साइरस मिस्त्री की मृत्यु पर पीएम समेत कई लोगों ने जताया दु:ख

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 3:58 PM IST

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की मुंबई के पास सड़क हादसे में रविवार को मौत हो गई। महाराष्ट्र के पालघर में हुए इस हादसे के बाद 54 साल के सायरस को अस्पताल ले जाया गया जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सायरस की गिनती देश के बड़े उद्योगपतियों में होती थी।
प्रधानमंत्री मोदी ने दु:ख व्यक्त किया
वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दुख जताते हुए कहा कि साइरस मिस्त्री का असामयिक निधन स्तब्ध करने वाला है। वह एक होनहार व्यवसायी थे जो भारत की आर्थिक शक्ति में विश्वास करते थे। उनका निधन वाणिज्य और उद्योग जगत के लिए एक बड़ी क्षति है। उसके परिवार तथा मित्रों के लिए संवेदनाएं। उनकी आत्मा को शांति मिले। 

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने किया याद
 टाटा संस के पूर्व चेयरमैन सायरस मिस्त्री की मुंबई के पास सड़क हादसे में मौत से पूरा देश सदमे में है। केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस घटना पर दुख जताते हुए कहा कि ‘महाराष्ट्र के पालघर के पास एक सड़क दुर्घटना में टाटा संस के पूर्व अध्यक्ष साइरस मिस्त्री जी के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के बारे में जानकर गहरा दुख हुआ। उनके परिवार के सदस्यों के प्रति हार्दिक संवेदना। भगवान उसकी आत्मा को शांति दें।’ 
टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखर ने रविवार को पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री के सड़क हादसे में निधन पर शोक जताते हुए कहा कि मिस्त्री को जिंदगी से प्यार था। चंद्रशेखर ने एक बयान में कहा, ‘साइरस मिस्त्री के असमय एवं अचानक निधन से मैं बहुत दुखी हूं। उन्हें जीवन से प्यार था और यह बहुत ही दुख की बात है कि वह इतनी कम उम्र में चल बसे। इस कठिन समय में उनके परिवार के प्रति मेरी गहरी संवेदनाएं हैं।’ 
निर्मला सीतारमण ने दुख व्यक्त किया
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की मृत्यु  पर रविवार को दुख जताते हुए कहा कि वह भारत की आर्थिक प्रगति के लिए प्रतिबद्ध थे। सीतारमण ने एक ट्वीट में कहा, ‘साइरस मिस्त्री का निधन एक बड़ा झटका है। वह भारत की आर्थिक प्रगति में निरंतर योगदान देने के इच्छुक थे। उनके परिजनों और मित्रों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।
 

23 नवंबर 2011 बुधवार की शाम 6 बजे के आसपास देश-दुनिया में एक खबर आश्चर्य बनकर उभरी कि टाटा ग्रुप को नया चेयरमैन मिल गया। सबसे बड़ी बात यह थी कि भावी चेयरमैन टाटा परिवार का न होकर, एक बाहरी व्यक्ति है। अगले कुछ ही घंटों में 43 वर्षीय साइरस पलोनजी मिस्त्री के नाम को एक नई पहचान मिल चुकी थी।
 
इस बात की भी पुष्टि हो गई थी कि साइरस ही 73 वर्षीय रतन टाटा के उत्तराधिकारी होंगे। साइरस मिस्त्री को रतन टाटा का उत्तराधिकारी बनाए जाने की घोषणा के बाद टाटा ग्रुप की कंपनियों के शेयरों में उछाल आया और उनका बाजार पूंजीकरण करीब 52 अरब रुपए बढ़ गया। मिस्त्री को 28 दिसंबर 2012 को टाटा ग्रुप का चेयरमैन बनाया गया था, लेकिन जैसी उम्मीद की जा रही थी वैसा बिल्कुल भी नहीं हुआ।  2016 में साइरस मिस्त्री को इस पद से हटा दिया गया। 

टाटा संस के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री की महाराष्ट्र के पालघर में रविवार को हुई एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह दुर्घटना उस वक्त हुई जब मिस्त्री की कार मुंबई से सटे पालघर जिले में एक डिवाइडर से टकरा गई। उस समय मिस्त्री मर्सिडीज कार में अहमदाबाद से मुंबई लौट रहे थे। पुलिस अधिकारी ने कहा, ‘दुर्घटना दोपहर 3.15 बजे हुई। मिस्त्री अहमदाबाद से मुंबई की ओर जा रहे थे। 
यह हादसा सूर्या नदी पर बने पुल पर हुआ। ऐसा लग रहा है कि यह एक दुर्घटना है।’ इस हादसे में मिस्त्री के साथ यात्रा कर रहे दो अन्य लोग घायल हुए हैं जिनमें कार चालक भी शामिल है। सभी घायलों को गुजरात के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस अधिकारी के मुताबिक हादसे के बारे में अधिक जानकारी घायलों से जुटाने की कोशिश की जाएगी।

