वित्त मंत्रालय साल की दूसरी छमाही में ‘ग्रीन बॉन्ड’ जारी करने के तौर-तरीकों को अंतिम रूप देने में लगा है। दूसरी छमाही में 5.86 लाख करोड़ रुपये की उधारी जुटाने की योजना में ग्रीन बॉन्ड को भी शामिल किया जाएगा। बिज़नेस स्टैंडर्ड का मानना है कि शुरुआत में सरकार द्वारा जारी की जाने वाली साप्ताहिक प्रतिभूतियों में ग्रीन बॉन्ड की हिस्सेदारी काफी कम होगी और ये बॉन्ड 25,000 करोड़ रुपये से अधिक नहीं होंगे।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के चेयरमैन नितिन गुप्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि निवेशकों को ग्रीन बॉन्ड के प्रति आकर्षित करने के लिए कुछ कर लाभ देने पर भी सरकार के अंदर बात चल रही है। गुप्ता ने कहा, ‘इस पहलू पर चर्चा की जा रही है। यह नीतिगत निर्णय है लेकिन अभी तक कुछ तय नहीं हुआ है।’नाम उजागर नहीं करने की शर्त पर कुछ अधिकारियों ने कहा कि शुरुआती दौर में ये बॉन्ड केवल घरेलू निवेशकों के लिए जारी किए जाएंगे और इसकी रूपरेखा पर बातचीत अंतिम दौर में हैं।
सितंबर अंत में दूसरी छमाही के उधारी कैलेंडर जारी करने के साथ ही इसकी घोषणा की जा सकती है। वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के अधिकारियों ने विश्व बैंक जैसे बहुपक्षीय निकायों से मदद मांगी है और साथ ही बेहतर तरीके से विकसित ग्रीन वित्तीय बाजार वाले अन्य देशों के मौजूदा प्रारूप का भी मूल्यांकन किया जा रहा है।
भारत के संदर्भ में एक अहम मसला यह है कि यहां इसकी कोई स्थानीय परिभाषा नहीं है कि हरित परियोजना में क्या शामिल है। हालांकि ग्रीन बॉन्ड के प्रारूप के तहत सरकार यह स्पष्ट करेगी कि किस तरह की सार्वजनिक क्षेत्र की परियोजनाओं को ग्रीन बॉन्ड के जरिये पैसा मिलेगा।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘ग्रीन बॉन्ड से जुटाई गई पूंजी उन परियोजनाओं और पहल में लगाई जाएगी जिससे भारत को सीओपी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।’ इस साल की शुरुआत में सीओपी26 में भारत के संकल्प में 2030 तक 500 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल करना, 2030 तक अपनी जरूरत की ऊर्जा का 50 फीसदी नवीनीकृत स्रोतों से जुटाने, कुल कार्बन उत्सर्जन में 2030 तक 1 अरब टन कम करना और अर्थव्यवस्था में कार्बन तीव्रता को 45 फीसदी तक घटाने का लक्ष्य है। इसके साथ ही 2070 तक नेट जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल करने की भी प्रतिबद्धता जताई गई है।
अधिकांश देशों में ग्रीन बॉन्ड पर प्रतिफल बेंचमार्क दर से करीब 10 से 15 आधार अंक कम होता है। केंद्र और रिजर्व बैंक भारत में पेश किए जाने वाले ग्रीन बॉन्ड के लिए दरों पर अभी चर्चा कर रहे हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सबसे पहले 2022 के आम बजट में ग्रीन बॉन्ड जारी करने के सरकार के इरादे की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था, ‘2022-23 में सरकार की कुल बाजार उधारी के तहत सॉवरिन ग्रीन बॉन्ड भी जारी किया जाएगा और हरित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए संसाधन जुटाए जाएंगे। इससे मिलने वाले पैसों को सार्वजनिक क्षेत्र की उन परियोजनाओं में लगाया जाएगा जिससे अर्थव्यवस्था को कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी।’