सरकार जल्द ही एक राष्ट्रीय लाजिस्टिक्स नीति जारी करेगी। देश भर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक माल के आसानी से आवागमन को बढ़ावा देने के लिये यह नीति लाई जाएगी। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बुधवार को जानकारी दी। विशेष सचिव (लाजिस्टिक्स) पवन कुमार अग्रवाल ने कहा कि नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसे सभी केंद्रीय मंत्रालयों और अन्य पक्षकारों के साथ व्यापक विचार विमर्श के साथ तैयार किया गया है। उन्होंने कहा, ‘विचार विमर्श की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है। अब इस पर केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी लेने की जरूरत है। यह जल्द ही जारी होगी।’
अग्रवाल ने कहा कि इस लाजिस्टिक्स नीति का मकसद 5 साल में देश में लाजिस्टिक की लागत को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 13 प्रतिशत से कम करके आठ प्रतिशत पर लाना है। उन्होंने कहा कि लाजिस्टिक नीति के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए एक व्यापक संस्थागत व्यवस्था को स्थापित किया जा रहा है। नीति के प्रभावी समन्वय और क्रियान्वयन के लिये एक राष्ट्रीय लाजिस्टिक्स परिषद सेंट्रल एडवाइजरी कमेटी आन लाजिस्टिक्स और एक सचिवों के प्राधिकृत समूह बनाए जाने की योजना है। राज्यों के स्तर पर नीति के समग्र विकास को लेकर इस व्यवस्था में राज्य स्तरीय लाजिस्टिक्स समन्वय समिति (एसएलसीसी) भी बनाई जाएगी। उन्होंने कहा कि एक एकीकृत कानूनी ढांचे के जरिये ‘एक राष्ट्र-एक अनुबंध’ की व्यवस्था को हासिल करने के लिए विचार विमर्श हो रहा है।