कांग्रेस को उबारेगा सामूहिक नेतृत्व!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:07 AM IST

कांग्रेस के कई नेताओं द्वारा पत्र लिखकर पार्टी में कई बदलाव किए जाने की मांग के साथ ही पार्टी का अंदरूनी संकट जगजाहिर हुआ है जो पिछले 10 सालों में सबसे खराब है और इसी बीच कांग्रेस कार्यसमिति (सीडब्ल्यूसी) की सोमवार की बैठक में पार्टी का नेतृत्व करने के लिए ‘सामूहिक नेतृत्व’ की बात निकल कर आने की उम्मीद है। पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी इस बैठक में अपना इस्तीफा देने की पेशकश भी कर सकती हैं।
इस महीने की शुरुआत में सोनिया गांधी को एक पत्र लिखकर सामूहिक नेतृत्व तंत्र की मांग की गई जिस पर पार्टी के विभिन्न स्तर के 23 वरिष्ठ नेताओं के हस्ताक्षर थे। सोनिया द्वारा इस महीने की शुरुआत में पार्टी का जायजा लेने के लिए बुलाई गई राज्यसभा सदस्यों की बैठक में भी इस पत्र की वजह से पैदा हुई स्थिति को महसूस किया गया था। इस बैठक के दौरान भी नेताओं ने कहा कि वे नेतृत्व की कमी महसूस कर रहे हैं। कांग्रेस में सोनिया गांधी का अंतरिम अध्यक्ष के तौर पर 10 अगस्त को एक साल पूरा हो चुका है।
जिन लोगों को पार्टी नेता राहुल गांधी द्वारा पहले नजरअंदाज या अपमानित महसूस कराया गया संभवत: वे एक साथ मिलकर यह सुझाव देते दिखाई दिए कि राहुल को पार्टी का नेतृत्व करने में सफलता की कमी को स्वीकार करना चाहिए और एक समिति जैसा ढांचा तैयार करना चाहिए जो कमान संभाल सकता है।
2013 में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के कानून मंत्री के रूप में कपिल सिब्बल भी तत्कालीन सांसद राहुल गांधी के उस अविवेक भरे कदम का शिकार हुए जब उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी ही पार्टी द्वारा तैयार किए गए दागी नेताओं के चुनाव लडऩे के लिए संरक्षित करने वाले अध्यादेश को फाड़ दिया। इसी तरह पृथ्वीराज चव्हाण को शिवसेना के सहयोग से महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए पार्टी का समर्थन मांगने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा। चव्हाण का तर्क था कि अगर कांग्रेस ने शिवसेना सरकार का समर्थन नहीं किया तो भाजपा को महाराष्ट्र से उखाड़ फेंकना नामुमकिन हो जाएगा। सोनिया को पत्र लिखने वाले नेताओं में से कई नेता ऐसे हैं जो राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के निशाने पर थे। राहुल और प्रियंका ने आरोप लगाया था कि लोकसभा चुनाव के लिए टिकट देने में अपने लोगों का पक्ष लेकर इनमें से कुछ नेताओं ने खुद ही पार्टी की हार की पटकथा लिखी थी क्योंकि ज्यादातर उम्मीदवार हार गए थे।
बिज़नेस स्टैंडर्ड से बात करते हुए पार्टी के शीर्ष नेताओं ने कहा कि पार्टी में जो अंदरूनी उथल-पुथल मची हुई थी उसके लिए युवा बनाम बुजुर्ग नेताओं के बीच टकराव को जिम्मेदार ठहराने की बातें गलत हैं। हालांकि यह स्पष्ट है कि जिन लोगों को राहुल गांधी नियुक्त करते थे उन्हें अपने क्षेत्र में वरिष्ठ नेताओं से खतरा दिखा।
पत्र में नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ जनमत जुटाने में सीडब्ल्यूसी पार्टी को प्रभावी ढंग से मार्गदर्शन नहीं दे पा रही है। मोदी सरकार को चुनौती देने में पार्टी की विफलता से चिंतित नेताओं ने पार्टी में बदलाव के लिए सामूहिक कोशिश पर जोर देने की बात की।
नेताओं ने कहा कि सीडब्ल्यूसी की बैठकें महज राजनीतिक घटनाक्रम की प्रतिक्रिया में बुलाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी को राष्ट्रीय एजेंडा तय करने और नीतिगत पहलों के लिए एक विचार-विमर्श वाली संस्था के तौर पर काम करना चाहिए।
नेताओं ने यह भी कहा कि कांग्रेस संसदीय दल की बैठकों में अब कोई चर्चा नहीं होती है और यह सिर्फ पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी के रस्मी संबोधन तक सिमट गया है जिसमें किसी की मृत्यु होने पर शोक समाचार ही पढ़े जाते हैं ।
पत्र में कहा गया है कि पार्टी ने लोकसभा चुनाव के एक साल बाद भी ईमानदारी से आत्ममंथन तक नहीं किया है ताकि पार्टी के कद में लगातार गिरावट  के कारणों का पता लगाया जा सके। इसमें जोर देकर कहा गया कि नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता और पार्टी में गतिरोध की वजह से कार्यकर्ताओं का मनोबल कम हुआ है और पार्टी कमजोर हुई है।
पत्र में कई तरह के सुझाव भी दिए गए हैं और सुधारों की मांग की गई है। पत्र में शक्तियों के विकेंद्रीकरण, प्रदेश इकाइयों के सशक्तीकरण, केंद्रीय संसदीय बोर्ड के तत्काल गठन और  प्रखंड स्तर से लेकर सीडब्ल्यूसी तक सभी स्तर पर कांग्रेस संगठन के चुनाव कराने की बात कही गई है। इस पत्र पर भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पृथ्वीराज चव्हाण, पूर्व मंत्री कपिल सिब्बल और शशि थरूर से लेकर मिलिंद देवड़ा और जितिन प्रसाद जैसे युवा नेताओं के हस्ताक्षर हैं।
निश्चित तौर पर इस पत्र ने सोमवार को कांग्रेस कार्यसमिति के हंगामेदार सत्र के लिए मंच तैयार कर दिया है। हाल ही में जब पार्टी के पूर्व प्रवक्ता संजय झा ने इस तरह के पत्र की बात कही थी तब पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्विटर पर इस बात का खंडन करते हुए झा को आड़े हाथों लिया था। झा के दावे ने कांग्रेस के हलकों में हलचल पैदा कर दी थी। सुरजेवाला ने इसे अन्य मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए भाजपा की चाल कहा था।

First Published : August 23, 2020 | 10:53 PM IST