ऐसे में यहां हम आपको साइरस मिस्त्री के व्यक्तित्व की कुछ प्रमुख खूबियों के बारे में बता रहे है 
1. जीवन की सादगी में विश्वास

टाटा ग्रुप के सर्वेसर्वा बनाए जाने की घोषणा के दूसरे दिन जब साइरस टाटा के मुंबई स्थित मुख्यालय बॉम्बे हाउस पहुंचे तो वे साधारण से पेंट – शर्ट पहने हुए थे जबकि उनका स्वागत करने वाले लोग सूट-बूट में आए थे। उनकी कमीज की बाहें मुड़ी हुई थी और कुछ बटन खुले थे। हालांकि बाम्बे हॉउस साइरस के लिए नई जगह नहीं थी लेकिन टाटा संस के डिप्टी चेयरमैन के तौर पर मिस्त्री ने पहली बार कदम रखा।
 
2. विनम्र व्यक्तित्व
पिछले कई दशकों से सुर्खियों में रहने के बावजूद रतन टाटा की शख्सियत जमीनी और शर्मीले व्यक्तित्व वाले इंसान है। इसी तरह से साइरस मिस्त्री को करीब से जानने वाले वाले कहते थे वे बिल्कुल रतन टाटा जैसे हैं। दोनों के स्वभाव और खासकर लोगों से मिलने-जुलने की आदत में काफी समानता थी।
 
3. अच्छे मित्र और अच्छे व्यवहार के धनी
मुंबई के कैथेड्रल एंड जॉन कॉनन स्कूल में पढ़ने वाली बड़़ी हस्तियों के बच्चों में वे आसानी से पहचाने जाते थे। वे चमचमाती कार में स्कूल में भले ही जाते थे लेकिन क्लास में एकदम सामान्य व्यवहार करते थे और पढ़ाई के प्रति काफी सजग थे।
 
4.  रतन टाटा की पहली पसंद थे साइरस
रतन टाटा ने साइरस की नियुक्ति पर कहा था, टाटा संस के डिप्टी चेयरमैन के रूप में साइरस पी मिस्त्री का चयन एक अच्छा और दूरदर्शिता पूर्ण निर्णय है। वे अगस्त 2006 से ही टाटा संस के निदेशक मंडल में हैं और मैं उनके गुणों, भागीदारी की उनकी क्षमता, कुशाग्रता तथा नम्रता से प्रभावित हुआ।
 
5. लंबे विचार विमर्श के बाद बने थे चेयरमैन
रतन टाटा का उत्तराधिकारी चुनना टाटा संस के लिए काफी मशक्कत का काम था। अगस्त 2010 में रतन टाटा के उत्तराधिकारी की खोज के लिए सदस्यों की एक समिति बनाई गई थी और इसमें खुद साइरस भी शामिल थे। इसमें शामिल सदस्यों ने सही व्यक्ति की खोज में दुनियाभर में चक्कर लगाए और दर्जनों बैठकें की।
 
उत्तराधिकारी की दौड़ में सबसे आगे रतन टाटा के सौतेले भाई नोएल टाटा चल रहे थे। इसके अलावा इंदिरा नूई समेत 14 अन्य लोग भी शामिल थे। इन सबके इंटरव्यू लिए गए। इनके कामकाज के तरीके, अनुभव, योग्यता को परखा गया और तब जाकर सर्वसम्मति से साइरस को चुना गया। वैसे साइरस रिश्ते में तो नोएल टाटा के साले हैं।
 
शापुरजी पालोनजी मिस्त्री ग्रुप
देश की पुरानी और विश्वसनीय निर्माण कंपनी में इसका नाम शुमार है। शापूरजी पालोनजी ने अपनी शुरुआत लिटिलवुड पालोनजी से की, जिसकी स्थापना उनके पिता शापूरजी मिस्त्री ने की थी। पिछले सौ सालों से मुंबई की पानी की जरूरत पूरी कर रही मालाबार हिल रिजर्वायर का निर्माण इसी कंपनी ने किया था। ताज इंटर कॉन्टिनेंटल होटल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया भवन व एचएसबीसी भवन, ब्रेबोर्न स्टेडियम मुंबई और जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम दिल्ली का निर्माण भी इसी ने किया है।
 
टाटा और पालोनजी का साथ
पालोनजी मिस्त्री लंबे समय से टाटा के बोर्ड सदस्य रहे। उनके पिता शापूरजी पालोनजी मिस्त्री ने 1930 में एफइ दिनशॉ इस्टेट में 12.5% हिस्सेदारी खरीदी थी। इसके बाद  उन्होंने हिस्सेदारी बढ़ा कर 16.5% तक पहुंचाई। टाटा संस में पालोनजी मिस्त्री का परिवार सबसे बड़ा गैर टाटा हिस्सेदार है। 1990 की शुरुआत में पालोनजी मिस्त्री ने अपने खुद के 60 करोड़ रुपए टाटा संस में निवेश किए थे ताकि उनकी हिस्सेदारी बरकरार रहे।
 

First Published : September 4, 2022 | 6:54 PM IST