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Closing Bell: मिडिल ईस्ट में तनाव ने बढ़ाई निवेशकों की चिंता; Sensex ने लगाया 845 अंक का गोता

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इज़राइल संघर्ष में वृद्धि एक गंभीर घटना है और अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में भारतीय बाजार दबाव में रह सकते हैं।

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- April 15, 2024 | 4:15 PM IST

Stock Market Today: भारतीय शेयर बाजार में सोमवार को बड़ी गिरावट दर्ज की गई। ईरान द्वारा इज़राइल पर जवाबी हमले के बाद मिडिल ईस्ट में तनाव की बढ़ती आशंकाओं के कारण निवेशकों की घबराहट बढ़ने से बाजार में गिरावट आई।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान-इज़राइल संघर्ष में वृद्धि एक गंभीर घटना है और अगले कुछ ट्रेडिंग सेशन में भारतीय बाजार दबाव में रह सकते हैं।

तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) आज 900 से ज्यादा अंकों की गिरावट लेकर 73,315.16 पर खुला। अंत में यह 845.12 अंक या 1.14 प्रतिशत की गिरावट लेकर 73,399.78 के स्तर पर बंद हुआ।

इसी तरह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ़्टी-50 (Nifty-50) भी 246.90 या 1.1 प्रतिशत की गिरावट के साथ 22,272.50 के लेवल पर बंद हुआ। निफ़्टी की 50 कंपनियों में से 44 के शेयर गिरावट में रहे जबकि केवल 6 कंपनियों के शेयर हरे निशान में बंद हुए।

Top Losers

सेंसेक्स की कंपनियों में विप्रो का शेयर सबसे ज्यादा 2.47% लुढ़क गया। साथ ही ICICI Bank, बजाज फिनसर्व, एलएंडटी, बजाज फाइनेंस, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा, एचडीएफ़सी बैंक, एक्सिस बैंक, टीसीएस प्रमुख रूप से घाटे में रहे।

Top Gainers

सिर्फ नेस्ले इंडिया, मारुति और भारती एयरटेल के शेयर ही हरे निशान में बंद हुए।

भारतीय शेयर बाजार में आज गिरावट की वजह ?

1. ईरान और इजराइल के बीच युद्ध: मिडल ईस्ट में तनाव भारतीय इक्विटी बाजार में बिकवाली का प्रमुख कारण है। इससे क्षेत्र में भू-राजनीतिक अनिश्चितता को लेकर संदेह पैदा हो गया है जिससे निवेशकों के मन में चिंता बढ़ गई है।

2. इसके अलावा मिडल ईस्ट में जारी घटनाक्रम के बाद वैश्विक बाजारों में बिकवाली देखने को मिली है। अमेरिकी शेयर बाजार शुक्रवार को गिरावट के साथ बंद हुआ। सोमवार की सुबह के शुरुआती सेशन में प्रमुख एशियाई बाजार जैसे निक्केई, हैंग सेंग, कोस्पी आदि दबाव में कारोबार कर रहे हैं।

3. कच्चे तेल की कीमतों में इजाफे ने भी निवेशकों को चिंता को बढ़ा दिया है। घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कच्चे तेल की कीमतें छह महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। मार्च 2024 में ईंधन की कीमतें 6 प्रतिशत तक बढ़ीं, जबकि अप्रैल 2024 में अब तक 3 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है।

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अच्छा संकेत नहीं है क्योंकि इससे स्थानीय मुद्रा और मुद्रास्फीति पर दबाव पड़ सकता है।

First Published : April 15, 2024 | 4:08 PM IST