चिकित्सा पर्यटन के लिए अब आयुष वीजा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 7:42 PM IST

पारंपरिक चिकित्सा में चिकित्सा पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए भारत आयुष उपचार का लाभ उठाने के लिए देश की यात्रा करने वालों को विशेष वीजा की पेशकश करने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को गुजरात के गांधीनगर में आयुष पर आयोजित वैश्विक व्यापार कार्यक्रम में यह घोषणा की।
राज्य की राजधानी में महात्मा मंदिर में तीन दिवसीय वैश्विक आयुष निवेश और नवाचार शिखर सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मोदी ने कहा कि सरकार जल्द ही वैश्विकबाजार में गुणवत्ता वाले आयुष उत्पादों के मानकीकरण और प्रमाणीकरण के लिए एक आयुष चिह्न जारी करेगी।
कार्यक्रम में मोदी ने कहा कि हम औषधीय पौधों के लिए किसानों को बेहतर रूप से व्यवस्थित आपूर्ति शृंखलाओं से जोड़कर इस दिशा में काम कर रहे हैं, जो उन्हें सशक्त करेगा और रोजगार के अवसर उपलब्ध कराएगा। इसके अलावा यह आयुष चिह्न, भारत में निर्मित उत्पादों को सुशोभित करेगा और उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों का प्रतीक होगा। आयुष वीजा श्रेणी आयुष से संबंधित उपचार के लिए लोगों के आवागमन में आसानी को बढ़ाएगी। मोदी के अलावा मॉरीशस के प्रधानमंत्री प्रविंद कुमार जगन्नाथ और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयसिस भी इस मौके पर उपस्थित थे। इसमें शिरकत करने वाले अन्य लोगों में केंद्र और राज्य के मंत्री, विधायक, राजदूत, विदेशी गणमान्य, निवेशक और उद्योग विशेषज्ञ शामिल थे।
आयुष, जो आयुर्वेद, योग, प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सिद्ध और होम्योपैथी को मिलाकर बना है, के संबंध में हाल ही में गठित आयुष निर्यात संवर्धन परिषद के लिए गणमान्य व्यक्तियों के साथ मोदी द्वारा एक समर्पित पोर्टल का शुभारंभ भी किया गया है।
मानकीकरण चिह्न दिए जाने से पहले आयुष उत्पादों की जांच के लिए प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। मोदी ने कहा ‘पारंपरिक चिकित्सा ने केरल में पर्यटन को बढ़ाने में मदद की। यह ताकत पूरे भारत में, भारत के कोने-कोने में है। ‘हील इन इंडिया’ इस दशक का एक बड़ा ब्रांड बन सकता है। आयुर्वेद, यूनानी, सिद्ध आदि पर आधारित स्वास्थ्य केंद्र बहुत लोकप्रिय हो सकते हैं।’
इसके अलावा सरकार पारंपरिक औषधीय उत्पादों के स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देने और अनुसंधान को प्रोत्साहित करने के लिए आयुष पार्कों का नेटवर्क भी बनाने वाली है। मोदी ने औषधीय पौधों की खेती करने वाले किसानों को आयुष उत्पाद बनाने वाली कंपनियों से जोडऩे के लिए सरकार द्वारा आयुष ई-मार्केट पोर्टल के आधुनिकीकरण और विस्तार पर काम करने के संबंध में भी बात की। आयुष के तहत पारंपरिक औषधियों के क्षेत्र के विकास के संबंध में बात करते हुए मोदी ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले, जहां यह क्षेत्र तीन अरब अमेरिकी डॉलर से भी कम का था, आज बढ़कर 18 अरब अमेरिकी डॉलर से भी ज्यादा का हो गया है। उन्होंने कहा कि आने वाले वर्षों मुझे आयुष के विकास की उम्मीद लग रही है।
मोदी ने कहा कि पारंपरिक चिकित्सा क्षेत्र में स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने अखिल भारतीय आयुर्वेद संस्थान द्वारा विकसित एक इन्क्यूबेशन केंद्र भी स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि आज स्टार्टअप के बीच यूनिकॉर्न का युग है। अकेले 2022 में ही अब तक देश में 14 स्टार्टअप यूनिकॉर्न क्लब में शामिल हो चुके हैं। मुझे विश्वास है कि जल्द ही आयुष स्टार्टअप से यूनिकॉर्न उभरेंगे। इससे पहले मंगलवार को मोदी, जगन्नाथ और घेब्रेयसिस ने भावी डब्ल्यूएचओ ग्लोबल सेंटर फॉर ट्रेडिशनल मेडिसिन की आधारशिला रखी थी, जिसे संगठन के महानिदेशक ने इस क्षेत्र के लिए खेल का रुख बदलने वाला करार दिया था। अगले वर्ष, जब डब्ल्यूएचओ 75 वर्ष का हो जाएगा और भारत अपनी स्वतंत्रता के 75वें वर्ष का जश्न मनाएगा, के संबंध में टिप्पणी करते हुए घेब्रेयसिस ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने प्रस्ताव दिया है कि हम गुजरात में संयुक्त रूप से पारंपरिक चिकित्सा पर  वार्षिक अंतरराष्ट्रीय बैठक का आयोजन रकें। इसलिए पारंपरिक चिकित्सा के लिए गुजरात एक तीर्थस्थल होगा और हमें यही लगता है, जिस पर मैं सहमत हूं।

First Published : April 21, 2022 | 12:12 AM IST