अक्टूबर में ग्रामीण के मुकाबले अधिक रही शहरी मांग

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 11:23 PM IST

बिजोम की ओर से जारी किए गए आंकड़ों से पता चलता है कि अक्टूबर महीने में घरेलू उपभोग के सामानों की मांग ग्रामीण इलाकों के मुकाबले शहरों में अधिक रही। ये आंकड़े एक महीने में आई वृद्घि को लेकर जारी किए गए हैं।
पिछले महीने ग्रामीण मूल्य की वृद्घि 5.2 फीसदी अधिक रही जबकि शहरी मांग की वृद्घि 6.1 फीसदी अधिक रही।
अक्टूबर महीने में उपभोक्ता सामानों की बिक्री सितंबर महीने के मुकाबले 5.4 फीसदी अधिक रही। ऐसा इसलिए हुआ कि दीवाली से पहले छोटी छोटी दुकानों (मॉम ऐंड पॉप स्टोर) ने अपने स्टॉक में वृद्घि की। यह चालू किराना दुकानों पर हुई मासिक बिक्री में भी नजर आता है जो सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में 7.9 फीसदी अधिक रही।    सालाना आधार पर एफएमसीजी की बिक्री मूल्य वृद्घि अक्टूबर महीने में 21.3 फीसदी अधिक रही।
बिजोम में मुख्य वृद्घि और इनसाइट अधिकारी अक्षय डीसूजा ने कहा, ‘केवल घरेलू देखभाल की चीजों को छोड़कर लगभग सभी उत्पादों में एफएमसीजी सामान की खपत में सालाना आधार पर अच्छी वृद्घि दर्ज की गई है। हमें दीवाली तक विभिन्न उत्पादों विशेष कर जिंसों जैसे कि पैकेटबंद तेल, गेहूं का आटा, चावल आदि की बिक्री में लगातार मजबूती नजर आई। ऐसा इसलिए हुआ कि भारतीय परिवारों ने त्योहार से पहले अपने घरों में इन सामानों को एकत्रित किया।’
उन्होंने कहा, ‘त्योहारी मौसम के दौरान बिक्री में दर्ज की गई यह मजबूती शहरी और ग्रामीण भारत में समान रूप से नजर आई। त्योहारों के दौरान उपभोक्ता सामाजिक तौर पर अधिक मेलजोल की तैयारी करते हैं।’   बिजोम ने बिक्री में समग्र वृद्घि का श्रेय सीजन से पहले जिंस उत्पादों की मजबूत मांग को दिया है। जिंसों की मांग सितंबर के मुकाबले अक्टूबर में 16.3 फीसदी अधिक रही। एक ओर जहां कन्फेक्शनरी की मांग में मासिक आधार पर 18 फीसदी की कमी आई वहीं इस दौरान भारतीय मिठाई की मांग बढ़ गई।
पेय पदार्थों की बिक्री में 3.9 फीसदी की वृद्घि हुई।
अक्टूबर महीने में जिन श्रेणियों की बिक्री में कमी आई है उनमें घरेलू देखभाल की वस्तुओं में 8.4 फीसदी, व्यक्तिगत देखभाल की वस्तु में 3.1 फीसदी और पैकेटबंद खाद्य में 11 फीसदी की कमी आई है। एचयूएल के सीएमडी संजीव मेहता ने निवेशकों से कहा कि शहरी मांग जो पहले शिथिल पड़ गई थी अब जोर पकडऩे लगी है और आवाजाही में वृद्घि होने के कारण इसमें सुधार जारी रहने की उम्मीद है।
उन्होंने कहा, ‘अगले कुछ महीने मांग की बेहतर समझ के लिए महत्त्वपूर्ण साबित होंगे।’
एचयूएल में मुख्य वित्त अधिकारी रीतेश तिवारी ने भी निवेशकों से कुछ इसी स्तर पर बात करते हुए कहा कि मांग में सुधार के लिए कुछ कारणों में पहला है आर्थिक गतिविधियों का सामान्यीकारण, दूसरा, सर्दी का आरंभ और अंतिम है उपभोक्ता मांग पर मुद्रास्फीति का प्रभाव।
 

First Published : November 21, 2021 | 11:50 PM IST