सोनिया बनीं रहेंगी अंतरिम अध्यक्ष

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:03 AM IST

सोमवार को गांधी परिवार के सदस्यों को इन आरोपों के खिलाफ आक्रामक तरीके से अपना बचाव करना पड़ा कि उन्होंने पार्टी को नेतृत्व प्रदान करने में लापरवाही बरती है साथ ही उन्होंने नेताओं को कांग्रेस का अनुशासन एवं गरिमा बनाए रखने के लिए अपनी बातें पार्टी के मंच पर रखने की नसीहत दी और कहा कि किसी को भी पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सोनिया गांधी छह महीने तक अंतरिम अध्यक्ष बनी रहेंगी जब तक कि अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) का सत्र कांग्रेस अध्यक्ष का चयन या चुनाव करने के लिए आयोजित नहीं किया जाता। कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सात घंटे की बैठक में कई नेताओं ने राहुल गांधी को पार्टी की अध्यक्षता फिर से स्वीकारने को कहा। हालांकि उन्होंने सुझाव दिया कि अंतरिम अध्यक्ष को मदद और सुझाव देने के लिए एक समिति का गठन किया जा सकता है जो सामूहिक नेतृत्व के हिस्से के तौर पर रहेगा।
सीडब्ल्यूसी की बैठक कांग्रेस के 23 शीर्ष नेताओं, पूर्व मुख्यमंत्री, पूर्व केंद्रीय मंत्रियों और अन्य लोगों के द्वारा हस्ताक्षर किए गए पत्र के लीक होने के बीच बुलाई गई  जिसमें अंतरिम अध्यक्ष से पार्टी चलाने के लिए ‘पूर्णकालिक’ और ‘सक्रिय’ नेता को जिम्मेदारी सौंपने की बात कही गई थी। पत्र में किसी का वैकल्पिक नाम नहीं दिया गया था और न ही इसमें गांधी परिवार के पार्टी का नेतृत्व करने के दावे को चुनौती दी गई थी। इस पत्र में कहा गया कि कांग्रेस पार्टी, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से संघर्ष करने में सक्रिय होने के बजाय प्रतिक्रियाशील ज्यादा है। इस पत्र में ज्यादा सक्रिय नेतृत्व को सामने लाने का सुझाव दिया गया था। कांग्रेस नेतृत्व ने दमदार तरीके से इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी। सीडब्ल्यूसी द्वारा पारित एक प्रस्ताव में कहा गया है कि समय की मांग सोनिया और राहुल गांधी के हाथों और प्रयासों को हर संभव तरीके से मजबूत करने की है और इस महत्त्वपूर्ण मोड़ पर पार्टी एवं इसके नेतृत्व को कमजोर करने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती है।
सीडब्ल्यूसी की बैठक शुरू होने के साथ ही सोनिया ने पद छोडऩे की पेशकश की और कहा कि सीडब्ल्यूसी नया अध्यक्ष चुनने के लिए प्रक्रिया आरंभ करे। इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कुछ अन्य नेताओं ने उनसे आग्रह किया कि वह पद पर बनी रहें। सोनिया को पत्र लिखने वाले नेताओं पर ‘भाजपा के साथ साठगांठ’ करने के आरोप से जुड़ी राहुल गांधी की एक कथित टिप्पणी की खबर आने और वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल के मोर्चा खोलने के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया।
 हालांकि बाद में पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राहुल गांधी ने ऐसा कोई बयान नहीं दिया। खबरों में कहा गया था कि राहुल गांधी की कथित टिप्पणी के बाद वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यह आरोप साबित होने पर वह पार्टी से इस्तीफा दे देंगे। हालांकि बाद में आजाद ने भी कहा कि राहुल ने सीडब्ल्यूसी की बैठक के भीतर या बाहर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं की। आजाद ने ट्वीट किया, ‘बैठक में मैंने सिर्फ यह कहा था कि कल कांग्रेस के कुछ लोगों ने कहा था कि हमने भाजपा के समर्थन पर ऐसा किया। इस संदर्भ में मैंने कहा, ‘यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे कुछ साथियों (सीडब्ल्यूसी के बाहर के) ने हम पर भाजपा के साथ साठगांठ का आरोप लगाया और अगर वे लोग यह साबित कर दें तो मैं इस्तीफा दे दूंगा।’
सीडब्ल्यूसी की बैठक से एक दिन पहले रविवार को पार्टी में उस वक्त नया सियासी तूफान आ गया था जब पूर्णकालिक एवं जमीनी स्तर पर सक्रिय अध्यक्ष बनाने और संगठन में ऊपर से लेकर नीचे तक बदलाव की मांग को लेकर सोनिया गांधी को 23 वरिष्ठ नेताओं की ओर से पत्र लिखे जाने की जानकारी सामने आई। (साथ में एजेंसियां)

First Published : August 24, 2020 | 10:50 PM IST