देश में महत्त्वाकांक्षी टीकाकरण अभियान शुरू होने के बाद, कोविड-19 टीके का निर्यात भी अब दो हफ्ते में शुरू होने की संभावना है। सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अदार पूनावाला ने कहा कि इसके अलावा कंपनी अगले दो महीने में नोवावैक्स टीका बनाने का काम भी शुरू करने की तैयारी में है। अदार पूनावाला ने कहा कि टीके का निर्यात अगले दो हफ्तों में शुरू हो सकता है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्यात स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के बाद ही होगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि सीरम इंस्टीट्यूट अगले दो महीनों में यहां नोवावैक्स टीका बनाना शुरू कर देगा।
सीरम इंस्टीट्यूट नोवावैक्स के साथ साझेदारी भी कर रहा है और अब यह यहां उसके निर्माण की तैयारी भी कर रहा है। पूनावाला ने कहा, ‘हम अब से करीब दो महीने में नोवावैक्स टीका तैयार करने का काम शुरू कर सकते हैं। कंपनी अब तैयारी करने के साथ ही जरूरी नियामकीय प्रोटोकॉल आदि पर काम कर रही है।’ अमेरिका में नोवावैक्स टीके का परीक्षण चल रहा है और भारत में ब्रिज ट्रायल होगा।
16 जनवरी को दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान की शुरुआत हुई जिसमें सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के कोविशील्ड टीके और भारत बायोटेक के कोवैक्सीन टीके दिए जाने हैं। राष्ट्रीय कोविड-19 टीकाकरण के पहले चरण के लिए दोनों कंपनियां केंद्र को टीकों की 1.6 करोड़ खुराक की आपूर्ति कर रही हैं। वहीं दोनों कंपनियां जल्द ही 4.9 करोड़ खुराक की आपूर्ति और भी करेंगी। हालांकि, अभी तक इसके लिए कोई खरीद समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किए गए हैं।
सूत्रों के मुताबिक पहले चरण में सीरम इंस्टीट्यूट ने 1.1 करोड़ खुराक की आपूर्ति की है और जल्द ही 4.5 करोड़ खुराक की आपूर्ति सरकार को की जाएगी। पूनावाला ने कहा है कि वह भारत सरकार को 10 करोड़ खुराक की आपूर्ति 200 रुपये प्रति खुराक के हिसाब से करेंगे। भारत बायोटेक ने भी अभी के लिए करीब 55 लाख खुराक की आपूर्ति की है और सरकार की जरूरतों के हिसाब से 45 लाख खुराक की आपूर्ति की जाएगी।
भारत में शुरू में 3 करोड़ स्वास्थसेवा कर्मियों और अग्रिम पंक्ति के कामगारों को टीका लगाया जा रहा है और कुल मिलाकर लगभग 30 करोड़ लोगों (अन्य बीमारियों से भी ग्रसित वरिष्ठ नागरिकों सहित) को टीका लगाने का लक्ष्य है। इसके बाद यह टीका निजी बाजार में उपलब्ध होगा जहां लोग खुद को टीका लगाने के लिए खरीदने का विकल्प चुन सकते हैं।
पहले दो चरणों के लिए केंद्र को टीके की 6 करोड़ खुराक की जरूरत होगी। पहले चरण में लगभग एक महीने का समय लगने की संभावना है जिस दौरान 1 करोड़ स्वास्थ्यकर्मियों को टीका लगाया जाएगा और उसके बाद लगभग 2 करोड़ अग्रिम पंक्ति के कामगारों को टीका लगाया जाएगा। इस प्रकार भारत स्थानीय आपूर्ति के मामले में आरामदायक स्थिति में है क्योंकि सीरम इंस्टीट्यूट ने कोविशील्ड के लगभग 8.9 करोड़ खुराक तैयार रखे हैं। ऐसे में अगले दो हफ्तों में निर्यात शुरू हो सकता है।
सीरम इंस्टीट्यूट और भारत बायोटेक दोनों ने विदेश में करार किया है चाहे वह गावी-कोवैक्स या फिर ब्राजील, बांग्लादेश आदि जैसे देशों के लिए हो। पहले से ही मंजूरी मिले दो टीकों के अलावा, जायडस कैडिला के डीएनए-प्लाज्मिड टीका जाइकोव-डी और गमालेया नैशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ एपिडेमियोलॉजी एंड माइक्रोबायोलॉजी द्वारा तैयार स्पूतनिक-वी को भी मंजूरी मिल गई है कि इनका तीसरे चरण का परीक्षण शुरू किया जाए। डॉ रेड्डीज लैबोरेट्रीज ने शनिवार को बताया कि स्पूतनिक वी का 1500 लोगों पर तीसरे चरण का परीक्षण किया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ भारत में 30,000 वॉलंटियर पर जायडस कैडिला तीसरे चरण के प्रभाव का परीक्षण करेगी। इन परीक्षणों के परिणाम मार्च के आसपास आने की उम्मीद है और स्वास्थ्य मंत्रालय ने पहले ही संकेत दिया है कि जल्द ही इन उम्मीदवारों के तैयार होने के बाद आपातकालीन इस्तेमाल के अधिकार दिए जा सकते हैं। मार्च तक भारत में कम से कम चार टीके के आंकड़े आने की संभावना है और सरकार इसके मुताबिक ही खरीद का आदेश दे सकती है।