स्टील, सीमेंट के दाम ने बढ़ाई निर्माण लागत

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 5:13 AM IST

निर्माण की दो प्रमुख सामग्रियों स्टील और सीमेंट के दाम बढ़ गए हैं। इससे राजमार्गों के साथ रियल एस्टेट परियोजनाओं के निर्माण लागत पर इसका साया पड़ रहा है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के एक अधिकारी ने कहा, ‘सड़कों के मामले में ज्यादा इस्तेमाल बिटुमन का होता है। ऐसे में इसकी लागत पर बहुत ज्यादा असर नहीं पड़ेगा। लेकिन जहां तक पुलों की बात है, इसके निर्माण में सीमेंट और स्टील के  दाम का बहुत ज्यादा असर होता है।’ बहरहाल अधिकारी ने यह अनुमान नहीं बताया कि लागत कितनी बढ़ेगी और कहा कि यह विभिन्न मामलों में अलग अलग हो सकता है।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय टोलिंग नीति के तहत बड़े पुलों और ढांचों का टोल 10 गुना ज्यादा वसूलता है। अनुमान के मुताबिक भारतमाला परियोजना के तहत सड़क निर्माण की मौजूदा प्रति किलोमीटर लागत करीब 15 से 20 करोड़ रुपये है। इससे पता चलता है कि एक किलोमीटर निर्माण की औसत लागत 150 से 200 करोड़ रुपये है। बहरहाल कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ढांचे की लागत बहुत ज्यादा डिजाइन के चयन पर निर्भर होती है। पुलों की लागत केबल पर भी निर्भर होती है और हिमालय के दुर्गम क्षेत्रों में लागत बहुत ज्यादा बढ़ जाती है।
क्रिसिल इन्फ्रास्ट्रक्चर एडवाइजरी के डायरेक्टर और प्रैक्टिस लीडर, ट्रांसपोर्ट ऐंड लॉजिस्टिक्स जगन्नारायण पद्मनाभन ने कहा, ‘बुनियादी ढांचा और सड़क परियोजनाओं के निर्माण की विभिन्न अवधि होती हैं और इस तरह से जिन परियोजनाओं पर शुरुआती काम हुआ है, उन पर असर ज्यादा होगा और यह 10-15 प्रतिशत की सीमा में हो सकता है।’
सिर्फ सड़क परियोजनाओं पर ही नहीं, बल्कि रियल एस्टेट परियोजनाओं पर भी लागत बढऩे की आंच आ रही है।
हीरानंदानी कम्युनिटीज के प्रबंध निदेशक निरंजन हीरानंदानी ने कहा, ‘स्टील व सीमेंट के दाम बढऩे से निर्माण लागत में 4 से 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।’
बहरहाल कुछ रियल्टी कंपनियों का कहना है कि असर बहुत ज्यादा नहीं होगा।
सनटेक रियल्टी के चेयरमैन कमल खेतान ने कहा, ‘बिक्री मूल्य 15,000 से 18,000 रुपये प्रति वर्गफुट है। ऐसे में सीमेंट और स्टील के दाम बढऩे से 100 से 150 रुपये की बढ़ोतरी कोई बड़ा मसला नहीं है।’  
स्टील की कीमत पिछले साल के 35,000 रुपये प्रति टन की तुलना में बढ़कर 65,600 रुपये प्रति टन पहुंच गई है। वहीं सीमेंट की कीमत 280 रुपये बोरी से बढ़कर 420 रुपये बोरी पहुंच गई है। इंडिया रेटिंग्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू हॉट रोल्ड कॉयल (एचआरसी) की मुंबई में कीमत 2.5 एमए से 8 एमएम ग्रेड में मासिक आधार पर 17 प्रतिशत और पिछले साल की तुलना में अप्रैल के मध्य में 66 प्रतिशत बढ़कर 63,400 रुपये प्रति टन पहुंच गई है।
वैश्विक एचआरसी बाजार में तेजी और अंतिम उपभोक्ता की ओर से मांग बढऩे के कारण घरेलू फ्लैट स्टील की कीमत बढ़ी है। कम अवधि में निर्यात की ज्यादा संभावना और आयात का जोखिम कम होने की वजह से कीमतें ज्यादा बनी हुई हैं। बहरहाल कोविड की लहर के कारण कीमतों को अस्थायी झटका लग सकता है। इसी तरह से घरेलू रेबार की कीमत अप्रैल 2021 के मध्य में 53,000 रुपये थी, जो पिछले महीने से 3,500 रुपये ज्यादा है। वहीं अंतरराष्ट्रीय रेबार की कीमत उल्लेखनीय रूप से बढ़ी है और अप्रैल, 2021 के मध्य में यह 890 डॉलर पहुंच गया है, जो पिछले महीने की तुलना में 145 रुपये ज्यादा है।
निर्माण कंपनियों का आरोप है कि सीमेंट कंपनियां कार्टेल बनाकर कीमत बढ़ा रही हैं, जिससे उनका मुनाफा बढ़ सके। उनका यह भी आरोप है कि सरकार निर्माण उद्योग और जनता के हितों की रक्षा के लिए कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

First Published : May 3, 2021 | 11:36 PM IST