुविधाजनक बनाने वाली हैं। इसके भविष्य पर बात करते हुए प्रभाकर कहते हैं, “अगले 3 से 5 वर्षों में डिजिटल रिवॉर्ड्स का इकोसिस्टम और ज्यादा तेज, रियल-टाइम और लोगों की रोजमर्रा की डिजिटल गतिविधियों का स्वाभाविक हिस्सा बन जाएगा।” यानी रिवॉर्ड्स अलग से मिलने वाली सुविधा नहीं रहेंगे, बल्कि डिजिटल अनुभव का अभिन्न हिस्सा बन जाएंगे।

इस भविष्य को आकार देने में नई तकनीकों की अहम भूमिका होगी। प्रभाकर के मुताबिक, कंपनियां अब ग्राहकों को बेहतर अनुभव देने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं।

वे कहते हैं, “AI और कंज्यूमर डेटा इनसाइट्स की मदद से ग्राहकों को उनकी पसंद के मुताबिक रिवॉर्ड्स देना आसान हो रहा है। इसके साथ ही गेमिफिकेशन, यानी रिवॉर्ड्स को ज्यादा रोचक और इंटरैक्टिव बनाने का चलन भी तेजी से बढ़ रहा है।” इससे साफ है कि आने वाले समय में वही ब्रांड्स आगे रहेंगे जो ग्राहकों की जरूरतों को समझकर उन्हें तुरंत, व्यक्तिगत और आकर्षक तरीके से रिवॉर्ड्स दे पाएंगे।

First Published : May 30, 2026 | 2:13 PM IST