कोविड-19 टीका: भारत का इंतजार खत्म

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:02 AM IST

भारत जब पहले चरण में अनिवार्य सेवा कर्मियों का टीकाकरण आरंभ करेगा तो उसे टीके की तीन करोड़ खुराक की आवश्यकता होगी। इन अनिवार्य सेवा कर्मियों में स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, नगरीय निकायों के कर्मचारी और पुलिसकर्मी आदि शामिल होंगे। सूत्रों के मुताबिक जनवरी के शुरुआती 10 दिनों के भीतर सीरम इंस्टी्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) के पास टीके की 10 करोड़ खुराक होंगी।
कोविड-19 टीकाकरण से जुड़े मसलों पर भारतीय औषधि महानियंत्रक (डीसीजीआई)को सलाह देने का काम कर रही विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने आज कोविशील्ड टीके को सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी। यह टीका ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय और ब्रिटिश औषधि कंपनी ऐस्ट्राजेनेका ने मिलकर बनाई है और पुणे स्थित एसआईआई भारत में इसका निर्माण और विपणन करेगा। सरकार ने भारत बायोटेक से और ब्योरा और आंकड़े मांगे हैं। एसईसी ने अनुशंसा की है कि टीके को खास परिस्थितियों में सीमित आपात इस्तेमाल की इजाजत दी जाए। इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘भारतीय नागरिकों को टीका लगने की शुरुआत होने के बाद एसआईआई को बहुत करीबी नजर रखनी होगी और किसी भी तरह की असमान्यता नजर आने पर तत्काल उसे दर्ज करना होगा। टीका लगवाने वालों को सहमति के दस्तावेज पर भी हस्ताक्षर करने होंगे। हर व्यक्ति को इस बारे में बताया जाएगा कि टीके को किस परिस्थिति में विकसित किया गया और मंजूरी प्रदान की गई।’
डीसीजीआई इन अनुशंसाओं पर विचार करके अंतिम मंजूरी प्रदान करेगा। एसईसी ने कोविशील्ड की दो खुराक को मंजूरी दी है। सूत्र के मुताबिक लक्षण वाले मरीजों में यह टीका 70 प्रतिशत तक कारगर है। इस बीच अमेरिकी औषधि निर्माता कंपनी फाइजर ने शुक्रवार को एसईसी के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत नहीं किया। एसआईआई ने सुरक्षा और प्रतिरोधक क्षमता को लेकर परीक्षण के आंकड़े पेश किए। इसमें यह जानकारी शामिल है कि टीका सार्स-सीओवी-2 वायरस के खिलाफ वांछित प्रतिरोधक क्षमता प्रदान करता है या नहीं। यह अध्ययन 1600 भारतीय स्वयंसेवकों पर तो किया ही गया इसके अलावा ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम में स्वयंसेवकों पर किए गए परीक्षण के नतीजे भी शामिल हैं। यूनाइटेड किंगडम के औषधि नियामक ने ऑक्सफोर्ड ऐस्ट्राजेनेका के टीके को 30 दिसंबर को 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को लगाने को मंजूरी दे दी थी। एसईसी की बैठक में बुधवार को भी इस विषय पर चर्चा हुई थी लेकिन उसने यूनाइटेड किंगडम की मंजूरी की समीक्षा के लिए वक्त मांगने के साथ-साथ कंपनी से टीके की खुराक को लेकर कुछ और आंकड़े मांगे थे।
सूत्रों के अनुसार ब्रिटेन ने पहले ही 10 करोड़ खुराक का अनुबंध कर चुका है। एसआईआई के पास 10 जनवरी तक 10 करोड़ खुराक उपलब्ध होगी। जहां तक भारत बायोटेक की बात है तो
कंपनी ने पहले पहले और दूसरे चरणों के परीक्षण के आधार पर जल्द इस्तेमाल की अनुमति मांगी थी। पहले और दूसरे चरण के परीक्षण में यह देखा जाता है कि टीका कितना सुरक्षित है और इससे किस हद शरीर में प्रतिरोधी क्षमता पैदा होती है। भारत बायोटेक ने एसईसी के समक्ष तीसरे चरण के आंकड़े भी सौंपे थे और कहा था कि अगर टीके को आपात स्थिति में इस्तेमाल की अनुमति मिल जाती है तो भी वे परीक्षण जारी रखेंगे। कंपनी भारत और एशिया के अन्य देशों में करीब 26,000 लोगों पर परीक्षण कर रहा है। कंपनी ने अपने निर्धारित लक्ष्य के आधे से अधिक लोगों को पहले ही जोड़ चुकी है। कंपनी ने 17 नवंबर को तीसरे चरण का परीक्षण शुरू किया था। सूत्र के अनुसार 3,000 लोगों पर हुए परीक्षण के आंकड़े एसईसी को सौंपे गए हैं। भारत बायोटेक के सीएमडी कृष्णा एला ने हाल में कहा था कि बंदरों पर हुए परीक्षण कारगर साबित हुए हैं और मानव पर पहले एवं दूसरे चरण में हुए परीक्षण के नतीजों से टीका के सुरक्षित होने का प्रमाण मिला है इसलिए बाजार में उतारने के लिए अनुमति मांगी जा सकती है। उन्होंने कहा था कि उसका टीका छह महीने के नवजात शिशु और 60 वर्ष के बुजुर्ग दोनों के लिए सुरक्षित है। भारत में 2 जनवरी से टीकाकरण का अभ्यास शुरू हो रहा है और केंद्र ने सभी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों को क्रियान्वयन पर पूरी नजर रखने के लिए कहा है।

First Published : January 2, 2021 | 12:00 AM IST